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Deoria News: पीएम केयर शोपीस बने 27 वेंटीलेटर, चार हैं लगे, 2 खराब

Tue, 23 Jul 2024 12:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2024 12:59 AM IST
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27 ventilators become PM Care showpiece, four are installed, 2 are defective
मेडिकल कॉलेज के एक कमरे में रखा गया मोबाइल वेंटिलेटर।संवाद
- दो माह पहले की गई थी जांच, इसके बाद स्टोर में फांक रहे धूल
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज में पीएम केयर फंड से 27 वेंटीलेटर आए थे। इसमें चार को कोविड वार्ड में लगाया गया है, जबकि अन्य स्टोर में रखे हैं, जो धूल फांक रहे हैं। दो माह पहले इनकी जांच की गई तो दो में खराबी मिली। इसे ठीक कराने की प्रक्रिया की जा रही है, जो वेंटीलेटर वर्किंग में हैं, दावा किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा 53 और वेंटीलेटर हैं, जिसमें 21 प्रयोग में हैं, जबकि अन्य रखे-रखे बेमतलब साबित हो रहे हैं।
कोविड काल में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में एल-टू हास्पिटल तैयार किया गया था। यहां गंभीर मरीजों के लिए 47 बेड का आईसीयू बनाया गया था। यहां 27 वेंटीलेटर, ऑक्सीजन यूनिट और माॅनीटर लगाए गए थे। इस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद से यह अस्पताल बंद है। एहतियात के तौर पर मेडिकल कॉलेज में बने 20 बेड के कोविड वार्ड में चार वेंटीलेटर लगाए गए हैं, जबकि वेंटीलेटर सहित अन्य उपकरण स्टोर में बंद पड़े हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल भी नहीं हो रहा है। दो माह पहले इन वेंटीलेटरों की जांच की गई थी तो दो में गड़बड़ी मिली।
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इनके मरम्मत की प्रक्रिया की जा रही है। उधर, पीएम केयर के अलावा अन्य करीब 53 वेंटीलेटर मेडिकल कॉलेज में हैं। इसमें पीआईसीयू में 15 व एसएनसीयू में दो का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि वीवीआईपी के लिए बनने वाले सेफ हाऊस और ओटी में दो-दो लगाए गए हैं। इनकी समय-समय जांच होती रहती है।
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वेंटीलेटर की कमी नहीं, गंभीर रोगियों को नहीं मिल पा रही सुविधा
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर की कमी नहीं है। पीएम केयर को लेकर कुल करीब 80 वेंटीलेटर हैं। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज गंभीर रोगियों की सांसें देने से नाकाम साबित हो रहा है। हालत यह है कि मरीजों को मोटी रकम खर्च कर दूसरे शहर का सहारा लेना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज में अब तक आईसीयू न होने के कारण वेंटीलेटर का उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं इसे चलाने के लिए स्टाफ की भी कमी है। इसके चलते मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ सहित अन्य जगहों पर स्थित निजी अस्पतालों का लोगों को सहारा लेना पड़ता है, जहां उन्हें चौबीस घंटे में पांच हजार से दस हजार रुपये तक आईसीयू के लिए खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर बेमतलब साबित हो रहे हैं। अगर इसका इस्तेमाल हो तो मरीजों को काफी सहूलियत होगी।

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मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त वेंटीलेटर हैं। इसमें कुछ इस्तेमाल में लिए जा रहे हैं। आईसीयू की स्थापना के लिए प्रक्रिया की जा रही है। मानव संसाधन की कमी भी है, इस वजह से वेंटीलेटर का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बेहोशी के डॉक्टर व अन्य स्टाफ के लिए शासन से मांग की गई है। आने वाले समय में यह सुविधा लोगों को उपलब्ध हो जाएगी।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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