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बिना एनओसी चल रहे अस्पतालों पर बरती जाएगी सख्ती

Tue, 02 Apr 2019 10:49 PM IST
Harishankar Tiwari हरिशंकर तिवारी
Updated Tue, 02 Apr 2019 10:49 PM IST
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बिना एनओसी चल रहे अस्पतालों पर बरती जाएगी सख्ती
doctor
देवरिया। प्रदूषण नियंत्रण विभाग से बिना एनओसी लिए निजी और सरकारी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। हालांकि निजी अस्पतालों में संक्रमित कचरे के निस्तारण के नाम पर भर्ती मरीजों से शुल्क वसूलते हैं और जेब में रख लेते हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पताल संचालकों पर सख्ती बरतेगा।
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जिले के संचालित हो रहे 92 सीएचसी, पीएचसी और न्यू पीएचसी और 99 निजी अस्पताल तथा 70 पैथालॉजी के पास प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी नहीं ली गयी है। अधिकांश प्राइवेट नर्सिंग होम में मरीज भर्ती रहते हैं। जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन 2016 के प्रावधानों के तहत सभी संक्रमित कचरा निस्तारण करने वाली फर्म से अनुबंध कराना अनिवार्य है। जिला अस्पताल और कुछ सीएचसी को छोड़ अधिकांश सरकारी और प्राइवेट अस्पताल नियम को दरकिनार कर संचालित हो रहे हैं। इलाज के दौरान मरीजों से कचरा निस्तारण का शुल्क वसूला जाता है, लेकिन संचालक उसे गटक जा रहे हैं। एनजीटी की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी सक्रिय हो गया है। प्रदूषण विभाग ने जिले के प्राइवेट अस्पताल, पैथालॉजी सेंटर और डायग्नोस्टिक सेंटरों की सूची मांगी है। सीएमओ धीरेंद्र कुमार ने बताया कि कुछ सरकारी अस्पताल ऐसे हैं, जो प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी नहीं लिए है। इसके लिए कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निजी अस्पतालों की सूची प्रदूषण विभाग को भेजी है। ऐसे अस्पताल संचालकों पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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0-पंजीकरण-5000 रुपये
0-10 बेड तक के अस्पताल-2500 मासिक
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