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ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर अस्पताल प्रशासन उदासीन
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:04 PM IST
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रुद्रपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से हुईं मौतें छोटे-बड़े सभी अस्पतालों की आपात सेवाओं पर सवाल खड़ा कर रही हैं। सीएचसी से लेकर पीएचसी तक आपातकालीन सेवाएं भगवान भरोसे है।
सीएचसी पर इमरजेंसी, इंसेफेलाइटिस वार्ड और जच्चा-बच्चा केंद्रों में लगे ऑक्सीजन के सिलेंडर सिर्फ शो पीस हैं। यहां ऑक्सीजन की आपूर्ति खपत के अनुसार सीएचसी से की जाती है। अस्पताल में अव्यवस्था के चलते ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति और खपत का कोई लेखा जोखा नहीं हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम ने रुद्रपुर के सीएचसी पर ऑक्सीजन के रखरखाव और उसके उपयोग का जायजा लिया तो तमाम खामियां नजर आईं। इमरजेंसी में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर की चाभी ही नहीं मिली। वहां पर रखी गई चाभी से ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं खुला। ऐसे में मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर वार्ड में रखा सिलेंडर किसी काम का नहीं रहेगा। जेई, एईएस वार्ड में ऑक्सीजन का सिलेंडर का कभी उपयोग ही नहीं किया गया था। इस वार्ड में जनवरी से लेकर अब तक कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ। चिकित्सक के अनुसार संभावना के आधार पर आठ माह में एईएस के 10 मरीज रेफर किए गए। चिकित्सकों के अनुसार छह माह से डीजल का भुगतान नहीं होने से इमरजेंसी में जेनरेटर नहीं चलता है। इस बाबत सीएचसी के अधीक्षक डॉ आरपी यादव ने कहा कि डॉक्टरों के कमी से इमरजेंसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। डीजल के बिल का छह माह से भुगतान नहीं हुआ है। आक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त है।
दो चिकित्सकों के सहारे चल रहा सीएचसी
तीन लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए बने रेफरल अस्पताल में डाक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है। यहां अधीक्षक और मेडिकल ऑफिसर को लेकर कुल नौ पद है। नौ पदों के सापेक्ष सिर्फ दो डॉक्टर तैनात हैं। सीएचसी पर फिजिशियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, डेंटल हाइजिनिष्ट के पद वर्षों से खाली चल रहे हैं। वहीं जेई वार्ड में अलग से कोई चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है।
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सीएचसी पर इमरजेंसी, इंसेफेलाइटिस वार्ड और जच्चा-बच्चा केंद्रों में लगे ऑक्सीजन के सिलेंडर सिर्फ शो पीस हैं। यहां ऑक्सीजन की आपूर्ति खपत के अनुसार सीएचसी से की जाती है। अस्पताल में अव्यवस्था के चलते ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति और खपत का कोई लेखा जोखा नहीं हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम ने रुद्रपुर के सीएचसी पर ऑक्सीजन के रखरखाव और उसके उपयोग का जायजा लिया तो तमाम खामियां नजर आईं। इमरजेंसी में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर की चाभी ही नहीं मिली। वहां पर रखी गई चाभी से ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं खुला। ऐसे में मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर वार्ड में रखा सिलेंडर किसी काम का नहीं रहेगा। जेई, एईएस वार्ड में ऑक्सीजन का सिलेंडर का कभी उपयोग ही नहीं किया गया था। इस वार्ड में जनवरी से लेकर अब तक कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ। चिकित्सक के अनुसार संभावना के आधार पर आठ माह में एईएस के 10 मरीज रेफर किए गए। चिकित्सकों के अनुसार छह माह से डीजल का भुगतान नहीं होने से इमरजेंसी में जेनरेटर नहीं चलता है। इस बाबत सीएचसी के अधीक्षक डॉ आरपी यादव ने कहा कि डॉक्टरों के कमी से इमरजेंसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। डीजल के बिल का छह माह से भुगतान नहीं हुआ है। आक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त है।
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दो चिकित्सकों के सहारे चल रहा सीएचसी
तीन लाख लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए बने रेफरल अस्पताल में डाक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है। यहां अधीक्षक और मेडिकल ऑफिसर को लेकर कुल नौ पद है। नौ पदों के सापेक्ष सिर्फ दो डॉक्टर तैनात हैं। सीएचसी पर फिजिशियन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, डेंटल हाइजिनिष्ट के पद वर्षों से खाली चल रहे हैं। वहीं जेई वार्ड में अलग से कोई चिकित्सक तैनात नहीं किया गया है।
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