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कश्मीरी शाल और बंगाल के रेशम में छूट पर कैची
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:35 PM IST
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आसिफ इकबाल
देवरिया। कश्मीरी शॉल और बंगाल का रेशम खरीदने वालों के लिए झटका है। गांधी आश्रम से बिकने वाले सामानों पर छूट में कटौती कर दी गई है। ऑफर के दौर में ग्राहकों का रूझान नहीं हो रहा है। सालाना बिक्री प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल ग्राहकों को 20 प्रतिशत की छूट मिल रही है, जबकि पूर्व के वर्षों में 30 प्रतिशत का छूट मिलता रहा है।
महात्मा गांधी की जयंती से सूती, पोली, ऊनी और रेशम की वस्तुओं पर विशेष ऑफर मिलता है, जो नौ फरवरी यानी 108 दिनों तक प्रभावी रहता था। आंकड़ों पर गौर करें तो छूट के ऑफर की अवधि में बिक्री का हिस्सा सालाना बिक्री का 75 प्रतिशत रहता है। इसमें केंद्र का 20 और राज्य सरकार का 10 प्रतिशत हिस्सा रहता था, लेकिन इस बार राज्य सरकार ने अंशदान देने से इनकार कर दिया है। गांधी आश्रम देवरिया क्षेत्र में कुशीनगर भी शामिल है। दोनों जिलों में गांधी आश्रम की 37 आउटलेट है। देवरिया में 23 और कुशीनगर में 14 हैं। ऑफर शुरू होते ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, लेकिन गांधी आश्रम की दुकानों में सन्नाटा है। सबसे अधिक डिमांड कश्मीर के शॉल की रहती है। बंगाल के रेशम के कद्रदान भी कम नहीं हैं, लेकिन खरीदारों को कम छूट मिलेगी।
यह है सालाना बिक्री
2016-17 में 5.10 करोड़
2015-16 में 5.53 करोड़
2014-15 में 5.30 करोड़
2013-14 में 5.20 करोड़
इन सामानों की अधिक होती है बिक्री
सूती और पोलीके चादर, शॉल, बेडशीट, तौलिया, गमछा, धोती, लुंगी, रेडीमेड शर्ट, कुर्ता और पाजामा,
ऊनी चादर, शॉल, कुर्ता का कपड़ा, जॉकेट, कोट, इनर वियर, मफलर, टोपी और कंबल,
रेशम का कुर्ता, गमछा और चादर
लखनऊ कार्यालय के निर्देश के तहत ग्राहकों को 20 प्रतिशत छूट दी जा रही है। हालांकि प्रत्येक साल 30 छूट मिलती रही है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है कि ग्राहकों का रूझान खरीदारी के लिए नहीं हो रहा है।
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मनोज तिवारी, मंत्री, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम
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देवरिया। कश्मीरी शॉल और बंगाल का रेशम खरीदने वालों के लिए झटका है। गांधी आश्रम से बिकने वाले सामानों पर छूट में कटौती कर दी गई है। ऑफर के दौर में ग्राहकों का रूझान नहीं हो रहा है। सालाना बिक्री प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल ग्राहकों को 20 प्रतिशत की छूट मिल रही है, जबकि पूर्व के वर्षों में 30 प्रतिशत का छूट मिलता रहा है।
महात्मा गांधी की जयंती से सूती, पोली, ऊनी और रेशम की वस्तुओं पर विशेष ऑफर मिलता है, जो नौ फरवरी यानी 108 दिनों तक प्रभावी रहता था। आंकड़ों पर गौर करें तो छूट के ऑफर की अवधि में बिक्री का हिस्सा सालाना बिक्री का 75 प्रतिशत रहता है। इसमें केंद्र का 20 और राज्य सरकार का 10 प्रतिशत हिस्सा रहता था, लेकिन इस बार राज्य सरकार ने अंशदान देने से इनकार कर दिया है। गांधी आश्रम देवरिया क्षेत्र में कुशीनगर भी शामिल है। दोनों जिलों में गांधी आश्रम की 37 आउटलेट है। देवरिया में 23 और कुशीनगर में 14 हैं। ऑफर शुरू होते ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ती थी, लेकिन गांधी आश्रम की दुकानों में सन्नाटा है। सबसे अधिक डिमांड कश्मीर के शॉल की रहती है। बंगाल के रेशम के कद्रदान भी कम नहीं हैं, लेकिन खरीदारों को कम छूट मिलेगी।
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यह है सालाना बिक्री
2016-17 में 5.10 करोड़
2015-16 में 5.53 करोड़
2014-15 में 5.30 करोड़
2013-14 में 5.20 करोड़
इन सामानों की अधिक होती है बिक्री
सूती और पोलीके चादर, शॉल, बेडशीट, तौलिया, गमछा, धोती, लुंगी, रेडीमेड शर्ट, कुर्ता और पाजामा,
ऊनी चादर, शॉल, कुर्ता का कपड़ा, जॉकेट, कोट, इनर वियर, मफलर, टोपी और कंबल,
रेशम का कुर्ता, गमछा और चादर
लखनऊ कार्यालय के निर्देश के तहत ग्राहकों को 20 प्रतिशत छूट दी जा रही है। हालांकि प्रत्येक साल 30 छूट मिलती रही है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है कि ग्राहकों का रूझान खरीदारी के लिए नहीं हो रहा है।
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मनोज तिवारी, मंत्री, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम