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पहले ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का इंतजाम, फिर करें दूसरा काम
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पहले करें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का इंतजाम, फिर दूसरा काम
एनजीटी के कड़े रुख के बाद डीएम ने निकायों के ईओ को भेजा पत्र
एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट, लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर शासन गंभीर हो गया है। एनजीटी के कड़े निर्देशों के बाद डीएम ने जिले के सभी निकायों के ईओ को पत्र प्रेषित कर अपशिष्ट प्रबंधन को कड़ाई से लागू करने को कहा है। निकाय अपने उपलब्ध बजट में से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य सुनिश्चित करने के बाद ही कोई दूसरा कार्य करेंगे। सात दिनों में इसकी प्रगति रिपोर्ट तलब की है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों को स्वच्छ बनाना सरकार की प्राथमिकता में है। तमाम कोशिशों के बाद भी निकायों में यह अभियान जोर नहीं पकड़ पा रहा। इसका प्रमुख कारण कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था का अभाव है। घरों-दुकानों से हर रोज एकत्रित हो रहा कई टन कचरा अस्थायी डंपिंग ग्राउंड पर फेंक दिया जा रहा है। यह कूड़ा महीनों तक इसी स्थान पर सड़ता रहता है। इसकी दुर्गंध न सिर्फ बीमारियां फैला रही है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित करती है। वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने निकाय स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए मानक भी तैयार किए। बार-बार हिदायतों के बावजूद प्रदेश की निकायों में स्थिति बदहाल है। कहीं जमीन का अभाव बना हुआ है तो कहीं बजट का रोना रोते हुए निकाय इसका बंदोबस्त करने में हिचक रहे हैं। अब एनजीटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कड़ी हिदायत दी है। इसके तहत अगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली को लागू करने में कोताही बरती गई तो संबंधित अफसर को जिम्मेदार मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन के इस पत्र के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। डीएम अमित किशोर ने जिले की सभी निकायों के ईओ को इस बाबत पत्र भेजकर कहा है कि निकाय समस्त स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली में वर्णित दायित्वों का निर्वहन प्राथमिकता से पूरा करें। अगर इसमें कमी मिलती है और निकाय अपने बजट का उपभोग किसी अन्य मद में करता है तो इसे लापरवाही मानते हुए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम - 1986 की धारा का उल्लंघन मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिले में हैं कुल 11 निकाय
जिले में कुल 11 नगरीय निकाय हैं। इसमें देवरिया और बरहज नगरपालिका है, जबकि सलेमपुर, भाटपाररानी, मझौलीराज, लार, भटनी, गौरीबाजार, रुद्रपुर, रामपुर कारखाना व बरियारपुर नगर पंचायत।
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हर रोज निकलता है 200 टन कूड़ा
जिले के नगरीय निकायों से हर रोज औसतन 200 टन कूड़ा निकलता है। इसमें अकेले 70 टन कूड़ा देवरिया नगर पालिका क्षेत्र का है। घर, दुकान, दफ्तर, सार्वजनिक स्थान से एकत्रित कचरे को कर्मचारी सड़क किनारे अस्थायी डंपिंग ग्राउंड पर ही उड़ेल देते हैं। नगरीय क्षेत्रों में स्थायी डंपिंग ग्राउंड भी नहीं होने से कूड़े का समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा।
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एनजीटी के कड़े रुख के बाद डीएम ने निकायों के ईओ को भेजा पत्र
एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट, लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। नगरीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर शासन गंभीर हो गया है। एनजीटी के कड़े निर्देशों के बाद डीएम ने जिले के सभी निकायों के ईओ को पत्र प्रेषित कर अपशिष्ट प्रबंधन को कड़ाई से लागू करने को कहा है। निकाय अपने उपलब्ध बजट में से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य सुनिश्चित करने के बाद ही कोई दूसरा कार्य करेंगे। सात दिनों में इसकी प्रगति रिपोर्ट तलब की है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों को स्वच्छ बनाना सरकार की प्राथमिकता में है। तमाम कोशिशों के बाद भी निकायों में यह अभियान जोर नहीं पकड़ पा रहा। इसका प्रमुख कारण कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था का अभाव है। घरों-दुकानों से हर रोज एकत्रित हो रहा कई टन कचरा अस्थायी डंपिंग ग्राउंड पर फेंक दिया जा रहा है। यह कूड़ा महीनों तक इसी स्थान पर सड़ता रहता है। इसकी दुर्गंध न सिर्फ बीमारियां फैला रही है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित करती है। वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने निकाय स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए मानक भी तैयार किए। बार-बार हिदायतों के बावजूद प्रदेश की निकायों में स्थिति बदहाल है। कहीं जमीन का अभाव बना हुआ है तो कहीं बजट का रोना रोते हुए निकाय इसका बंदोबस्त करने में हिचक रहे हैं। अब एनजीटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कड़ी हिदायत दी है। इसके तहत अगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली को लागू करने में कोताही बरती गई तो संबंधित अफसर को जिम्मेदार मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शासन के इस पत्र के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। डीएम अमित किशोर ने जिले की सभी निकायों के ईओ को इस बाबत पत्र भेजकर कहा है कि निकाय समस्त स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली में वर्णित दायित्वों का निर्वहन प्राथमिकता से पूरा करें। अगर इसमें कमी मिलती है और निकाय अपने बजट का उपभोग किसी अन्य मद में करता है तो इसे लापरवाही मानते हुए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम - 1986 की धारा का उल्लंघन मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में हैं कुल 11 निकाय
जिले में कुल 11 नगरीय निकाय हैं। इसमें देवरिया और बरहज नगरपालिका है, जबकि सलेमपुर, भाटपाररानी, मझौलीराज, लार, भटनी, गौरीबाजार, रुद्रपुर, रामपुर कारखाना व बरियारपुर नगर पंचायत।
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हर रोज निकलता है 200 टन कूड़ा
जिले के नगरीय निकायों से हर रोज औसतन 200 टन कूड़ा निकलता है। इसमें अकेले 70 टन कूड़ा देवरिया नगर पालिका क्षेत्र का है। घर, दुकान, दफ्तर, सार्वजनिक स्थान से एकत्रित कचरे को कर्मचारी सड़क किनारे अस्थायी डंपिंग ग्राउंड पर ही उड़ेल देते हैं। नगरीय क्षेत्रों में स्थायी डंपिंग ग्राउंड भी नहीं होने से कूड़े का समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा।