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जलस्तर घटने से धंसने लगे पानी से घिरे मकान
Updated Wed, 30 Aug 2017 10:49 PM IST
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रुद्रपुर/एकौना। दस दिनों से बाढ़ के पानी से घिरे मकान जलस्तर घटने के साथ धंसने लगे हैं। भीषण त्रासदी झेल रहे दोआबा के 52 गांव के लोगों की जान खतरे में पड़ी है। मकान की छतों पर ठौर बना रखे लोगों को मकान के साथ पानी में समां जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है। कई गांवों में बाढ़ पीड़ितों की मकान में दरार पड़ गए हैं।
बुधवार को गोर्रा 71.20 और राप्ती 70.90 मीटर पर बह रही थी। नदियों के घटते जलस्तर से गांवों में बदबू उठने लगी है। बाढ़ के पानी से घिरे बेलवा दुबौली, नरायनपुर, बहोरा दलपतपपुर, पचरूखा, एकौना, भेड़ी, बैदा, ईश्वरपुरा, बकरूआ, लालपुर परसिया गांव में मकानों में दरार पड़ने लगे हैं। बाढ़ के पानी में डूबे गांवों में अधिकांश लोग छतों पर ही शरण लिए हैं। झोपड़ी में रहने वाले बंधों पर शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं। अनुसा गांव के हरेराम साहनी, जयकिशुन, बैदा के किशोर, बलराम साहनी, विनोद पासवान आदि का परिवार छतों पर जिंदगी गुजार रहा है। उन्होंने कहा कि रात में अक्सर मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। बंधों पर जगह नहीं होने के कारण घर नहीं छोड़ रहे हैं। गांवों में फैली गंदगी से महामारी फैलने की आशंका बनी है। बाढ़ में घिरे लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थानों पर शरण दिलाने की मांग की।
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बुधवार को गोर्रा 71.20 और राप्ती 70.90 मीटर पर बह रही थी। नदियों के घटते जलस्तर से गांवों में बदबू उठने लगी है। बाढ़ के पानी से घिरे बेलवा दुबौली, नरायनपुर, बहोरा दलपतपपुर, पचरूखा, एकौना, भेड़ी, बैदा, ईश्वरपुरा, बकरूआ, लालपुर परसिया गांव में मकानों में दरार पड़ने लगे हैं। बाढ़ के पानी में डूबे गांवों में अधिकांश लोग छतों पर ही शरण लिए हैं। झोपड़ी में रहने वाले बंधों पर शरणार्थी का जीवन जी रहे हैं। अनुसा गांव के हरेराम साहनी, जयकिशुन, बैदा के किशोर, बलराम साहनी, विनोद पासवान आदि का परिवार छतों पर जिंदगी गुजार रहा है। उन्होंने कहा कि रात में अक्सर मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। बंधों पर जगह नहीं होने के कारण घर नहीं छोड़ रहे हैं। गांवों में फैली गंदगी से महामारी फैलने की आशंका बनी है। बाढ़ में घिरे लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थानों पर शरण दिलाने की मांग की।
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