फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Deoria News ›   नदियां गुर्रा रहीं थीं, प्रशासन अपनी धुन में था

नदियां गुर्रा रहीं थीं, प्रशासन अपनी धुन में था

Tue, 22 Aug 2017 10:36 PM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 10:36 PM IST
विज्ञापन
नदियां गुर्रा रहीं थीं, प्रशासन अपनी धुन में था
सुधीर श्रीवास्तव
विज्ञापन

देवरिया। घाघरा, राप्ती और गोर्रा नदियां एक सप्ताह से गुर्रा रही थीं। पानी की ठोकरें बांध तोड़ने को बेताब थीं, जिम्मेदार खामोश थे। यदि पहले कोई कदम उठाया गया होता तो रुद्रपुर का बेलवा जमींदारी बांध नहीं टूटता। गोरखपुर के बाद अब देवरिया में भी बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। आलम यह है कि बंधों पर शरण लिए पीड़ितों की रात भूखे पेट कट रही है। राज्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश निषाद का दौरा महज दिखावा साबित हो रहा है। और बाढ़ पीड़ित खाने को तरस रहे हैं।
बरहज के कोलखास के विस्थापित पटना गांव में पहले से किसी तरह जिंदगी जी रहे थे, कि घाघरा का पानी उनके तंबू में घुसा गया। अब ये रामजानकी मार्ग पर आ गए हैं। सड़क के किनारे प्लास्टिक डालकर रह रहे विस्थापितों का कोई पुरसाहाल नहीं। फूलमती का कहना है कि लगता है घाघरा मैया हमसे नाराज हैं, तभी तो पांच साल पहले कोलखास को डुबोने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ रहीं। कोलखास के विस्थापित दुखी मल्लाह प्रशासन के रुख से खफा हैं। उनका कहना है कि तीन दिनों से उनका कुनबा सड़क पर है, प्रशासन की ओर से कोई राहत सामग्री नहीं मिली। रुद्रपुर के पचलड़ी गांव में नदी के मुहाने बसे लोगों की जिंदगी भी बंधे पर कट रही है। अब बेलवा जमींदारी बंधा टूट जाने से आफत आ गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ के आने की सूचना पर प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ था। आनन-फानन में डीएम और एसपी ने बरहज का दौराकर सारी व्यवस्था ठीक करा दी, लेकिन सीएम का कार्यक्रम निरस्त होने के बाद डीएम ने बाढ़ पीड़ितों की सुध लेना उचित नहीं समझा। कुछ ऐसा ही हाल रुद्रपुर का है। राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद बाढ़ पीड़ितों के बीच नहीं पहुंचें। इसके चलते जनता में नाराजगी है।
विज्ञापन


प्रशासन को 15 करोड़ रुपये की दरकार
बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंच रही हो या नहीं, लेकिन प्रशासन को बाढ़ बचाव के लिए 15 करोड़ रुपये और चाहिए। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। हालांकि इस मद में 20 लाख रुपये उपलब्ध करा दिया गया है। आटा, चावल, लंच पैकेट आदि पर 38 हजार रुपये खर्च किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed