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सरहद की निगरानी करेगा शहीद का बेटा
Updated Mon, 14 Aug 2017 10:48 PM IST
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सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। देश की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले एक वीर शहीद सैनिक का बेटा पिता की राह पर चल पड़ा है। उसकी मां ने उसे देश की सेवा करने का मंत्र दिया। रुद्रपुर के पकड़ी मिश्र गांव के रहने वाले शहीद रामसहाय मिश्र की शहादत की आग सीने में लेकर बेटा आदित्य सेना में आफिसर की ट्रेनिंग ले रहा है। वह थल सेना में अधिकारी बनेगा।
पकड़ी मिश्र गांव के रहने वाले शहीद रामसहाय मिश्र वर्ष 2001 में लोगोवाला सेक्टर की सीमा पर आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए थे। उनकी शहादत के समय उनका बेटा आठ वर्ष का था। 12 जाट रेजिमेंट में तैनात सिपाही की पत्नी मनोरमा देवी ने पति की शहादत के बाद बेटे को सैनिक बनने की प्रेरणा दीं। वह बेटे को पिता के बहादुरी के किस्से सुनाती रहती थीं। अमर शहीद की बलिदानी कथा आज भी रुद्रपुर के लोगों के जेहन में कौंधती रहती है। शहीद की पत्नी लीलावती देवी ने कहा कि वह बेटे को सेना में अफसर बनाने के लिए काफी मेहनत कीं। उनका बेटा आदित्य परीक्षा पास कर देहरादून के ट्रेनिंग सेंटर में अधिकारी का प्रशिक्षण ले रहा है।
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रुद्रपुर। देश की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले एक वीर शहीद सैनिक का बेटा पिता की राह पर चल पड़ा है। उसकी मां ने उसे देश की सेवा करने का मंत्र दिया। रुद्रपुर के पकड़ी मिश्र गांव के रहने वाले शहीद रामसहाय मिश्र की शहादत की आग सीने में लेकर बेटा आदित्य सेना में आफिसर की ट्रेनिंग ले रहा है। वह थल सेना में अधिकारी बनेगा।
पकड़ी मिश्र गांव के रहने वाले शहीद रामसहाय मिश्र वर्ष 2001 में लोगोवाला सेक्टर की सीमा पर आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए थे। उनकी शहादत के समय उनका बेटा आठ वर्ष का था। 12 जाट रेजिमेंट में तैनात सिपाही की पत्नी मनोरमा देवी ने पति की शहादत के बाद बेटे को सैनिक बनने की प्रेरणा दीं। वह बेटे को पिता के बहादुरी के किस्से सुनाती रहती थीं। अमर शहीद की बलिदानी कथा आज भी रुद्रपुर के लोगों के जेहन में कौंधती रहती है। शहीद की पत्नी लीलावती देवी ने कहा कि वह बेटे को सेना में अफसर बनाने के लिए काफी मेहनत कीं। उनका बेटा आदित्य परीक्षा पास कर देहरादून के ट्रेनिंग सेंटर में अधिकारी का प्रशिक्षण ले रहा है।
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