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बिहार बार्डर के गांवों में कालाजार का प्रकोप बढ़ा

Fri, 05 Apr 2019 10:23 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Apr 2019 10:23 PM IST
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बिहार बार्डर के गांवों में कालाजार का प्रकोप बढ़ा
बिहार बॉर्डर के गांवों में कालाजार का प्रकोप बढ़ा
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गांवों में पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
पांच वर्षों में जिले के कई गांवों में 96 मरीज मिले
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। कालाजार के बढ़ते मरीजों को लेकर स्वास्थ्य महकमे की परेशानी बढ़ गई है। प्रभावित गांवों में अभियान चलाकर मरीजों की तलाश हो रही है। बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए विभाग की ओर से दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
कालाजार को जड़ से समाप्त करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले के भाटपाररानी, बनकटा और भटनी ब्लॉक के गांवों में इस बीमारी का प्रकोप ज्यादा है। चिह्नित मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में कराया जा रहा है। इसकी निगरानी स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही है। यह बीमारी बिहार प्रांत की है। इसलिए बॉर्डर के गांवों के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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यह गांव हैं बीमारी से प्रभावित
भाटपाररानी ब्लॉक का टड़वा, भटनी ब्लॉक का बनकटा शिव, पिपरा बिट्ठल, बनकटा ब्लॉक के सुंदरपार, रामपुर बाजार, खुरवसिया उत्तर, खुरवसिया दक्षिण पट्टी, बैकुंठपुर, पकड़ी नरहियां, जानकी कुटियाभर, नियरवा, सिकटियां बाजार, राजापुर, गजहड़वा, पकड़ी बाजार, कड़सरवा बुजुर्ग गांव शामिल है। पथरदेवा, भलुअनी, रामनाथ देवरिया व गरुलपार में भी कालाजार के मरीज मिले हैं। देसही देवरिया, पथरदेवा व महेन में भी एक-एक मरीज मिल चुके हैं।
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2018 में सर्वाधिक मरीज मिले
स्वास्थ्य विभाग के पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो 2014 में दो, 2015 में चार, 2016 में 11, 2017 में 29, 2018 में 41, मार्च 2019 तक नौ कालाजार के मरीज मिले हैं।
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क्या है कालाजार के लक्षण
कालाजार बालू मक्खी (सैंड फ्लाई) से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से चार फुट ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है। रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। 15 दिन से अधिक समय तक अगर एंटी बायोटिक व एंटी मलेरियल दवा खाने के बाद बुखार नहीं ठीक हो रहा है तो मरीज को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। मरीज का पेट फूल जाता है व उसे भूख कम लगती है। उसका शरीर काला पड़ जाता है।
ऐसे कर सक ते हैं अपना बचाव
बालू मक्खी से बचाव के लिए घर में दवा का छिड़काव करवाना चाहिए, जिससे मक्खियां मर जाए। घर की दीवारों में नमी बिल्कुल नहीं रहने दें। मिट्टी के घरों की पुताई करते रहें और सुराखों को बंद कर दें। पक्के मकान में अगर प्लास्टर न हो तो उसे प्लास्टर करा दें। इन सुराखों व नमी वाले स्थान पर ही बालू मक्खी का निवास होता है। जमीन पर न सोएं व चारपाई या तख्त का उपयोग करें।

बयान
अभियान चलाकर कालाजार मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है। किसी मरीज को 15 दिन से अधिक बुखार आए तो किसी भी पीएचसी, सीएचसी तथा जिला अस्पताल में जांच कराएं। इसकी जांच और इलाज निशुल्क उपलब्ध है। -शिव प्रसाद तिवारी, जिला मलेरिया अधिकारी।
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