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नवरात्र आज से, देवी की अगवानी में सजे मंदिर
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देवरिया। वासंतिक नवरात्र की शुरुआत शनिवार से हो रही है। इस बार नवरात्र आठ दिनों का होगा, लिहाजा रामनवमी 13 को ही मनाई जाएगी। शक्ति की उपासना के विशेष काल में पूजन-अर्चन की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को बाजारों में चहल-पहल रही। नारियल, चुनरी, फलाहार सहित पूजन सामग्री की खरीदारी को लेकर दुकानों पर देर शाम तक भीड़ देखी गई। मंदिरों की साफ-सफाई के साथ सजावट में समिति के लोग जुटे रहे।
वर्ष के कुल चार नवरात्रों में से वासंतिक नवरात्र का विशेष महत्व है। यह समय प्रकृति में भी बदलाव का होता है, जिसके शरीर पर दुष्प्रभाव दिखते हैं। ऐसे समय में दुख, संताप और संकटों से मुक्ति के लिए मां आदिशक्ति की उपासना का विधान है। नवरात्र की पावन बेला में पूजन-अर्चन कर मां का आशीर्वाद पाने के लिए हर कोई लालायित रहता है। एक दिन पहले से ही इसका असर दिखने लगा है। बाजारों में फल-फूल, नारियल, चुनरी आदि की दुकानों पर लोग खरीदारी में मशगूल रहे। मालवीय रोड पर सड़क किनारे लगे कलश की दुकानों सुबह ही सज गई थी, जिस पर खरीदारों की भीड़ रही। उधर, शहर के देवरही मंदिर, राघवनगर दुर्गा मंदिर, गरुणपार स्थित काली मंदिर, अमेठी माता मंदिर, लाहिलपार व अहिल्यापुर की दुर्गा मंदिर में साफ-सफाई और सजावट जोरों पर थी। इन प्रमुख मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति के लोग व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
इस मुहूर्त में करें कलश स्थापना
छह अप्रैल दिन शनिवार को सूर्योदय 5.48 बजे और प्रतिपदा तिथि दिन में 2.36 बजे, रेवती नक्षत्र प्रात: 6.48 बजे और वैधृति योग रात 9.21 बजे तक है। शास्त्रों में चित्रा-वैधृति योग को कलश स्थापना के लिए अमान्य माना गया है। कलश स्थापन के लिए वैसे तो प्रतिपदा को सर्वोत्तम माना जाता है। पं. शरदचंद मिश्र और दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि कि इस वर्ष घट स्थापना के लिए सुबह 7.20 से 8.53 बजे तक अति पुण्यकारी मुहूर्त है। यदि किन्हीं कारणों से नहीं कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त एवं मध्यान्ह में 11.30 से 12.18 बजे तक किया जाना उत्तम रहेगा।
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वर्ष के कुल चार नवरात्रों में से वासंतिक नवरात्र का विशेष महत्व है। यह समय प्रकृति में भी बदलाव का होता है, जिसके शरीर पर दुष्प्रभाव दिखते हैं। ऐसे समय में दुख, संताप और संकटों से मुक्ति के लिए मां आदिशक्ति की उपासना का विधान है। नवरात्र की पावन बेला में पूजन-अर्चन कर मां का आशीर्वाद पाने के लिए हर कोई लालायित रहता है। एक दिन पहले से ही इसका असर दिखने लगा है। बाजारों में फल-फूल, नारियल, चुनरी आदि की दुकानों पर लोग खरीदारी में मशगूल रहे। मालवीय रोड पर सड़क किनारे लगे कलश की दुकानों सुबह ही सज गई थी, जिस पर खरीदारों की भीड़ रही। उधर, शहर के देवरही मंदिर, राघवनगर दुर्गा मंदिर, गरुणपार स्थित काली मंदिर, अमेठी माता मंदिर, लाहिलपार व अहिल्यापुर की दुर्गा मंदिर में साफ-सफाई और सजावट जोरों पर थी। इन प्रमुख मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति के लोग व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
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इस मुहूर्त में करें कलश स्थापना
छह अप्रैल दिन शनिवार को सूर्योदय 5.48 बजे और प्रतिपदा तिथि दिन में 2.36 बजे, रेवती नक्षत्र प्रात: 6.48 बजे और वैधृति योग रात 9.21 बजे तक है। शास्त्रों में चित्रा-वैधृति योग को कलश स्थापना के लिए अमान्य माना गया है। कलश स्थापन के लिए वैसे तो प्रतिपदा को सर्वोत्तम माना जाता है। पं. शरदचंद मिश्र और दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि कि इस वर्ष घट स्थापना के लिए सुबह 7.20 से 8.53 बजे तक अति पुण्यकारी मुहूर्त है। यदि किन्हीं कारणों से नहीं कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त एवं मध्यान्ह में 11.30 से 12.18 बजे तक किया जाना उत्तम रहेगा।
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