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अफवाहों से बेखौफ रही, नई इबारत गढ़ गई धर्मनगरी
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फोटो- 20-चित्रकूट में े अयोध्या मंदिर मस्जिद मामले का फैसला आने के बाद शहर के कजियाना मस्जिद में गल?
- फोटो : CHITRAKUTT
भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूटधाम परिक्षेत्र अतिप्राचीन काल से सांप्रदायिक सद्भाव, अखंडता व एकता की बडे़ शहरों के लिए नजीर रहा है। अयोध्या मंदिर मस्जिद को लेकर फैसले में कई दिनों से चल रहे खौफ व आशंकाओं को दर किनार कर धर्मनगरी के वांशिदों ने सद्भावना की नई इबारत गढ़ दी है।
सांप्रदायिक सद्भाव वाली इस तपोभूमि में रामायण काल से ही अनोखी व अद्भुत रही है। इसके पीछे इस क्षेत्र में रहने वाले हर वर्ग के समझदार लोग हैं। मुगल शासक औरंगजेब ने रामघाट के पास बालाजी मंदिर का निर्माण कराया।
जिसका ताम्रपत्र आज भी बालाजी मंदिर में रखा है। किसी भी समय इस परिक्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम कोई भी न तो विवाद हुआ और न ही किसी प्रकार का दंगा हुआ। यह परिक्षेत्र हमेशा सांप्रदायिक एकता की मिसाल रहा है।
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1992 की कारसेवा से लेकर कई मौके पर प्रदर्शन के बाद 2010 में हाईकोर्ट के फैसला हो अथवा नौ नंवबर 2019 का एतिहासिक दिन के रूप में दर्ज दिन हो..हर बार भगवान श्रीराम की तपोभूमि वाली धर्मनगरी सद्भाव की नई इबारत की गढ़ती रही।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब धर्मनगरी के लोग यही कह रहे हैं कि यह तेरी जीत न मेरी हार है। हर वर्ग को तेरा फैसला स्वीकार है।
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सांप्रदायिक सद्भाव वाली इस तपोभूमि में रामायण काल से ही अनोखी व अद्भुत रही है। इसके पीछे इस क्षेत्र में रहने वाले हर वर्ग के समझदार लोग हैं। मुगल शासक औरंगजेब ने रामघाट के पास बालाजी मंदिर का निर्माण कराया।
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जिसका ताम्रपत्र आज भी बालाजी मंदिर में रखा है। किसी भी समय इस परिक्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम कोई भी न तो विवाद हुआ और न ही किसी प्रकार का दंगा हुआ। यह परिक्षेत्र हमेशा सांप्रदायिक एकता की मिसाल रहा है।
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1992 की कारसेवा से लेकर कई मौके पर प्रदर्शन के बाद 2010 में हाईकोर्ट के फैसला हो अथवा नौ नंवबर 2019 का एतिहासिक दिन के रूप में दर्ज दिन हो..हर बार भगवान श्रीराम की तपोभूमि वाली धर्मनगरी सद्भाव की नई इबारत की गढ़ती रही।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब धर्मनगरी के लोग यही कह रहे हैं कि यह तेरी जीत न मेरी हार है। हर वर्ग को तेरा फैसला स्वीकार है।