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पूजा और वंदना कर लिया गुरु का आशीर्वाद
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फोटो- 6- गुरुपूर्णिमा पर गायत्री शक्तिपीठ में भक्तों को आशीर्वाद देते आचार्य रामनारायण त्रिपाठी?
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। गुरु पूर्णिमा पर सुदूर क्षेत्र से श्रद्धालु गुरु के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए धर्मनगरी पहुंचे। आश्रमों में दिनभर आशीर्वाद लेने का सिलसिला चलता रहा। कई शिष्य वीडियो कालिंग से ही गुरु से आशीर्वाद लिया। रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान कर कामद्गिरी की परिक्रमा लगाई। कोरोना काल के नियमों के आधार पर ही कार्यक्रम आयोजित हुए, जबकि कई आश्रमों में अनौपचारिकता निभाई गई।
भारतीय परंपरा में गुरु का महत्व, ज्ञान के लिए गुरु के प्रति कृतज्ञता समर्पण करने के लिए सुदूर क्षेत्रों से लोग धर्म नगरी पहुुंचे। विधि विधान से गुरु की पूजा की। आश्रमों में भजन कीर्तन का भी आयोजन किया गया। कोरोना काल को देखते हुए आश्रमों अधिक भीड़ जमा नहीं होने दिया। नियमों के आधार पर काम किया।
कई शिष्य अपने वीडियो काल के माध्यम से ही दर्शन किया। धर्मनगरी के सनमादिक आश्रम, पंजाबी आश्रम, रघुवीर मंदिर, रावतपुरा सरकार आश्रम, संतोषी अखाड़ा, गायत्री शक्ति पीठ, भागवत पीठ, पंपासुर पर्वत स्थल, रामधाम मंदिर, भरत मंदिर, यज्ञवेदी मंदिर, स्वर्ग आश्रम, पीलीकोठी, सती अनुसूइया आश्रम, वेदांती आश्रम, पम्पापुर आश्रम, सुतीक्षण मुनी आश्रम, सरभंग ऋषि आश्रम सहित अन्य आश्रमों में कार्यक्रम हुए। धारकुंडी आश्रम सहित कई आश्रमों में कार्यक्रम नहीं हुआ। यूपी व एमपी के शासन ने निर्देशों का पालन कराने के लिए पुलिस के जवान धर्मनगरी में तैनात रहे।
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गुरु का बताया महत्व
संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते है। गुरु के उपदेशों को सुनने व आत्मसात करने से सद्ज्ञान प्राप्त होता है। संसार में सबसे दुर्लभ यदि कुछ है तो वह सद्गुरु का सानिध्य। जिस प्रकार सूरज की किरणें सबको समान रूप से प्रकाश और गरमी देती हैं उसी प्रकार एक आत्मवान आध्यात्मिक गुरु अपनी कृपा और करुणा सभी पर समान रूप से रखते हैं।
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भारतीय परंपरा में गुरु का महत्व, ज्ञान के लिए गुरु के प्रति कृतज्ञता समर्पण करने के लिए सुदूर क्षेत्रों से लोग धर्म नगरी पहुुंचे। विधि विधान से गुरु की पूजा की। आश्रमों में भजन कीर्तन का भी आयोजन किया गया। कोरोना काल को देखते हुए आश्रमों अधिक भीड़ जमा नहीं होने दिया। नियमों के आधार पर काम किया।
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कई शिष्य अपने वीडियो काल के माध्यम से ही दर्शन किया। धर्मनगरी के सनमादिक आश्रम, पंजाबी आश्रम, रघुवीर मंदिर, रावतपुरा सरकार आश्रम, संतोषी अखाड़ा, गायत्री शक्ति पीठ, भागवत पीठ, पंपासुर पर्वत स्थल, रामधाम मंदिर, भरत मंदिर, यज्ञवेदी मंदिर, स्वर्ग आश्रम, पीलीकोठी, सती अनुसूइया आश्रम, वेदांती आश्रम, पम्पापुर आश्रम, सुतीक्षण मुनी आश्रम, सरभंग ऋषि आश्रम सहित अन्य आश्रमों में कार्यक्रम हुए। धारकुंडी आश्रम सहित कई आश्रमों में कार्यक्रम नहीं हुआ। यूपी व एमपी के शासन ने निर्देशों का पालन कराने के लिए पुलिस के जवान धर्मनगरी में तैनात रहे।
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गुरु का बताया महत्व
संत नवलेश दीक्षित ने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते है। गुरु के उपदेशों को सुनने व आत्मसात करने से सद्ज्ञान प्राप्त होता है। संसार में सबसे दुर्लभ यदि कुछ है तो वह सद्गुरु का सानिध्य। जिस प्रकार सूरज की किरणें सबको समान रूप से प्रकाश और गरमी देती हैं उसी प्रकार एक आत्मवान आध्यात्मिक गुरु अपनी कृपा और करुणा सभी पर समान रूप से रखते हैं।

फोटो- 7- गुरुपूर्णिमा पर परिक्रमा मार्ग के भागवत पीठ में भगवताचार्य नवलेश दीक्षित से आशीर्वाद लेत- फोटो : CHITRAKOOT