{"_id":"67c34f9abf7b993203011829","slug":"where-ram-katha-is-there-is-the-confluence-of-ganga-yamuna-and-saraswati-chitrakoot-news-c-215-1-ckt1002-113507-2025-03-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: जहां रामकथा वहीं गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: जहां रामकथा वहीं गंगा, यमुना, सरस्वती का संगम
विज्ञापन
रामायण मेला में गीत संगीत प्रस्तुत करतीं कलाकार।
- फोटो : रामायण मेला में गीत संगीत प्रस्तुत करतीं कलाकार।
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में शनिवार को भगवान राम की कथा सुनाई गई। इसके बाद गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें विद्वानों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। सीतापुर में चल रहे रामायण मेला में बांदा के रामकथा व्यास राम प्रताप शुक्ल मानस किंकर ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने बताया था कि जहां पर राम कथा होती है, वहां पर तीर्थराज प्रयाग गंगा, यमुना, सरस्वती उपस्थित होते हैं। रामकथा श्रोताओं को चारों फल धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान करते हैं। छत्तीसगढ़ के विष्णु कुमार तिवारी ने कहा कि जिसने राम का भजन किया, उसे परमगति प्राप्त हुई। राम प्रताप तिवारी ने नवधा भक्ति पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के रामलोचन तिवारी ने कहा कि जिस प्रकार प्रयागराज में गंगा, यमुना व गुप्त सरस्वती नदी का संगम है उसी प्रकार चित्रकूट में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का संगम है।
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला के गोष्ठी में प्रांतों के विद्वानों ने शोध पत्र एवं शोधात्मक वक्तव्य दिए। विद्वान डाॅ. ललित ने कहा कि चित्रकूट सा तीर्थ विश्व में कहीं नहीं मिलता। विश्वभर में कामदगिरि ही ऐसा गिरिराज है, जिसकी रचना का भीतरी भाग अत्यंत रहस्यपूर्ण है। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. अल्का पांडेय ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं पर प्रकाश डाला। असम गुवाहटी के देवेंद्र चंद्र दास सुदामा ने कहा कि रामायण और महाभारत भारतीय सभ्यता और संस्कृति के आधार ग्रंथ है। उन्नाव के डाॅ. गणेश नारायण शुक्ल ने रामकथा को जन मंगल की पावन कथा के रूप में अपनी बात रखी। बांदा के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने गोस्वामी जी पर अपनी श्रद्धा, निष्ठा अर्पित किया।
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में कामदगिरि प्रमुख द्वार के अधिकारी संत मदन गोपाल दास महाराज की अध्यक्षता में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रामजन्म, राम सीता विवाह, परशुराम लक्ष्मण संवाद आदि का मंचन कलाकारों ने किया। रामकथा पर आधारित मेरी नइया में बैठे है राम, गंगा मइया धीरे बहो, सुख के सब साथी दुख में न कोए गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। धनंजय सिंह नटराज संगीत ने भजन गाकर माहौल को भक्तिमय किया। जयेंद्र सरस्वती वेद पाठशाला चित्रकूट और राम संस्कृति महाविद्यालय जानकीकुंड चित्रकूट के विद्वान व वेदपाठी विद्यार्थियों ने वैदिक रामायण एवं तुलसीकृत रामायण की तुलनात्मक प्रश्नोत्त्तरी प्रस्तुत किया। संचालन डाॅ. करुणा शंकर द्विवेदी ने किया। रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, कमलेश मिश्र, विनोद मिश्र ने भगवान की मूर्तियों की पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
विज्ञापन
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला के गोष्ठी में प्रांतों के विद्वानों ने शोध पत्र एवं शोधात्मक वक्तव्य दिए। विद्वान डाॅ. ललित ने कहा कि चित्रकूट सा तीर्थ विश्व में कहीं नहीं मिलता। विश्वभर में कामदगिरि ही ऐसा गिरिराज है, जिसकी रचना का भीतरी भाग अत्यंत रहस्यपूर्ण है। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रो. अल्का पांडेय ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं पर प्रकाश डाला। असम गुवाहटी के देवेंद्र चंद्र दास सुदामा ने कहा कि रामायण और महाभारत भारतीय सभ्यता और संस्कृति के आधार ग्रंथ है। उन्नाव के डाॅ. गणेश नारायण शुक्ल ने रामकथा को जन मंगल की पावन कथा के रूप में अपनी बात रखी। बांदा के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह ने गोस्वामी जी पर अपनी श्रद्धा, निष्ठा अर्पित किया।
विज्ञापन
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में कामदगिरि प्रमुख द्वार के अधिकारी संत मदन गोपाल दास महाराज की अध्यक्षता में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रामजन्म, राम सीता विवाह, परशुराम लक्ष्मण संवाद आदि का मंचन कलाकारों ने किया। रामकथा पर आधारित मेरी नइया में बैठे है राम, गंगा मइया धीरे बहो, सुख के सब साथी दुख में न कोए गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। धनंजय सिंह नटराज संगीत ने भजन गाकर माहौल को भक्तिमय किया। जयेंद्र सरस्वती वेद पाठशाला चित्रकूट और राम संस्कृति महाविद्यालय जानकीकुंड चित्रकूट के विद्वान व वेदपाठी विद्यार्थियों ने वैदिक रामायण एवं तुलसीकृत रामायण की तुलनात्मक प्रश्नोत्त्तरी प्रस्तुत किया। संचालन डाॅ. करुणा शंकर द्विवेदी ने किया। रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, कमलेश मिश्र, विनोद मिश्र ने भगवान की मूर्तियों की पूजा अर्चना की।
विज्ञापन