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जान जोखिम में डालकर डग्गामार वाहनों पर चलने को मजबूर ग्रामीण

Wed, 16 Feb 2022 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Feb 2022 12:03 AM IST
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Villagers forced to walk on staggered vehicles risking their lives
मानिकपुर राजापुर के लिए रोड़वेज बसों की नियमित सेवा न होने से प्राइवेट बस व डग्गामार वाहनों के सह - फोटो : CHITRAKOOT
मानिकपुर/राजापुर (चित्रकूट)। ग्रामीण क्षेत्रों की प्रमुख सड़कों में रोडवेज बसें न चलने से ग्रामीणों को डग्गामार वाहनों में जानजोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है। यह व्यवस्था कई सालों से है। इस बार खासकर राजापुर व मानिकपुर के क्षेत्र में यह समस्या चुनावी मुद्दा भी बन रहा है।
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ज्ञात हो कि लगभग छह साल पहले जिला मुख्यालय से पाठा क्षेत्र के लिए अलग से रोडवेज की दो बसों का संचालन हुआ था पर यह लगभग दो साल से ज्यादा नहीं चल पाईं। जिससे पाठा क्षेत्र के लोग डग्गामार वाहनों में आने जाने को मजबूर हैं।
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मानिकपुर कस्बे के रेलवे स्टेशन पर मुंबई रेल मार्ग है जहां से 78 ट्रेनों का अप व डाउन होता है। जिस कारण गुजरात, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में पर्यटक व स्थानीय मजदूर रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं। पर्यटक व मजदूर यहां आने पर अरने गंतव्य को जाने के लिए बसों की तलाश करते रहते है।
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वैसे सुबह दो रोडवेज बसें मिलती हैं। इसके बाद बसें नहीं मिलती है। जिस कारण डग्गामार वाहनों से यात्रा करनी पड़ती है। यही हाल छीबो रोड़, जिला मुख्यालय से बड़ी मडैयन रोड का है। इन सड़कों से सैकड़ों गांव लगे हुए है। बसों के अभाव में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उधर, समाजसेवी सुभाष अग्रवाल ने बताया कि राजापुर में पहले विभिन्न डिपों की बसें रात में ठहराव के बाद कानपुर फतेहपुर व लखनऊ के लिए प्रतिदिन चलती थी। यहां पर रोडवेज बस स्टैंड भी बना था। बस स्टैंड के बंद होते ही बसें भी बंद हो गईं।
रोडवेज बसों के संचालन की मांग
राजापुर। गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर में भी रोडवेज बसें न चलने से प्राइवेट बसों व डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। पर्यटक स्थल होने की वजह से यहां पर तीर्थयात्री भी आते हैं। जिला मुख्यालय से राजापुर 35 किमी है। जिसमें आवागमन के नाम पर मात्र एक रोडवेज बस फतेहपुर के लिए गुजरती है। इसके अलावा फिर लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। राजापुर से प्रयागराज, कौशांबी व फतेहपुर आदि का मुख्य मार्ग भी जुड़ा है। जिसको लेकर स्थानीय निवासी रोडवेज बसों के संचालन के लिए कई साल से मांग कर रहे हैं।

वाहन के लिए करना पड़ता घंटों इंतजार
मानिकपुर के समाज सेवी मुन्ना लाल गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में की प्रमुख मार्गों पर रोडवेज बसें न चलने से ग्रामीण कई साल से जूझ रहे है। जिसमें परिवार की महिलाएं व बच्चे भी डग्गामार वाहनों का इंतजार करने के लिए सड़क किनारे बैठे रहते है। कभी-कभी तो हालत यह हो जाती है कि वाहन न मिलने सड़कों में इंतजार करना पड़ता है।
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