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11 माह के अंदर दो बाघ की मौत
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फोटो नंबर- 9 व 10- मारकुंडी के पास कररिया जंगल में मृत पड़ा बाघ
- फोटो : CHITRAKUTT
मानिकपुर (चित्रकूट)। जिले की सीमा से सटे मझगवां रेंज के अमिरती बीट मे 11 माह के अंदर दो बाघों की असमय मौत हो गई। एक की मौत करंट से हुई थी, जबकि दूसरे की आपसी भिड़ंत से हुई है।
12 मई 2019 मे अमिरती बीट के दुधमनिया हार मे शिकारियों ने करंट लगाकर बाघ का शिकार किया था। एक साल के अंदर एक ही जंगल मे दो बाघों की मौत होने से वन विभाग मे हड़कंप है। मझगवां रेंज के कररिया बीट के अमहा नाला जंगल के कक्ष क्त्रस्मांक 830 में तकरीबन तीन साल के नर बाघ की आपसी भिड़ंत में मौत हो गई।
अंदेशा है कि आपसी भिड़ंत में दूसरा बाघ भी घायल हुआ होगा। घायल बाघ की तलाश यूपी और एमपी का वन विभाग का अमला तलाश कर रहा है। मौके पर पहुंचे वन मंडल अधिकारी राजीव मिश्रा ने बताया कि इस बीट में दोनों ओर से घनघोर जंगल है। इस जंगल में बाघों का अक्सर मूवमेंट रहता है। यूपी एमपी क्षेत्र के तराई जंगल में मौजूदा समय में तकरीबन दर्जन भर बाघ विचरण कर रहे हैं।
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इसमें तीन से चार नर बाघ हैं। बाघों का स्वभाव है कि वयस्क होते ही बाघ अपना अलग रहवास बनाने के लिए निकल पड़ते हैं। बाघों की बढ़ती संख्या और दर्जन भर बाघों के लिए तराई जंगल पर्याप्त नहीं है। एक वयस्क नर बाघ के लिए 30 से 40 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल चाहिए। जहां बाघ अपने प्राकृतिक गंध से एरिया तय करते हैं।
घटनास्थल के पास ही अंतिम संस्कार
मानिकपुर। कररिया बीट के अमहा नाले के पास जहां संघर्ष हुआ है, वहीं बाघ का अंतिम संस्कार किया गया है। इस दौरान विभाग के उच्चाधिकारी वन्यजीव विशेषज्ञ राजेश तोमर, व्हाइट टाइगर सफारी के डायरेक्टर संजय राय , डीएफओ राजीव मिश्र एसडीओ जीआर सिंह एवं दीपक राज प्रजापति मझगवां रेंजर मौजूद रहे। अभी तक यह माना जा रहा है कि यह घटना तीन दिन पहले की हो सकती है।
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12 मई 2019 मे अमिरती बीट के दुधमनिया हार मे शिकारियों ने करंट लगाकर बाघ का शिकार किया था। एक साल के अंदर एक ही जंगल मे दो बाघों की मौत होने से वन विभाग मे हड़कंप है। मझगवां रेंज के कररिया बीट के अमहा नाला जंगल के कक्ष क्त्रस्मांक 830 में तकरीबन तीन साल के नर बाघ की आपसी भिड़ंत में मौत हो गई।
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अंदेशा है कि आपसी भिड़ंत में दूसरा बाघ भी घायल हुआ होगा। घायल बाघ की तलाश यूपी और एमपी का वन विभाग का अमला तलाश कर रहा है। मौके पर पहुंचे वन मंडल अधिकारी राजीव मिश्रा ने बताया कि इस बीट में दोनों ओर से घनघोर जंगल है। इस जंगल में बाघों का अक्सर मूवमेंट रहता है। यूपी एमपी क्षेत्र के तराई जंगल में मौजूदा समय में तकरीबन दर्जन भर बाघ विचरण कर रहे हैं।
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इसमें तीन से चार नर बाघ हैं। बाघों का स्वभाव है कि वयस्क होते ही बाघ अपना अलग रहवास बनाने के लिए निकल पड़ते हैं। बाघों की बढ़ती संख्या और दर्जन भर बाघों के लिए तराई जंगल पर्याप्त नहीं है। एक वयस्क नर बाघ के लिए 30 से 40 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल चाहिए। जहां बाघ अपने प्राकृतिक गंध से एरिया तय करते हैं।
घटनास्थल के पास ही अंतिम संस्कार
मानिकपुर। कररिया बीट के अमहा नाले के पास जहां संघर्ष हुआ है, वहीं बाघ का अंतिम संस्कार किया गया है। इस दौरान विभाग के उच्चाधिकारी वन्यजीव विशेषज्ञ राजेश तोमर, व्हाइट टाइगर सफारी के डायरेक्टर संजय राय , डीएफओ राजीव मिश्र एसडीओ जीआर सिंह एवं दीपक राज प्रजापति मझगवां रेंजर मौजूद रहे। अभी तक यह माना जा रहा है कि यह घटना तीन दिन पहले की हो सकती है।