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Chitrakoot News: जांच की आंच से बचने के लिए ज्वाइन नहीं कर रहे दो कर्मचारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। कोषागार घोटाले से विभागीय कर्मचारी सहमे हैं। जांच के डर से यहां पर कोई कर्मचारी आना नहीं चाह रहा है। हर कोई यहां आने से बचने की फिराक में है। शायद यही वजह है कि निदेशालय स्तर से यहां संबद्ध दो कर्मचारियों ने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है। जबकि आदेश को एक पखवाड़े से ज्यादा समय बीत चुका है।
खास बात तो यह है कि विभाग में एक ताे पहले से ही कर्मचारियों का टोटा था, दूसरे अब घोटाले की जांच से उन पर काम का बोझ भी बढ़ गया। कोषागार में 43.13 के हुए घोटाले में सहायक कोषाधिकारी विकास सिंह सचान व लेखाकार अशोक कुमार वर्मा के जेल जा चुके हैं। जबकि एक कर्मचारी संदीप श्रीवास्तव की जांच के दौरान मौत हो चुकी है। घोटाले के बाद जांच का दौर जारी है। जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए पेंशनरों की भीड़ उमड़ रही है। इससे मुश्किल हो रहा है।
विभाग में घोटाले के चलते कर्मचारी भी सहमे नजर आ रहे हैं। विभाग में कर्मचारियों के संकट को देख निदेशालय ने कोषागार में दो कर्मचारी संबद्ध किए थे, इनमें एक बांदा तो दूसरा कानपुर नगर से कर्मचारी शामिल थे। आदेश के जरिए दोनों को नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के आदेश दिए थे।
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लेकिन एक पखवारे का समय बीतने पर भी कर्मचारियों ने अपनी आमद नहीं कराई है। नवंबर माह में जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए बड़ी संख्या में पेंशनर भी पहुंच रहे हैं।
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चित्रकूट। कोषागार घोटाले से विभागीय कर्मचारी सहमे हैं। जांच के डर से यहां पर कोई कर्मचारी आना नहीं चाह रहा है। हर कोई यहां आने से बचने की फिराक में है। शायद यही वजह है कि निदेशालय स्तर से यहां संबद्ध दो कर्मचारियों ने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है। जबकि आदेश को एक पखवाड़े से ज्यादा समय बीत चुका है।
खास बात तो यह है कि विभाग में एक ताे पहले से ही कर्मचारियों का टोटा था, दूसरे अब घोटाले की जांच से उन पर काम का बोझ भी बढ़ गया। कोषागार में 43.13 के हुए घोटाले में सहायक कोषाधिकारी विकास सिंह सचान व लेखाकार अशोक कुमार वर्मा के जेल जा चुके हैं। जबकि एक कर्मचारी संदीप श्रीवास्तव की जांच के दौरान मौत हो चुकी है। घोटाले के बाद जांच का दौर जारी है। जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए पेंशनरों की भीड़ उमड़ रही है। इससे मुश्किल हो रहा है।
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विभाग में घोटाले के चलते कर्मचारी भी सहमे नजर आ रहे हैं। विभाग में कर्मचारियों के संकट को देख निदेशालय ने कोषागार में दो कर्मचारी संबद्ध किए थे, इनमें एक बांदा तो दूसरा कानपुर नगर से कर्मचारी शामिल थे। आदेश के जरिए दोनों को नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के आदेश दिए थे।
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लेकिन एक पखवारे का समय बीतने पर भी कर्मचारियों ने अपनी आमद नहीं कराई है। नवंबर माह में जीवित प्रमाण पत्र देने के लिए बड़ी संख्या में पेंशनर भी पहुंच रहे हैं।