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Chitrakoot News: बिना फेरे वरमाला डाल दो भाइयों ने दिन में रचाया ब्याह
Thu, 27 Nov 2025 11:06 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 27 Nov 2025 11:06 PM IST
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28 सीकेटीपी-12- परिचय- अर्जक पद्धित से की गई शादी में मेहमानों को दी गई संविधान की पुस्तक। संव
चित्रकूट। धर्मनगरी में दो शिक्षित युवाओं की शादी अनोखी रही। शादी में न तो न बैंडबाजा न हाईफाई सजावट। बस साधारण तरीके से दिन में चार घंटे में दो दिन में दो भाइयों ने अपनी अपनी पत्नियों को वर माला डालकर जीवन साथी चुन लिया। इसमें मंत्र पढ़कर फेरे कराने व कन्यादान कराने वाले पुरोहित भी नहीं थे। मेहमानों को संविधान की पुस्तक भेंट की गई। परिजनों ने बुजुर्गों की तस्वीरें दुल्हा दुल्हन को भेंट की।
शहर के कलक्ट्रेट मार्ग निवासी अधिवक्ता प्रखर पटेल व उनके भाई अवर अभियंता शिखर पटेल की शादी परिजनों ने दिन में की। शहर के एमपी जायसवाल के गेस्ट हाउस में प्रखर ने रैपुरा की रचना को और रामवाटिका में शिखर ने पारा बबेरू की सुकांती को वर माला पहनाई। खुद प्रखर व शिखर का कहना है कि बिना किसी मुहूर्त-लगन, बिना तामझाम और बिना किसी परंपरा को निभाने के लिए सिर्फ दो दिलों के संकल्प को आधार बनाकर अपना विवाह रचाया। यह निर्णय केवल एक साधारण कदम नहीं, बल्कि सोच की एक नई दिशा है।
वैज्ञानिक पद्धति से रचाई शादी
अर्जक पद्धति में माना गया है कि ऐसा विवाह जिसमें किसी भी धार्मिक कर्मकांड, मुहूर्त, परम्परा, दहेज या सामाजिक आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह तर्क, समानता, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों पर आधारित विवाह है। इसे वैज्ञानिक पद्धित से विवाह भी कहा जाता है।
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शहर के कलक्ट्रेट मार्ग निवासी अधिवक्ता प्रखर पटेल व उनके भाई अवर अभियंता शिखर पटेल की शादी परिजनों ने दिन में की। शहर के एमपी जायसवाल के गेस्ट हाउस में प्रखर ने रैपुरा की रचना को और रामवाटिका में शिखर ने पारा बबेरू की सुकांती को वर माला पहनाई। खुद प्रखर व शिखर का कहना है कि बिना किसी मुहूर्त-लगन, बिना तामझाम और बिना किसी परंपरा को निभाने के लिए सिर्फ दो दिलों के संकल्प को आधार बनाकर अपना विवाह रचाया। यह निर्णय केवल एक साधारण कदम नहीं, बल्कि सोच की एक नई दिशा है।
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वैज्ञानिक पद्धति से रचाई शादी
अर्जक पद्धति में माना गया है कि ऐसा विवाह जिसमें किसी भी धार्मिक कर्मकांड, मुहूर्त, परम्परा, दहेज या सामाजिक आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह तर्क, समानता, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों पर आधारित विवाह है। इसे वैज्ञानिक पद्धित से विवाह भी कहा जाता है।
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