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फसल बर्बाद होने से अन्नदाता परेशान
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 19 Nov 2015 12:08 AM IST
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राजापुर (चित्रकूट)। दलहन की फसल की बर्बादी से
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किसानों के सामने भीषण संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि पहले
अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से रबी की फसल बर्बाद हुई, अब खरीफ की दलहनी फसल भी
सूखे ने चौपट कर दी।
इनका दर्द है कि मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लहलहाती फसल की जगह सूखे बर्बाद ठूंठों को देख अन्नदाताओं के चेहरों पर भविष्य को लेकर चिंताएं साफ नजर आती हैं।
हरिश्चंद्र पांडे फसल की बर्बादी का जिम्मेदार प्रकृति के साथ-साथ विभागीय लोगों को भी ठहराते हैं। उन्होंने बताया कि पांच बीघे में धान की रोपाई कराई थी।
बारिश न होने और नहर न चलने से पूंजी भी डूब गई। नहर अगर चल जाती तो शायद कुछ फायदा हो जाता। लालमणि शुक्ला ने बताया कि उन्होंने पास दस बीघे जमीन है।
इसमें से आधे में अरहर और आधे में धान, ज्वार, बाजरा बोया था। बारिश न होने से फसल लगभग सूख गई है। अब तो ऐसा लगता है कि लागत भी नहीं निकल पाएगी। वे किस तरह परिवार पालेंगे।
इनका दर्द है कि मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। लहलहाती फसल की जगह सूखे बर्बाद ठूंठों को देख अन्नदाताओं के चेहरों पर भविष्य को लेकर चिंताएं साफ नजर आती हैं।
हरिश्चंद्र पांडे फसल की बर्बादी का जिम्मेदार प्रकृति के साथ-साथ विभागीय लोगों को भी ठहराते हैं। उन्होंने बताया कि पांच बीघे में धान की रोपाई कराई थी।
बारिश न होने और नहर न चलने से पूंजी भी डूब गई। नहर अगर चल जाती तो शायद कुछ फायदा हो जाता। लालमणि शुक्ला ने बताया कि उन्होंने पास दस बीघे जमीन है।
इसमें से आधे में अरहर और आधे में धान, ज्वार, बाजरा बोया था। बारिश न होने से फसल लगभग सूख गई है। अब तो ऐसा लगता है कि लागत भी नहीं निकल पाएगी। वे किस तरह परिवार पालेंगे।