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पांच घंटे तक तीन डॉक्टर और छह स्टाफ से पूछताछ
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फोटो-9- जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत और अन्य मामलों की जांच में पूछताछ करते एडी डा. नरेश तोमर। सं?
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। विधानसभा में विधायक ने पत्र दिया तो आनन फानन अपर निदेशक स्वास्थ्य चित्रकूट जांच के लिए पहुंच गए। जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत और मृत महिला के बेड पर प्रभारी मंत्री द्वारा फल वितरण मामले में पांच घंटे तक पूछताछ चली। इस दौरान तीन डॉक्टर और छह कर्मचारियों से लंबी पूछताछ हुई और उनके बयान दर्ज किए गए। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने कहा कि जल्द ही पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
सोमवार को चित्रकूटधाम मंडल बांदा के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. नरेश सिंह तोमर दोपहर को जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएस डॉ. सुधीर शर्मा के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। इसके बाद कार्यालय जाकर उनसे प्रसूता की मौत और मृत महिला के बेड में प्रभारी मंत्री द्वारा फल वितरण मामले की जांच रिपोर्ट मांगी। सीएमएस कार्यालय में ही तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजेश खरे, डॉ. रफीक अंसारी व डॉ. ऊषा से अलग-अलग बयान लिए। इसके बाद स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय आदि के भी अलग-अलग बयान दर्ज किए गए। देर शाम तक चली पूछताछ व जांच के बाद जब अपर निदेशक स्वास्थ्य बाहर निकले तो कहा कि अभी शासन को रिपोर्ट भेजी जानी है। कुछ जांच व पूछताछ जारी है। उन्होंने माना कि शासन से इन दोनों जांच रिपोर्ट की आख्या मांगी गई है।
सभी डॉक्टरों ने दी सफाई
सूत्रों के अनुसार, तीनों डॉक्टरों ने खुद को निर्दोष और उस घटना को इत्तेफाक बताया है। स्पष्ट किया कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं रही लेकिन घटना के बाद बेवजह उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कुछ ऐसा ही अन्य स्टाफ ने बताया कि उन्होंने समय रहते सारी सूचनाएं डॉक्टर व उच्चाधिकारियों को दी है।
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सोमवार को चित्रकूटधाम मंडल बांदा के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. नरेश सिंह तोमर दोपहर को जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएस डॉ. सुधीर शर्मा के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया। इसके बाद कार्यालय जाकर उनसे प्रसूता की मौत और मृत महिला के बेड में प्रभारी मंत्री द्वारा फल वितरण मामले की जांच रिपोर्ट मांगी। सीएमएस कार्यालय में ही तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजेश खरे, डॉ. रफीक अंसारी व डॉ. ऊषा से अलग-अलग बयान लिए। इसके बाद स्टाफ नर्स व वार्ड ब्वाय आदि के भी अलग-अलग बयान दर्ज किए गए। देर शाम तक चली पूछताछ व जांच के बाद जब अपर निदेशक स्वास्थ्य बाहर निकले तो कहा कि अभी शासन को रिपोर्ट भेजी जानी है। कुछ जांच व पूछताछ जारी है। उन्होंने माना कि शासन से इन दोनों जांच रिपोर्ट की आख्या मांगी गई है।
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सभी डॉक्टरों ने दी सफाई
सूत्रों के अनुसार, तीनों डॉक्टरों ने खुद को निर्दोष और उस घटना को इत्तेफाक बताया है। स्पष्ट किया कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं रही लेकिन घटना के बाद बेवजह उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कुछ ऐसा ही अन्य स्टाफ ने बताया कि उन्होंने समय रहते सारी सूचनाएं डॉक्टर व उच्चाधिकारियों को दी है।
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