{"_id":"6a946e7a90b7afad86075959","slug":"the-mandakini-turned-furious-within-an-hour-shops-closed-and-shopkeepers-fled-chitrakoot-news-c-215-1-ckt1007-135628-2026-08-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chitrakoot News: एक घंटे में रौद्र हुई मंदाकिनी, दुकानें बंद भागे दुकानदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chitrakoot News: एक घंटे में रौद्र हुई मंदाकिनी, दुकानें बंद भागे दुकानदार
Sun, 30 Aug 2026 11:25 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:25 PM IST
विज्ञापन
फोटो 30 सीकेटीपी-01- पानी कम होने के बाद दुकान की सफाई करते दुकानदार। संवाद
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी ने शनिवार को रामघाट में ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
सुबह तक जहां रामघाट पर सामान्य चहल-पहल थी, वहीं महज एक से डेढ़ घंटे में नदी का पानी सड़क तक पहुंच गया। दुकानदारों ने आननफानन दुकानें बंद कीं और सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इसके बाद करीब आधे घंटे में पानी दुकानों के एक खंड के ऊपर तक पहुंच गया। दोपहर तक रामघाट बाढ़ के पानी में डूबा रहा।
मंदाकिनी का जलस्तर कम होने के बाद भी अभी भी खतरे के निशान 126.50 मीटर से ऊपर 127.50 मीटर पर बना हुआ है। रामघाट की 80 से अधिक दुकानें अभी भी पानी में डूबी हुई है। रामघाट के बाहर की दुकानों, मकानों और आश्रमों में भी बाढ़ का पानी भर गया था। पानी उतरने के बाद दुकानदार अपनी दुकानों में बचे सामान को निकालने में जुटे हैं। कई दुकानदारों का तो पूरा सामान ही पानी के तेज बहाव में बह गया।
दुकानदार रामनरेश व सुरेश चंद्र ने बताया कि सुबह तक सब कुछ सामान्य था। अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते पानी सड़क पर आ गया। सामान समेटने का समय नहीं मिला। किसी तरह दुकान बंद कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। दुकानदारों ने बताया कि यदि नदी का पानी धीरे-धीरे बढ़ता तो सामान बचाया जा सकता था लेकिन पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कुछ करने का मौका ही नहीं मिला।
विज्ञापन
उन्होंने ने बताया कि रात में जलस्तर कम हुआ लेकिन अंधेरा होने के कारण दुकानें नहीं खोली जा सकीं। सुबह जब दुकान खोली तो अंदर रखा सामान पानी में बर्बाद हो चुका था। इसी तरह किसी की चाय का ठेला बह गया तो किसी की पूरा गुमटी ही बह गई।
भाई को राखी बांधने गई थीं, लौटी तो भोजनालय गायब
चित्रकूट। रामघाट के रास्ते में सरिता देवी शंकर भोजनालय चलाती हैं। यही भोजनालय उनके परिवार की रोजी-रोटी का सहारा था। 28 अगस्त को वह अपने भाई को राखी बांधने के लिए बढ़ी मऊ गई थीं। 29 अगस्त को मंदाकिनी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रविवार को जब सरिता देवी रामघाट पहुंचीं तो वहां उनका भोजनालय ही गायब था।
बाढ़ का पानी 50 से अधिक कुर्सियां, 10 मेज, सिलिंडर और पूरा टिनशेड तक बहा ले गया। कुछ घंटों में नदी का पानी सिर्फ दुकानें ही नहीं, बल्कि लोगों की सालों की मेहनत और उनकी रोजी-रोटी भी बहा ले गया। सरिता देवी के लिए भोजनालय के साथ परिवार की आय का जरिया भी खत्म हो गया। (संवाद)
विज्ञापन
सुबह तक जहां रामघाट पर सामान्य चहल-पहल थी, वहीं महज एक से डेढ़ घंटे में नदी का पानी सड़क तक पहुंच गया। दुकानदारों ने आननफानन दुकानें बंद कीं और सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। इसके बाद करीब आधे घंटे में पानी दुकानों के एक खंड के ऊपर तक पहुंच गया। दोपहर तक रामघाट बाढ़ के पानी में डूबा रहा।
मंदाकिनी का जलस्तर कम होने के बाद भी अभी भी खतरे के निशान 126.50 मीटर से ऊपर 127.50 मीटर पर बना हुआ है। रामघाट की 80 से अधिक दुकानें अभी भी पानी में डूबी हुई है। रामघाट के बाहर की दुकानों, मकानों और आश्रमों में भी बाढ़ का पानी भर गया था। पानी उतरने के बाद दुकानदार अपनी दुकानों में बचे सामान को निकालने में जुटे हैं। कई दुकानदारों का तो पूरा सामान ही पानी के तेज बहाव में बह गया।
विज्ञापन
दुकानदार रामनरेश व सुरेश चंद्र ने बताया कि सुबह तक सब कुछ सामान्य था। अचानक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते पानी सड़क पर आ गया। सामान समेटने का समय नहीं मिला। किसी तरह दुकान बंद कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। दुकानदारों ने बताया कि यदि नदी का पानी धीरे-धीरे बढ़ता तो सामान बचाया जा सकता था लेकिन पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कुछ करने का मौका ही नहीं मिला।
विज्ञापन
उन्होंने ने बताया कि रात में जलस्तर कम हुआ लेकिन अंधेरा होने के कारण दुकानें नहीं खोली जा सकीं। सुबह जब दुकान खोली तो अंदर रखा सामान पानी में बर्बाद हो चुका था। इसी तरह किसी की चाय का ठेला बह गया तो किसी की पूरा गुमटी ही बह गई।
भाई को राखी बांधने गई थीं, लौटी तो भोजनालय गायब
चित्रकूट। रामघाट के रास्ते में सरिता देवी शंकर भोजनालय चलाती हैं। यही भोजनालय उनके परिवार की रोजी-रोटी का सहारा था। 28 अगस्त को वह अपने भाई को राखी बांधने के लिए बढ़ी मऊ गई थीं। 29 अगस्त को मंदाकिनी का पानी लगातार बढ़ता रहा। रविवार को जब सरिता देवी रामघाट पहुंचीं तो वहां उनका भोजनालय ही गायब था।
बाढ़ का पानी 50 से अधिक कुर्सियां, 10 मेज, सिलिंडर और पूरा टिनशेड तक बहा ले गया। कुछ घंटों में नदी का पानी सिर्फ दुकानें ही नहीं, बल्कि लोगों की सालों की मेहनत और उनकी रोजी-रोटी भी बहा ले गया। सरिता देवी के लिए भोजनालय के साथ परिवार की आय का जरिया भी खत्म हो गया। (संवाद)

फोटो 30 सीकेटीपी-01- पानी कम होने के बाद दुकान की सफाई करते दुकानदार। संवाद

फोटो 30 सीकेटीपी-01- पानी कम होने के बाद दुकान की सफाई करते दुकानदार। संवाद