{"_id":"4a6250312d4c168d3d2269448420db5b","slug":"the-contractor-began-construction-of-the-bridge-known-fault-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठेकेदार ने मानी गलती पुल का निर्माण शुरू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठेकेदार ने मानी गलती पुल का निर्माण शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंदाकिनी घाट का फाटक खोलकर पानी बहाने के खिलाफ साधु संतों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया था। जिससे काम बंद रहा। शनिवार को ठेकेदार ने गलती मानी और दोबारा ऐसा न करने का आश्वासन दिया तब जाकर नया पुल का काम चालू हो सका।
रामघाट स्थित मंदाकिनी का जल स्तर अचानक कम होने से साधु संतों ने नए घाट का निर्माण करा रहे ठेकेदार को बुलाकर जमकर फटकार लगाई। इस दौरान नगर पंचायत के अधिकारी भी मौजूद रहे। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवनदास ने कहा कि वैसे ही कम बारिश से मंदाकिनी में पानी कम है और अब नए घाट के निर्माण पर ठेकेदार ने पानी बहा दिया। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान नाव चालक मइयादीन ने कहा कि मंदाकिनी में पानी नहीं होगा तो नाव वालों की रोजी रोटी बंद हो जाएगी। लगभग एक घंटे तक चली बातचीत के बाद आखिरी में ठेकेदार ओमप्रकाश पांडेय व अन्य लोगों ने भरोसा दिया कि अब फाटक नहीं खोला जाएगा। अगर जरूरत हुई तो पहले से सूचना दी जाएगी। इसके बाद साधु संत शांत हुए और पुल का निर्माण शुरू हो सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामघाट स्थित मंदाकिनी का जल स्तर अचानक कम होने से साधु संतों ने नए घाट का निर्माण करा रहे ठेकेदार को बुलाकर जमकर फटकार लगाई। इस दौरान नगर पंचायत के अधिकारी भी मौजूद रहे। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवनदास ने कहा कि वैसे ही कम बारिश से मंदाकिनी में पानी कम है और अब नए घाट के निर्माण पर ठेकेदार ने पानी बहा दिया। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
इस दौरान नाव चालक मइयादीन ने कहा कि मंदाकिनी में पानी नहीं होगा तो नाव वालों की रोजी रोटी बंद हो जाएगी। लगभग एक घंटे तक चली बातचीत के बाद आखिरी में ठेकेदार ओमप्रकाश पांडेय व अन्य लोगों ने भरोसा दिया कि अब फाटक नहीं खोला जाएगा। अगर जरूरत हुई तो पहले से सूचना दी जाएगी। इसके बाद साधु संत शांत हुए और पुल का निर्माण शुरू हो सका।
विज्ञापन