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एक साथ तीन अर्थियां देख हर आंख हुई नम
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16-- शव आने के बाद हरिशंकर के घर के बाहर लगी भीड़। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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मानिकपुर। पन्ना में हुए हादसे में जान गंवाने वाले दंपती समेत तीन लोगों के शव मंगलवार की दोपहर जैसे ही उनके घर मानिकपुर के आर्यनगर और सुभाषनगर पहुंचे तो कोहराम मच गया। घरवाले दहाड़े मारकर रोने लगे। वहां मौजूद हर शख्स की आंख नम हो गई।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र में मझगवां के पास सोमवार की दोपहर पौने दो बजे कार और बोलेरो की टक्कर हो गई थी। हादसे की शिकार आल्टो कार में मानिकपुर कस्बे के मोहल्ला आर्यनगर निवासी हरिशंकर गुप्ता (52), उनकी पत्नी ममता (42), सुभाष नगर निवासी चालक विनय गुप्ता (27), हरिशंकर के साले चित्रकूट निवासी वीरेंद्र गुप्ता व बांदा निवासी साढ़ू बृजेश छाबड़ा बैठे हुए थे। हादसे में सभी कार सवारों की मौत हो गई। कार हरिशंकर के भाई की थी। बताया जाता है कि बोलेरो चालक एक साइकिल सवार को कुचलते हुए भाग रहा था। तभी उसने चित्रकूट की तरफ आ रही कार में टक्कर मार दी। हरिशंकर, उनकी पत्नी ममता और चालक विनय का शव मंगलवार की दोपहर करीब तीन बजे मानिकपुर पहुंचा तो कोहराम मच गया। हर तरफ चीख पुकार मच गया।
बेटी की सास के देहांत पर गए थे
हरिशंकर ने अपनी बेटी की शादी डेढ़ साल पहले पन्ना जिले में की थी। बेटी की सास की मौत की सूचना पर सभी सोमवार की सुबह पांच बजे कार से निकले थे। लौटते समय पौने दो बजे हादसा हो गया। हादसे के बाद पन्ना पुलिस ने हरिशंकर के भाई मुकेश को कॉल करके हादसे की जानकारी दी थी।
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हरिशंकर के बच्चे हुए बेसहारा
कस्बे में चाट का ठेला लगाने वाले हरिशंकर के तीन बेटे राघव (19), राज (17) और कार्तिक (13) हैं। हरिशंकर और उनकी पत्नी ममता की मौत के बाद तीनों बेटे बेसहारा हो गए हैं। लोगों में इसकी चर्चा रही कि अब इनकी परवरिश कैसे होगी। पढ़ाई का खर्च कौन उठाएगा। हरिशंकर के भाइयों ने पहले से ही अलग-अलग घर बना रखे हैं। राघव पिता के ठेले में थोड़ी मदद कर देता था। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि आगे के क्रियाकर्म किए जा सकें।
एक साथ निकली पति-पत्नी की शव यात्रा
हरिशंकर गुप्ता और उनकी पत्नी बेहद नेकदिल इंसान थे। दंपती की एक साथ शव यात्रा देखकर लोगों से आंसू छलक पड़े। खासकर महिलाओं में इस बात की चर्चा रही कि दोनों ने एक साथ दुनिया को अलविदा कहा। दोनों का अंतिम संस्कार किरहा तालाब के किनारे किया गया। अंतिम यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
मां का दुलारा था विनय
हादसे में जान गंवाने वाला कार चालक सुभाष नगर का विनय मां शांति का दुलारा था। दो भाइयों में छोटे विनय की मां प्राथमिक विद्यालय मानिकपुर में रसोइया है। पिता रंगी लाल का देहांत हो चुका है। बड़े भाई सत्तू का आटो पार्ट्स का काम है। बेटे की मौत पर मां का रो-रोकर बुरा हाल रहा। विनय का अंतिम संस्कार पुराना मानिकपुर के श्मशान घाट पर किया गया।
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मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र में मझगवां के पास सोमवार की दोपहर पौने दो बजे कार और बोलेरो की टक्कर हो गई थी। हादसे की शिकार आल्टो कार में मानिकपुर कस्बे के मोहल्ला आर्यनगर निवासी हरिशंकर गुप्ता (52), उनकी पत्नी ममता (42), सुभाष नगर निवासी चालक विनय गुप्ता (27), हरिशंकर के साले चित्रकूट निवासी वीरेंद्र गुप्ता व बांदा निवासी साढ़ू बृजेश छाबड़ा बैठे हुए थे। हादसे में सभी कार सवारों की मौत हो गई। कार हरिशंकर के भाई की थी। बताया जाता है कि बोलेरो चालक एक साइकिल सवार को कुचलते हुए भाग रहा था। तभी उसने चित्रकूट की तरफ आ रही कार में टक्कर मार दी। हरिशंकर, उनकी पत्नी ममता और चालक विनय का शव मंगलवार की दोपहर करीब तीन बजे मानिकपुर पहुंचा तो कोहराम मच गया। हर तरफ चीख पुकार मच गया।
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बेटी की सास के देहांत पर गए थे
हरिशंकर ने अपनी बेटी की शादी डेढ़ साल पहले पन्ना जिले में की थी। बेटी की सास की मौत की सूचना पर सभी सोमवार की सुबह पांच बजे कार से निकले थे। लौटते समय पौने दो बजे हादसा हो गया। हादसे के बाद पन्ना पुलिस ने हरिशंकर के भाई मुकेश को कॉल करके हादसे की जानकारी दी थी।
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हरिशंकर के बच्चे हुए बेसहारा
कस्बे में चाट का ठेला लगाने वाले हरिशंकर के तीन बेटे राघव (19), राज (17) और कार्तिक (13) हैं। हरिशंकर और उनकी पत्नी ममता की मौत के बाद तीनों बेटे बेसहारा हो गए हैं। लोगों में इसकी चर्चा रही कि अब इनकी परवरिश कैसे होगी। पढ़ाई का खर्च कौन उठाएगा। हरिशंकर के भाइयों ने पहले से ही अलग-अलग घर बना रखे हैं। राघव पिता के ठेले में थोड़ी मदद कर देता था। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि आगे के क्रियाकर्म किए जा सकें।
एक साथ निकली पति-पत्नी की शव यात्रा
हरिशंकर गुप्ता और उनकी पत्नी बेहद नेकदिल इंसान थे। दंपती की एक साथ शव यात्रा देखकर लोगों से आंसू छलक पड़े। खासकर महिलाओं में इस बात की चर्चा रही कि दोनों ने एक साथ दुनिया को अलविदा कहा। दोनों का अंतिम संस्कार किरहा तालाब के किनारे किया गया। अंतिम यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
मां का दुलारा था विनय
हादसे में जान गंवाने वाला कार चालक सुभाष नगर का विनय मां शांति का दुलारा था। दो भाइयों में छोटे विनय की मां प्राथमिक विद्यालय मानिकपुर में रसोइया है। पिता रंगी लाल का देहांत हो चुका है। बड़े भाई सत्तू का आटो पार्ट्स का काम है। बेटे की मौत पर मां का रो-रोकर बुरा हाल रहा। विनय का अंतिम संस्कार पुराना मानिकपुर के श्मशान घाट पर किया गया।