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जगद्गुरु समेत संत महंतों ने जताया शोक
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चित्रकूट/खोही। प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के निधन पर धर्मनगरी चित्रकूट के संत महंत शोकाकुल हो गए हैं। दो माह पूर्व ही वह धर्मनगरी चित्रकूट में दो दिन प्रवास कर जगद्गुरु रामभद्राचार्य से लेकर कई साधुसंतों व आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की थी। सभी ने एक स्वर में कहा कि महंत नरेंद्र गिरी का चित्रकूट से बेहद नजदीकी संबंध रहा। मठ मंदिरों से लेकर संतों के किसी भी मामले में वह खुद चित्रकूट आते थे और निराकरण कराते थे।
सोमवार को जैसे ही यह खबर मिली कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी का निधन हो गया है तो जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि ऐसा हो गया। वह आपस में बेहद प्रेम व श्रद्धा रखते थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बनने के बाद वह धर्मनगरी आकर सभी संतों से मिले थे। उनके स्वभाव में सबके लिए प्रेम भाव ही था। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास ने कहा कि वह सब बेहद अचभिंत हैं कि ऐसा असमय हो गया। उनका स्नेह याद आता है। जानकी महल के महंत सीताशरण दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत शिवरामदास, महंत दीनदयाल दास, अनूप दास खाकी अखाडा, रामजी दास संतोषी अखाडा, सत्यप्रकाश महराज निर्वाणी यज्ञवेदी अखाडा आदित्य नारायण दास महानिर्वाणी अखाड़ा ने भी गहरा शोक जताया है।
जगद्गुरु को मिलेगी संस्कृति साहित्य में फेलोशिप
चित्रकूट। साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सचिव डा. के श्रीनिवासराव ने बताया कि संस्कृति साहित्य में फेलोशिप के लिए जगद्गुरू रामभद्राचार्य को चुना गया है। वे प्रख्यात विद्वान हैं। उनको 22 भाषाओं का ज्ञान है। जिन्होंने 221 पुस्तकों व ग्रंथों के लेखन का कार्य किया है। जिसमें दो ग्रंथों में रामचरित मानस पर हिंदी टीका व ब्रम्हसूत्र भगवत गीता व प्रधान उपनिषद पर संस्कृत भाषा शामिल हैं। इसके अलावा जगद्गुरु ने दिव्यांगों के लिए विश्वविद्यालय खोलने का कार्य किया। जो उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के शचीपुरम गांव के रहने वाले हैं। संवाद
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सोमवार को जैसे ही यह खबर मिली कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी का निधन हो गया है तो जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि ऐसा हो गया। वह आपस में बेहद प्रेम व श्रद्धा रखते थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बनने के बाद वह धर्मनगरी आकर सभी संतों से मिले थे। उनके स्वभाव में सबके लिए प्रेम भाव ही था। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास ने कहा कि वह सब बेहद अचभिंत हैं कि ऐसा असमय हो गया। उनका स्नेह याद आता है। जानकी महल के महंत सीताशरण दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत शिवरामदास, महंत दीनदयाल दास, अनूप दास खाकी अखाडा, रामजी दास संतोषी अखाडा, सत्यप्रकाश महराज निर्वाणी यज्ञवेदी अखाडा आदित्य नारायण दास महानिर्वाणी अखाड़ा ने भी गहरा शोक जताया है।
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जगद्गुरु को मिलेगी संस्कृति साहित्य में फेलोशिप
चित्रकूट। साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सचिव डा. के श्रीनिवासराव ने बताया कि संस्कृति साहित्य में फेलोशिप के लिए जगद्गुरू रामभद्राचार्य को चुना गया है। वे प्रख्यात विद्वान हैं। उनको 22 भाषाओं का ज्ञान है। जिन्होंने 221 पुस्तकों व ग्रंथों के लेखन का कार्य किया है। जिसमें दो ग्रंथों में रामचरित मानस पर हिंदी टीका व ब्रम्हसूत्र भगवत गीता व प्रधान उपनिषद पर संस्कृत भाषा शामिल हैं। इसके अलावा जगद्गुरु ने दिव्यांगों के लिए विश्वविद्यालय खोलने का कार्य किया। जो उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद के शचीपुरम गांव के रहने वाले हैं। संवाद
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