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Chitrakoot News: बाढ़ में डूबे रामघाट के मंदिर, मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर बंद
Mon, 31 Aug 2026 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 31 Aug 2026 12:06 AM IST
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फोटो 30 सीकेटीपी-10-रामघाट में तुलसीदास की क्षतिग्रस्त मूर्ती। संवाद
प्रशांत सैनी
चित्रकूट। मंदाकिनी के रौद्र रूप ने रामघाट के मंदिरों को भी नहीं बख्शा। नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट क्षेत्र के कई मंदिर पानी में डूब गए। रविवार को जलस्तर कम होने के बाद भी मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर की सीढ़ियों तक पानी बना रहा। इससे मंदिर बंद कर दिया गया है। वहीं रामघाट स्थित तुलसी घाट पर प्राचीन तुलसीदास की मूर्ति भी बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई।
रविवार को बाढ़ का पानी कम होने के बाद मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान का मंजर सामने आने लगा है। भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास ने बताया कि बाढ़ के तेज बहाव के कारण मंदिर का दरवाजा टूट गया। इसके साथ ही सत्संग भवन को भी नुकसान पहुंचा है।
श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए एक खंड ऊपर बनाए गए कमरों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से काफी नुकसान हुआ है। जब तक मंदाकिनी शांत नहीं हो जाती हैं, तब तक मंदिर को बंद रखा गया है।
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मंदिरों में पानी भरने से कीचड़ की सफाई का काम चुनौती बना हुआ है। वहीं, मंदाकिनी की बाढ़ ने टाटी घाट से चक्की घाट के बीच साधुओं की कुटियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। तेज बहाव में 10 से अधिक साधुओं की कुटिया बह गईं। उनका जरूरी सामान और मवेशी तक बह गए। साधुओं के पास अब न रहने की जगह बची है और न ही जरूरत का सामान। कई साधु खुले में रहने को मजबूर हैं। (संवाद)
कीचड़ के बीच कामतानाथ के दरबार पहुंचे श्रद्धालु
चित्रकूट। मंदाकिनी की बाढ़ से तबाही के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। कामतानाथ मंदिर पहुंचने वाले मार्ग में एक से डेढ़ फीट तक कीचड़ जमा होने के पर भी श्रद्धालु पहुंचे और दर्शन-पूजन कर मंदाकिनी के प्रलय से राहत की कामना की। इसके बाद कामदगिरि की परिक्रमा लगाई। हालांकि, रास्ते में भारी कीचड़ होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। कई जगह श्रद्धालुओं को कीचड़ में फंसकर और संभलते हुए आगे बढ़ना पड़ा।
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चित्रकूट। मंदाकिनी के रौद्र रूप ने रामघाट के मंदिरों को भी नहीं बख्शा। नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट क्षेत्र के कई मंदिर पानी में डूब गए। रविवार को जलस्तर कम होने के बाद भी मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर की सीढ़ियों तक पानी बना रहा। इससे मंदिर बंद कर दिया गया है। वहीं रामघाट स्थित तुलसी घाट पर प्राचीन तुलसीदास की मूर्ति भी बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई।
रविवार को बाढ़ का पानी कम होने के बाद मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में नुकसान का मंजर सामने आने लगा है। भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवन दास ने बताया कि बाढ़ के तेज बहाव के कारण मंदिर का दरवाजा टूट गया। इसके साथ ही सत्संग भवन को भी नुकसान पहुंचा है।
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श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए एक खंड ऊपर बनाए गए कमरों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से काफी नुकसान हुआ है। जब तक मंदाकिनी शांत नहीं हो जाती हैं, तब तक मंदिर को बंद रखा गया है।
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मंदिरों में पानी भरने से कीचड़ की सफाई का काम चुनौती बना हुआ है। वहीं, मंदाकिनी की बाढ़ ने टाटी घाट से चक्की घाट के बीच साधुओं की कुटियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। तेज बहाव में 10 से अधिक साधुओं की कुटिया बह गईं। उनका जरूरी सामान और मवेशी तक बह गए। साधुओं के पास अब न रहने की जगह बची है और न ही जरूरत का सामान। कई साधु खुले में रहने को मजबूर हैं। (संवाद)
कीचड़ के बीच कामतानाथ के दरबार पहुंचे श्रद्धालु
चित्रकूट। मंदाकिनी की बाढ़ से तबाही के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। कामतानाथ मंदिर पहुंचने वाले मार्ग में एक से डेढ़ फीट तक कीचड़ जमा होने के पर भी श्रद्धालु पहुंचे और दर्शन-पूजन कर मंदाकिनी के प्रलय से राहत की कामना की। इसके बाद कामदगिरि की परिक्रमा लगाई। हालांकि, रास्ते में भारी कीचड़ होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। कई जगह श्रद्धालुओं को कीचड़ में फंसकर और संभलते हुए आगे बढ़ना पड़ा।