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Chitrakoot News: राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊं अंखियों में पानी...
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चित्रकूट। अयोध्या से चित्रकूट आयी 52 वीं श्रीभरत यात्रा का समापन हुआ। परिक्रमा मार्ग पर भरत मिलन की लीला के बाद गुरुवार को श्रीराम के न मानने पर भरत भगवान श्रीराम की खड़ाऊं सिर पर रखकर रवाना हो गए। इस दौरान राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, शीश पर खड़ाऊं अंखियों में पानी...का भजन सुन संत महंत व श्रद्धालु भावुक हो उठे।
अयोध्या से अगहन माह मास की कृष्णा द्वितीया तिथि यानी रविवार को यात्रा माणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास महाराज के नेतृत्व में रवाना होने के बाद मंगलवार की शाम धर्मनगरी चित्रकूट पहुंची थी। जिसमें अयोध्या से आए श्रद्धालुओं व साधू संतों ने तीन दिन धर्मनगरी में पड़ाव डाल कर विभिन्न तीर्थ स्थानों के दर्शन किया। धर्मनगरी के कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के भरत मिलाप मंदिर में श्रीराम की लीला का आयोजन किया गया। श्रीराम को भरत शत्रुघन ने अयोध्या लौटने के लिए मनाया लेकिन श्रीराम ने कहा कि पिता को दिये वचन को वह निभायेंगे। इसके बाद श्रीराम की खड़ाऊं भरत सिर में रखकर अयोध्या के लिए रवाना हो गए। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
महंत कमलदास ने कहा कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। परिवारिक विषमताएं चरम पर हैं। ऐसे में भगवान श्रीराम के चरित्र से सभी को प्रेरणा मिलती है। भगवान श्रीराम से भाई के प्रति भाई का प्रेम, गुरुजनों का आदर व मर्यादा, मानव धर्म की पूर्ण शिक्षा मिलती है। इसी लक्ष्य को लेकर भरत यात्रा 52 साल से निकाली जा रही है। इस मौके पर महंत रामशरणदास उर्फ पगला बाबा, संत मदन गोपालदास, सीताशरण महाराज, दिव्यजीवन दास, गौरव रामायणी, विनोद दास, कौशलेंद्र रघुवंशी, प्रदीप महराज, विराज महाराज, नरसिंह दास, मोहनदास, नंदकिशोर मौजूद रहे।
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अयोध्या से अगहन माह मास की कृष्णा द्वितीया तिथि यानी रविवार को यात्रा माणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास महाराज के नेतृत्व में रवाना होने के बाद मंगलवार की शाम धर्मनगरी चित्रकूट पहुंची थी। जिसमें अयोध्या से आए श्रद्धालुओं व साधू संतों ने तीन दिन धर्मनगरी में पड़ाव डाल कर विभिन्न तीर्थ स्थानों के दर्शन किया। धर्मनगरी के कामदगिरी परिक्रमा मार्ग के भरत मिलाप मंदिर में श्रीराम की लीला का आयोजन किया गया। श्रीराम को भरत शत्रुघन ने अयोध्या लौटने के लिए मनाया लेकिन श्रीराम ने कहा कि पिता को दिये वचन को वह निभायेंगे। इसके बाद श्रीराम की खड़ाऊं भरत सिर में रखकर अयोध्या के लिए रवाना हो गए। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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महंत कमलदास ने कहा कि वर्तमान में भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। परिवारिक विषमताएं चरम पर हैं। ऐसे में भगवान श्रीराम के चरित्र से सभी को प्रेरणा मिलती है। भगवान श्रीराम से भाई के प्रति भाई का प्रेम, गुरुजनों का आदर व मर्यादा, मानव धर्म की पूर्ण शिक्षा मिलती है। इसी लक्ष्य को लेकर भरत यात्रा 52 साल से निकाली जा रही है। इस मौके पर महंत रामशरणदास उर्फ पगला बाबा, संत मदन गोपालदास, सीताशरण महाराज, दिव्यजीवन दास, गौरव रामायणी, विनोद दास, कौशलेंद्र रघुवंशी, प्रदीप महराज, विराज महाराज, नरसिंह दास, मोहनदास, नंदकिशोर मौजूद रहे।
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