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Ra Chitrakoot Dham Teerth Development Council

Sat, 26 Jun 2021 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 11:39 PM IST
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Ra Chitrakoot Dham Teerth Development Council
चित्रकूट। प्रदेश सरकार द्वारा चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद के गठन को मंजूरी मिलने के बाद धर्मनगरी के विकास को पंख लगेंगे। जर्जर हो रही एतिहासिक इमारतों, मंदिरों, रास्तों व नदियों का विकास होगा। इससे पर्यटकों की बढ़ेगी।
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बता दें पिछले कई दशकों से विकास के लिए योजनाओं की घोषणाएं तो हो जाती है। लेकिन बजट के अभाव धर्मनगरी का विकास को गति नहीं मिली। पर्यटकों की संख्या में भी कोई खास इजाफा नहीं हुआ। नजर डाले तो हर साल दीवाली मेले में नगर पालिका परिषद के माध्यम से मंदिरों में सजावट व सफाई आदि कराई जाती है। हर माह की अमावस्या के लिए बजट देने की घोषणा सरकार करती है लेकिन आज की स्थिति यह है कि नगर पालिका के कर्मचारियों को वेतन के लाले पडे़ हैं। धार्मिक नगरी के विकास के लिए फंड मिलना मुश्किल है। रामायण मेले को प्रांतीयकृत रामायण मेला घोषित कर 50 लाख रुपये के फंड देने की घोषणा की थी लेकिन हाल ही में संपन्न रामायण मेला में रकम का 50 फीसदी भी नहीं मिला।
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धार्मिक नगरी का ज्यादा हिस्सा होने पर मप्र की सरकारों ने इस दिशा में कई बार भारी भरकम बजट की घोषणा कर विकास कराने का दावा किया। पूरे परिक्रमा मार्ग पर टीनशेड, मंदिरों के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए क्षेत्र के मेलों को चित्रकूट विकास बोर्ड के तहत संचालित भी किया लेकिन महज एक साल बाद इस योजना का कुछ पता नहीं चला। इस बार के विधान सभा चुनाव में कुछ माह के लिए जब कांग्रेस की सरकार थी तो चित्रकूट मप्र क्षेत्र को स्मार्ट सिटी योजना में शमिल किया गया। इसी आधार पर काम शुरू हुआ लेकिन एक माह बाद ही सरकार बदलकर भाजपा की बन गई तो फिर यह योजना बंद पड़ी है।
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दशकों से उपेक्षित हैं धर्मस्थल
चित्रकूट। जिले में कई ऐसे महत्वपूर्ण उपेक्षित स्थल हैं जिन पर थोड़ा सा ध्यान देकर पर्यटकाें व श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सकता है। मिनी खजुराहो नाम से प्रसिद्ध पेशवाकालीन गणेश बाग है। यहां सिर्फ पुरानी इमारत खड़ी है। कोठी तालाब, सूरजकुंड, धारकुंडी की शाखा कल्याणपुर आश्रम, पंपापुर आश्रम आदि स्थलों का विकास भी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। रसिन में बाणगंगा, कोल्हुआ जंगल मडफा जैसे इलाके हैं। तीन ओर से पहाड़ और बीच में नदी वाले कोल्हुआ को हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है। मानिकपुर-मारकुंडी मार्ग पर शबरी जल प्रपात का विकास तो हुआ पर यहां पर गर्मी में पानी सूख जाने की समस्या है। अगर यहां पर डैम बना दिया जाए तो भीषण गर्मी में लोगों के घूमने का यह बड़ा स्थान बन सकता है। ऋषियन, अमरावती आश्रम, मार्कंडेय आश्रम, लौरी किला, तरौंहा किला, कर्का आश्रम, दशरथ घाट, राघव प्रपात, परानू बाबा, बरहा कोटरा आदि तमाम ऐसे स्थल हैं जो पुरातत्व की दृष्टि से अमूल्य हैं और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण भी हैं।
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