{"_id":"5fdf82f48ebc3e3fc5667755","slug":"pm-does-not-listen-to-farmers-mind-chitrakutt-news-knp601042767","type":"story","status":"publish","title_hn":"चित्रकूट : किसानों के मन की बात नहीं सुनते पीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चित्रकूट : किसानों के मन की बात नहीं सुनते पीएम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्रकूट। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुशल सिंह पटेल के नेतृत्व में कार्यकर्ता जुलूस निकाल सांसद आरके सिंह पटेल के आवास पहुंचे। वहां कांग्रेसियों ने सांसद के प्रतिनिधि शक्ति प्रताप सिंह तोमर को पीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा कि अन्नदाता दिल्ली की सड़कों पर 25 दिन से कृषि कानूनों के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में कानूनों को तुरंत निरस्त किया जाए। रविवार को प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष रंजना पांडेय ने कहा कि किसान कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे अब तक कई किसानों की मृत्यु हो चुकी है। कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान है। कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, तो ऐसी कौन सी मजबूरी है जो सरकार इनकी बात सुनने को तैयार नहीं। प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, लेकिन किसानों की मन की बात नहीं सुनते।
विज्ञापन
सरकार से मांग की कि इस काले कानून को वापस लिया जाए। इस मौके पर अवधेश करवरिया, जितेंद्र प्रसाद सोनकर, विनय कुमार पाल, पंकज मिश्रा, विजयमणि त्रिपाठी, राकेश वर्मा, अफसार वारसी, पवन सिंह विद्यार्थी, शानू खान, भैयालाल, नर्वेश सचान, चुनबाद प्रजापति, शिव गुलाम वर्मा, राजू श्रीवास व राज नारायण यादव मौजूद रहे।
विज्ञापन
ज्ञापन में कहा कि अन्नदाता दिल्ली की सड़कों पर 25 दिन से कृषि कानूनों के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में कानूनों को तुरंत निरस्त किया जाए। रविवार को प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष रंजना पांडेय ने कहा कि किसान कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे प्रदर्शन कर रहे हैं।
विज्ञापन
इससे अब तक कई किसानों की मृत्यु हो चुकी है। कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान है। कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसान नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, तो ऐसी कौन सी मजबूरी है जो सरकार इनकी बात सुनने को तैयार नहीं। प्रधानमंत्री मन की बात करते हैं, लेकिन किसानों की मन की बात नहीं सुनते।
विज्ञापन
सरकार से मांग की कि इस काले कानून को वापस लिया जाए। इस मौके पर अवधेश करवरिया, जितेंद्र प्रसाद सोनकर, विनय कुमार पाल, पंकज मिश्रा, विजयमणि त्रिपाठी, राकेश वर्मा, अफसार वारसी, पवन सिंह विद्यार्थी, शानू खान, भैयालाल, नर्वेश सचान, चुनबाद प्रजापति, शिव गुलाम वर्मा, राजू श्रीवास व राज नारायण यादव मौजूद रहे।