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चित्रकूट : ब्रेकर पर ऑक्सीजन नली निकली, नवजात की मौत
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चित्रकूट। एंबुलेंस पर बांदा से प्रयागराज ले जा रहे नवजात की स्पीड ब्रेकर पर ऑक्सीजन नली निकलने से मौत हो गई। परिजनों ने एंबुलेंस स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया वहीं एंबुलेंस स्टाफ ने इसे गलत बताया।
बांदा के बबेरू निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि छोटे भाई राजबहादुर की पत्नी कोमल को शुक्रवार की सुबह प्रसव दर्द होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात की हालत गंभीर देख डाक्टरों ने उसे बांदा अस्पताल रेफर कर दिया।
दोपहर को फिर डाक्टरों ने जच्चा-बच्चा को प्रयागराज रेफर कर दिया। बच्चे को ऑक्सीजन नली लगी थी। रास्ते में स्पीड ब्रेकर पड़ने पर गाड़ी उछली तो वह निकल गई। परिजनों ने कई बार एंबुलेंस स्टाफ से ऑक्सीजन नली लगाने को कहा लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।
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उन्होंने बच्चे को चित्रकूट जिला अस्पताल में डाक्टर को दिखाने को कहा। यहां पर बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने बांदा मेें इसकी शिकायत करने की बात कही। बाद में बच्चे का शव लेकर परिजन उसी एंबुलेंस से बांदा लौट गए।
उधर, एंबुलेंस के ईएमटी प्रेमप्रकाश ने बताया कि नवजात को एंबुबैग लगा था। रास्ते में वह निकल गया था। इसे बिना किसी डाक्टर के सही तरीके से लगाना संभव नहीं होता खासकर नवजात के साथ।
ऐसे में एंबुलेंस जल्दी से जिला अस्पताल चित्रकूट लाए थे ताकि इसे सही करा सके। वाहन में पर्याप्त आक्सीजन थी। बांदा में एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर उमेश द्विवेदी ने बताया कि हर वाहन में पर्याप्त आक्सीजन रहती है।
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बांदा के बबेरू निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि छोटे भाई राजबहादुर की पत्नी कोमल को शुक्रवार की सुबह प्रसव दर्द होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात की हालत गंभीर देख डाक्टरों ने उसे बांदा अस्पताल रेफर कर दिया।
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दोपहर को फिर डाक्टरों ने जच्चा-बच्चा को प्रयागराज रेफर कर दिया। बच्चे को ऑक्सीजन नली लगी थी। रास्ते में स्पीड ब्रेकर पड़ने पर गाड़ी उछली तो वह निकल गई। परिजनों ने कई बार एंबुलेंस स्टाफ से ऑक्सीजन नली लगाने को कहा लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।
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उन्होंने बच्चे को चित्रकूट जिला अस्पताल में डाक्टर को दिखाने को कहा। यहां पर बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने बांदा मेें इसकी शिकायत करने की बात कही। बाद में बच्चे का शव लेकर परिजन उसी एंबुलेंस से बांदा लौट गए।
उधर, एंबुलेंस के ईएमटी प्रेमप्रकाश ने बताया कि नवजात को एंबुबैग लगा था। रास्ते में वह निकल गया था। इसे बिना किसी डाक्टर के सही तरीके से लगाना संभव नहीं होता खासकर नवजात के साथ।
ऐसे में एंबुलेंस जल्दी से जिला अस्पताल चित्रकूट लाए थे ताकि इसे सही करा सके। वाहन में पर्याप्त आक्सीजन थी। बांदा में एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर उमेश द्विवेदी ने बताया कि हर वाहन में पर्याप्त आक्सीजन रहती है।