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रास्ते में प्रसव और नवजात की मौत का मामला: नेटवर्क की समस्या से नहीं लगी थी कॉल
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भौंरी(चित्रकूट)। भौंरी गांव की गर्भवती को समय से एंबुलेंस न मिलने से रास्ते में प्रसव और नवजात की मौत मामले की जांच शुरू हो गई है। महिला के परिजनों ने 102 और 108 पर कॉल के बाद भी एंबुलेंस न मिलने से प्रसव और नवजात की मौत होने का आरोप लगाया था। इस मामले में लखनऊ एंबुलेंस सेवा की टीम जांच करने प्रसूता के घर पहुंची। फोन की काल डिटेल मिलाई गई। परिवार के सदस्यों से पूछताछ भी हुई। जिला प्र्रोग्राम मैनेजर के मुताबिक नेेटवर्क की समस्या से कॉल नहीं लगी थी।
भौंरी गांव की सरोज देवी पत्नी चुनकू प्रसाद को 10 अगस्त को प्रसव दर्द होने पर परिजन सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां ताला लगा था। दर्द बढ़ने पर देवर बुद्धविलास ने कई बार 102 और 108 नंबर पर कॉल की। आरोप है कि कभी घंटी नहीं हुई तो कभी कॉल कट गई। अस्पताल से सड़क तक पैदल जाने के दौरान महिला ने बेटी को जन्म दिया। कुछ देर में बच्ची की मौत हो गई। अमर उजाला ने 11अगस्त के अंक में इस खबर को प्रमुखता से छापा था।
मंगलवार शाम को 102 एंबुलेंस के जिला प्रोग्राम मैनेजर अश्वनी कुमार प्रजापति व जांच टीम के सदस्य प्रसूता के घर पहुंचे। लगभग दो घंटे तक पूछताछ के बाद मुख्यालय लौटे प्रोग्राम मैनेजर ने बताया कि प्रसूता के देवर ने 12 बार 102 व 108 नंबर पर फोन लगाया था। नेटवर्क की समस्या से कॉल नहीं लगी। इससे एंबुलेंस कार्यालय को जानकारी नहीं हो पाई। इसके बाद किसी दूसरे नंबर से आधे घंटे बाद फोन लगाया गया। कुछ देर में एंबुलेंस पहुंच गई। तब तक प्रसूता को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंच चुके थे। इसमें एजेंसी का कोई दोष नहीं है। बताया कि अगर 102 और 108 पर कॉल न लगे तो चित्रकूट जिले के लोग हेल्प डेस्क 9651911921 नंबर पर फोन कर सकते हैं। यहां फोन करने पर भी एंबुलेंस सेवा मिलेगी।
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भौंरी गांव की सरोज देवी पत्नी चुनकू प्रसाद को 10 अगस्त को प्रसव दर्द होने पर परिजन सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां ताला लगा था। दर्द बढ़ने पर देवर बुद्धविलास ने कई बार 102 और 108 नंबर पर कॉल की। आरोप है कि कभी घंटी नहीं हुई तो कभी कॉल कट गई। अस्पताल से सड़क तक पैदल जाने के दौरान महिला ने बेटी को जन्म दिया। कुछ देर में बच्ची की मौत हो गई। अमर उजाला ने 11अगस्त के अंक में इस खबर को प्रमुखता से छापा था।
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मंगलवार शाम को 102 एंबुलेंस के जिला प्रोग्राम मैनेजर अश्वनी कुमार प्रजापति व जांच टीम के सदस्य प्रसूता के घर पहुंचे। लगभग दो घंटे तक पूछताछ के बाद मुख्यालय लौटे प्रोग्राम मैनेजर ने बताया कि प्रसूता के देवर ने 12 बार 102 व 108 नंबर पर फोन लगाया था। नेटवर्क की समस्या से कॉल नहीं लगी। इससे एंबुलेंस कार्यालय को जानकारी नहीं हो पाई। इसके बाद किसी दूसरे नंबर से आधे घंटे बाद फोन लगाया गया। कुछ देर में एंबुलेंस पहुंच गई। तब तक प्रसूता को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंच चुके थे। इसमें एजेंसी का कोई दोष नहीं है। बताया कि अगर 102 और 108 पर कॉल न लगे तो चित्रकूट जिले के लोग हेल्प डेस्क 9651911921 नंबर पर फोन कर सकते हैं। यहां फोन करने पर भी एंबुलेंस सेवा मिलेगी।
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