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राजापुर तहसील में सुविधाएं नदारद

Fri, 30 Jan 2015 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट Updated Fri, 30 Jan 2015 11:01 PM IST
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no convenience in rajapur tehseel

राजापुर को तहसील बने एक साल हो गया लेकिन सुविधाओं का अभी भी इंतजार है। हाल ये है कि यहां न स्टाफ है और कार्यालय के लिए खुद का भवन। ऐेसे में कई समस्याओं के समाधान को लोगों को कर्वी तक की दौड़ लगानी पड़ती है।

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राजापुर तहसील की स्थापना की घोषणा मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने जिला आगमन के दौरान की थी। 25 जनवरी 2014 को तत्कालीन जिलाधिकारी बलकार सिंह ने इसका उद्घाटन किया था।
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राजापुर के तहसील बनने से लगभग दो सौ गांवों-मजरों के बाशिंदों को फायदा होने की उम्मीद थी। इसमें कर्वी और मऊ तहसील के भी कई गांवों को जोड़ा गया। इससे उन लोगों को खुशी हुई जिन्हें मऊ या तीस किमी दूर कर्वी तक दौड़ लगानी पड़ती थी।  लेकिन तहसील बने एक वर्ष गुजरने के बाद भी लोग परेशान हैं।
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 राजापुर तहसील का कामकाज सब्जी मंडी के पास पुराने अस्पताल के भवन में चल रहा है। यहां कर्मचारियों की कमी है।
तहसील के कामकाज में स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति न होना भी बाधा है। वर्तमान में कर्वी के तहसीलदार अशोक कुमार सिंह पर राजापुर की भी जिम्मेदारी है।

वकीलों का कहना है कि ऐसे में वह सप्ताह में एक दिन ही यहां समय दे पाते हैं और कामकाज प्रभावित होता है। अधिवक्ता अनुज शुक्ला ने कहा कि तहसील बनने का कोई फायदा वादकारियों और अधिवक्ताओं को नहीं मिल पा रहा। स्टाफ की कमी से काफी दिक्कत हो रही है। वहीं अधिवक्ता और जिला पंचायत सदस्य शिवशंकर सिंह ने कहा कि समस्याओं के चलते प्रदेश सरकार की जनहित की मंशा पूरी नहीं हो पा रही।

स्टाफ की कमी
तहसील में 16 की जगह तीन कर्मचारी ही कार्यरत हैं। पेशकार अरुण कुमार शुक्ला, नायब नाजिर शिवसलोने तिवारी और रजिस्ट्रार कानूनगो राजेंद्र प्रसाद के जिम्मे पूरा काम है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में आठ के स्थान पर दो कर्मचारी हैं। कर्मचारी न होने से सरकारी सूचनाएं और समन आदि समय से नहीं हो पाते।

जमीन देखी जा रही
इस संबंध में एसडीएम अभयराज ने बताया कि पद स्वीकृत किए जा चुके हैं। जैसे ही नियुक्तियां होंगी, परेशानी दूर हो जाएगी। कहा कि कई जगहों पर तहसील भवन के लिए जमीन देखी गई है। भूस्वामियों से बात चल रही है। तहसीलदार की स्थायी नियुक्ति न होने से कर्वी के तहसीलदार कामकाज देख रहे हैं।


ये हैं प्रमुख कमियां
तहसील के पास स्वयं का भवन नहीं, लेखपालों के बैठने को नियमित कक्ष, भूलेख कंप्यूटरीकरण और एकल खिड़की कंप्यूटर कक्ष नहीं, मीटिंग हॉल की कमी, ट्रेजरी चालान की व्यवस्था न होने से लोगों को कर्वी तक की दौड़ लगानी पड़ती।


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