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अस्पताल में लापरवाही, दो प्रसूताओं की मौत
चित्रकूट
Updated Tue, 03 Oct 2017 11:39 PM IST
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सफाईकर्मी को देखते पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट । जननी सुरक्षा योजना में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का फिर नमूना देखने को मिला। अस्पताल में दर्द से कराहती प्रसूताओं को न तो डाक्टर मिले और न स्टाफ, जिससे दो ने अस्पताल परिसर में ही तड़प कर दम तोड़ दिया। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दोनों प्रसूताओें के जने बच्चे सुरक्षित हैं। मामले को संज्ञान लेकर डीएम ने सीएमओ को जांच कराने के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार भरतकूप क्षेत्र के कोल्हुआ निवासी नवल किशोर की पत्नी राजमुनी (26) को मंगलवार की शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर परिजन शिवरामपुर अस्पताल लाए। प्रसूता के पति ने आरोप लगाया कि बार-बार कहने के बावजूद भर्ती करने के लिए न कोई डॉक्टर आया और न ही स्टाफ आया। कुछ देर बाद उसकी पत्नी वहीं गिरकर मर गई। इसकी जानकारी होते ही अस्पताल में मौजूद स्टाफ दौड़कर बाहर आया और अपने बचाव के लिए तत्काल रेफर कागज बनाकर पकड़ा दिया। पीड़ित पति ने यह भी बताया कि पत्नी की बच्चेदानी तक बाहर आ गई थी।
दूसरा मामला मुख्यालय के जिला अस्पताल का है। खोह गांव निवासी अभिलाष ने बताया कि उसकी पत्नी गोमती(21) को मंगलवार की देर शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर वह परिजनों के साथ लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। महिला अस्पताल में कोई डाक्टर मौजूद नहीं था।
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आरोप लगाया कि प्रसूता वार्ड में मौजूद स्टाफ ने बिना देखे ही उसे बाहर ले जाने को कहा। बार-बार कहने पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद किसी तरह उसे वार्ड में ले जाया गया जहां प्रसव होते ही उसकी मौत हो गई। दोनों मामले में यह खास बात रही कि प्रसूताओं के जने बच्चे सुरक्षित हैं। इस मामले में सीएमओ डॉ.रामजी पांडेय ने बताया कि दोनों अस्पताल से जानकारी मांगी गई है। उधर डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने मामले को संज्ञान लेकर सीएमओ से जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार भरतकूप क्षेत्र के कोल्हुआ निवासी नवल किशोर की पत्नी राजमुनी (26) को मंगलवार की शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर परिजन शिवरामपुर अस्पताल लाए। प्रसूता के पति ने आरोप लगाया कि बार-बार कहने के बावजूद भर्ती करने के लिए न कोई डॉक्टर आया और न ही स्टाफ आया। कुछ देर बाद उसकी पत्नी वहीं गिरकर मर गई। इसकी जानकारी होते ही अस्पताल में मौजूद स्टाफ दौड़कर बाहर आया और अपने बचाव के लिए तत्काल रेफर कागज बनाकर पकड़ा दिया। पीड़ित पति ने यह भी बताया कि पत्नी की बच्चेदानी तक बाहर आ गई थी।
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दूसरा मामला मुख्यालय के जिला अस्पताल का है। खोह गांव निवासी अभिलाष ने बताया कि उसकी पत्नी गोमती(21) को मंगलवार की देर शाम को तेज प्रसव दर्द होने पर वह परिजनों के साथ लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। महिला अस्पताल में कोई डाक्टर मौजूद नहीं था।
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आरोप लगाया कि प्रसूता वार्ड में मौजूद स्टाफ ने बिना देखे ही उसे बाहर ले जाने को कहा। बार-बार कहने पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद किसी तरह उसे वार्ड में ले जाया गया जहां प्रसव होते ही उसकी मौत हो गई। दोनों मामले में यह खास बात रही कि प्रसूताओं के जने बच्चे सुरक्षित हैं। इस मामले में सीएमओ डॉ.रामजी पांडेय ने बताया कि दोनों अस्पताल से जानकारी मांगी गई है। उधर डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने मामले को संज्ञान लेकर सीएमओ से जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।