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सांसद से नोकझोंक में जाया हुआ समय
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट
Updated Thu, 09 Apr 2015 11:03 PM IST
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जिला योजना समिति की बैठक में ज्यादातर समय सपा सरकार के मंत्री शिवपाल सिंह यादव और भाजपा सांसद भैरोंं प्रसाद मिश्र के बीच नोकझोंक में ही बीत गया।
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सांसद भैरोंं प्रसाद मिश्र ने राजापुर की सड़क का मुद्दा उठाया। इस पर बताया गया कि कार्रवाई हो रही है। कुछ और मुद्दों पर सांसद ने जब कार्रवाई न होने या हीलाहवाली की बात कही तो शिवपाल ने कहा कि हावी न होएं। हावी ही होना है तो अफसरों से बात करिए, मुझसे नहीं। आराम से अपनी बात कहें।
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सांसद बोले कि हमारा सौभाग्य है कि आप हमारे मंत्री हैं पर काम भी तो होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद कई मुद्दों पर सांसद ने आक्रामक रवैया दिखाया और अधिकारियों पर काम ठीक से न करने का आरोप लगाया। सांसद बोले कि ब्लाक और जिला पंचायत की मीटिंग समय से नहीं हो रही।
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जिला पंचायत अध्यक्ष शिवशंकर यादव ने इस पर मीटिंग की कार्यवाही का लेखाजोखा प्रस्तुत कर दिया। हालांकि प्रशासन और प्रदेश सरकार की खिंचाई में सांसद अकेले नजर आए। वह पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं से कहते रहे कि तुम भी कुछ बोलो, आप भी कुछ कहो पर अन्य भाजपाई शांत रहे।
सांसद भैरोंं प्रसाद मिश्र ने शासन और प्रशासन के प्रतिनिधियों को याद दिलाने की कोशिश की कि पहले से ही राज्य सरकार के पास इस साल 33 हजार करोड़ रुपये ज्यादा मिले हैं। दो साल पहले का 477 करोड़ रुपये पड़ा है। पांच सौ करोड़ दैवीय आपदा का है। इसे क्यों नहीं ठीक से खर्च किया जाता?
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड पैकेज का साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये कहां गया, इसकी मैं सीबीआई से जांच की मांग कर रहा हूं। सूत्रों के अनुसार, काफी देर तक जब यह चला तो प्रभारी मंत्री खड़े होकर चल दिए। बाद में जिला योजना के प्रस्तावों का आननफानन अनुमोदन कर दिया गया।
कुछ जुदा था अंदाज मुस्कुराए भी नहीं
विकास श्रीवास्तव
चित्रकूट। पत्रकारों के जवाबों का मुस्कुराकर जवाब देने वाले शिवपाल सिंह यादव का अंदाज इस बार जुदा दिखा। शायद इसकी वजह मदद और मुआवजे में हो रही राज्य सरकार की किरकिरी थी।
विमान से उतरते ही पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछने की कोशिश की तो अधिकारियों और मंत्री के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें ‘अभी नहीं, अभी नहीं’ कहकर दूर कर दिया। बाद में जब उन्होंने हवाई पट्टी में विश्रामकक्ष की ओर रुख किया तो मीडियाकर्मी फिर पीछे दौड़े लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके बाद वह जिला योजना समिति की बैठक में चले गए।
लगभग दो घंटे बाद निकले तो पत्रकारों ने घेर लिया। एक पत्रकार ने उनसे मुआवजे के बारे में पूछा तो लगभग तीन मिनट उसी को लेक्चर पिलाया...! ‘आपको कुछ मालूम भी है, पढ़कर आया करिए। पत्रकार की भी कोई जिम्मेदारी होती है...।’ इसके बाद सवालों के जवाब घुमाकर देते रहे और केंद्र सरकार की बुराई, अपनी बड़ाई करते रहे।
लगभग पांच मिनट खड़े-खड़े अपनी बात कही। पत्रकार और कुछ सवाल करते, उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें घेरा, मीडियाकर्मियों को हटाया गया और कार से मंत्रीजी फुर्र... हो गए।