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चित्रकूट: शुरुआत से ही विवादों में रही मऊ-बरगढ़ पेयजल योजना

Thu, 24 Dec 2020 06:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 06:38 PM IST
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Mau-Bargarh drinking water scheme has been in disputes since the beginning
चित्रकूट। जलनिगम के अधिकारियों समेत 22 लोगों के खिलाफ लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बरगढ़-मऊ पेयजल योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई। 2010-2011 में शुरू हुई यह योजना काफी मशक्कत के बाद इस साल संचालित तो हो गई, लेकिन इसमें करीब बीस करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
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लखनऊ में नामजद किए गए अफसरों में छह यहां भी तैनात रहे थे। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बुधवार को जलनिगम की दोनों शाखाओं में सन्नाटा पसरा रहा। कई इंजीनियर तो कार्यालय ही नहीं आए। जो आए भी वे इस मुद्दे पर बात करने से कतराते रहे।
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बसपा शासनकाल में सन 2010-11 में बनी यह योजना शुरुआत से ही विवादों में रही। पहले पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने यमुना नदी से पानी लिफ्ट कराने वाली योजना को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। अब योजना के पूरी तरह संचालित होने के दौरान इसमें कई बार बड़ा घोटाला होने की शिकायतें हुई।
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सितंबर 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्रकूट आगमन के दौरान भी यह मामला जोरशोर से उठा था। तब इस मामले में मुख्यमंत्री ने पूरी रिपोर्ट मंगाकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। इस पर 17 सितंबर 2019 को लखनऊ से दो एक्सईएन और एक एई को निलंबित किया गया था।
18 सितंबर को ‘अमर उजाला’ में यह खबर छपी थी। इसके बाद मामले की जांच और तेज हुई। 3 अक्टूबर 2019 को लखनऊ की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) के अधिकारी सुजीत कुमार व दो अन्य अफसरों ने चित्रकूट के बरगढ़ व मऊ क्षेत्र में जाकर पूरी जांच पड़ताल की थी।
बिना किसी ठोस कारण के योजना को लंबित रखने के चलते बजट बढ़ाने की रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें जलनिगम यांत्रिक व जल निगम यूनीसेफ के दोनों एक्सईएन समेत में. जिंदल वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड दिल्ली, ठेकेदार नरेंद्र कुमार की लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया था।
इसी रिपोर्ट के आधार पर करोड़ों रुपये की इस योजना की आगे भी जांच हुई। इस मामले में चित्रकूट से लेकर झांसी और लखनऊ जलनिगम के बडे़ अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई। लगभग सवा साल के बाद जांच पूरी होने पर लखनऊ में 22 लोगों के खिलाफ 20.43 करोड़ रुपये के घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
आरोपियों में चित्रकूट के छह अधिकारी और नगरपालिका अध्यक्ष भी
लखनऊ में जिन 22 लोगों के खिलाफ घोटाले की रिपोर्ट दर्ज हुई है, उसमें छह अधिकारी ऐसे हैं जो इस योजना के दौरान चित्रकूट में तैनात रहे। इनमें एक्सईएन जेपी सिंह, रामबिहारी, यशवीर सिंह समेत एई एके अवस्थी, एके भारती व अंकुर यादव हैं।

बरगढ़ पेयजल योजना घोटाला में फंसे पूर्व ठेकेदार नरेंद्र कुमार गुप्ता मौजूदा में कर्वी (चित्रकूट) नगर पालिका अध्यक्ष हैं। वह पूर्व में सपा में थे। चर्चा है कि पेयजल योजना में जांच के दायरे में आने के बाद दो वर्ष पूर्व पाला बदलकर भाजपा के परचम तले आ गए। रामनगर ब्लाक के देउधा गांव के एक कालेज में आयोजित समारोह में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में नरेंद्र गुप्ता सपाई से भाजपाई हो गए।
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