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भाभी संग फांसी लगाई

Sat, 31 Jan 2015 11:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट Updated Sat, 31 Jan 2015 11:17 PM IST
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man commited suicide with brothers wife

 राजापुर थाना क्षेत्र के खोंपा गांव में शुक्रवार रात एक युवक ने भाभी के साथ कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। शनिवार सुबह घरवालों ने दोनों के शव देखे तो हड़कंप मच गया। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रथमदृष्टया जांच में पुलिस घटना के पीछे प्रेम प्रसंग को वजह बता रही है। जबकि परिजन इससे इंकार कर रहे हैं।

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खोंपा गांव में मोतीलाल निषाद परिवार के साथ रहता है। शुक्रवार रात वह, पत्नी झलरी, मंझला पुत्र गजराज और छोटा पुत्र हंसराज (19) सो रहे थे। जबकि बड़ा पुत्र सुखराज बहन रामरती के यहां महेवाघाट (कौशांबी) गया था। सुखराज की पत्नी सुमन देवी (21) भी अपने कमरे में सोने चली गई। मोतीलाल ने बताया कि शनिवार सुबह जब देर तक सुमन नहीं उठी तो उसके कमरे में झांककर देखा।
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कमरे के हालात देखकर उसकी चीख निकल गई। वहां धन्नियों के सहारे हंसराज और उसकी भाभी सुमन के शव लटक रहे थे। मोतीलाल ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। एसडीएम अभयराज, एएसपी आरडी चौरसिया, सीओ राजापुर सत्यवीर सिंह और एसओ राजापुर रमेश चंद्र आदि घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने कमरे में अंदर से लगी कुंडी को तुड़वाकर शवों को उतरवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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 पुलिस प्रथमदृष्टया इसे अवैध संबंध का मामला मानकर चल रही है। एसओ ने बताया कि शुरुआती जांच में देवर और भाभी के बीच प्रेम प्रसंग का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही ठोस तौर पर कुछ कहा जा सकेगा।

कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे घरवाले
राजापुर थाना क्षेत्र के खोंपा गांव में देवर और भाभी के फांसी लगाने के मामले में परिजनों के अलग-अलग बयान इसका संकेत दे रहे हैं कि वे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस की पूछताछ में मृतक हंसराज के पिता ने बताया कि रात में बहू से पूछने पर उसने हंसराज के घर के बाहर कौड़ा (आग) तापने की बात कही थी। वहीं मां झलरी का कहना था कि उसे तो हंसराज के गेहूं पिसाने और वहीं से महेवाघाट जाने की बात पता थी।

 घरवालों के अनुसार शुक्रवार रात हंसराज की गतिविधियां कुछ अलग नजर आईं। ऐसा लगा कि उसके दिमाग में कुछ चल रहा था। मां झलरी ने बताया कि खाना खाने के बाद लगभग दस बजे रात वह और मंझला पुत्र गजराज एक कमरे में सोने चली गईं और पति मोतीलाल बरामदे में सो गया।

 बहू भी अपने कमरे चली गई। इस बीच हंसराज बाहर खुले में देर तक आग तापता रहा था। इसके बाद कब वह सुमन के कमरे में गया और फिर कब दोनों ने फांसी लगा ली, पता नहीं चला।

लाल जोड़े में थी सुमन
छोटे से कमरे में एक दूसरे से महज कुछ दूरी पर दो धन्नियों में रस्सी के सहारे लटक रहीं देवर भाभी की लाशों को जिसने भी देखा, वह सकते में आ गया। कमरे में एक बिस्तर लगा था और हौदा रखा था। इसी हौदे के सहारे दोनों के फांसी लगाने की आशंका है।

सुमन ने शृंगार कर रखा था और उसने शादी के समय का लाल जोड़ा पहन रखा था। उसके पैरों में महावर भी लगा था। उधर, हंसराज भी पैंट शर्ट पहने था। ये स्थितियां भी कहीं न कहीं दोनों के बीच संबंधों की आशंका प्रबल करती दिख रही हैं।

ऐसा लगता है कि इसके उजागर होने के डर से दोनों ने पहले से ही आत्महत्या करने की योजना बना ली थी। सुमन सातवीं कक्षा तक पढ़ी थी वहीं हंसराज अशिक्षित था।

प्रेम संबंध मानने को तैयार नहीं परिजन
घरवाले सुमन और हंसराज के बीच प्रेम संबंधों की बात से इंकार करते दिखे। सुखराज ने बताया कि उसकी शादी गत वर्ष 17 मई को महेवाघाट निवासी रामप्रसाद की पुत्री सुमन के साथ हुई थी।

शादी के एक माह बाद वह छोटे भाइयों के साथ लुधियाना कमाने चला गया था। नवंबर में वह और दिसंबर में छोटे भाई वहां से लौट आए। जब भी सुमन मायके जाती थी तो वह या हंसराज उसे लेने जाते थे। मकर संक्रांति को भी सुमन मायके गई थी और 29 जनवरी को हंसराज उसे लिवाकर लाया था।

उसने इस बात से इंकार किया कि  देवर और भाभी के बीच किसी तरह के प्रेम संबंध थे। उधर, गांव में दबी जुबान में यह चर्चा होती रही कि देवर-भाभी के बीच कोई अवैध रिश्ता रहा होगा और घरवालों के देख लेने पर दोनों ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।


मायके वालों ने साधी चुप्पी
घटना की सूचना पाकर सुमन देवी के मायके से उसकी मां श्यामकली और भाई मिथलेश आ गए। दोनों मृतका के शव पर बिलखते रहे। वहीं पिता रामप्रसाद कर्वी गया था।

मिथलेश ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहता। पिता वापस आएंगे, वही कुछ कहेंगे। गौरतलब है कि किसान रामप्रसाद के पांच लड़कियां और तीन लड़के हैं। सुमन इसमें तीसरे नंबर की पुत्री थी।

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