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महंत नरेंद्र गिरी के धर्मनगरी के साधू संतों से अच्छे रिश्ते रहे
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Mahant Narendra Giri had good relations with the saints of Dharmanagari.
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के धर्मनगरी के साधू संतों सहित जिले के राजनीतिक दलों के नेताओं सहित व्यापारियों से अच्छे संबंध रहे हैं। कुंभ, माघ मेले से लेक र अन्य अवसरों पर उनका यह प्रेम दिखता था। उन्होंने चित्रकूट प्रवास के दौरान कई बार सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षियों पर भी तीखे हमले किए लेकिन साधु संतों की एकजुटता से कभी समझौता नहीं किया।
कई बार आश्रमों के बीच जमीन संबंधी विवाद को निपटाने का काम भी उन्होंने किया हैै। अंतिम बार जुलाई माह में वह चित्रकूट में आरएसएस के शिविर के दौरान संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत से भी मिले थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का लगाव धर्मनगरी चित्रकूट से अधिक रहा है। वह साधू संतों के होेने वाले धार्मिक कार्यक्रम मेें भाग लेने के लिए आए दिन आते रहे है। जिससे यहां के संतों सेें और जगद्गुरु रामभद्राचार्य से भी लगाव हो गया। जगद्गुरू ने अपने तुलसीपीठ स्थित आश्रम में महंत नरेंद्र गिरि को सम्मानित भी किया। उनके कार्यों की सराहना भी की थी।
चित्रकूट मेें दो आश्रमों के बीच जमीन का विवाद भी चल रहा है। जिसको लेकर संतों की हुई मीटिंग में नरेंद्र गिरी ने कहा कि उनके रहते किसी के साथ अन्याय नहीं होेेगा। कई बार साधुओं के दो गुट बने तो चित्रकूट आकर इसका समाधान कराया था। वही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे है। पूर्व विधायक दिनेश मिश्रा के होटल का शुभारंभ भी उन्होंने किया था। इस दौरान भाजपा सहित सपा, बसपा के नेता भी मौजूद रहे। जानकी महल के महंत सीताशरण दास व भगवताचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया दो माह पूर्व ही उनका सानिध्य मिला था जो भुलाए नहीं भूलता। वह सहृदय व परोपकारी थे। (संवाद)
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मौत की जांच होनी चाहिए
चित्रकूट। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के अंतिम संस्कार में चित्रकूट धर्मनगरी के कई मठ मंदिरों के संत महंत शामिल हुए। बुधवार की शाम को प्रयागराज से लौटे संतों ने बताया कि महंत की मृत्यु बेहद संदिग्ध है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। (संवाद)
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कई बार आश्रमों के बीच जमीन संबंधी विवाद को निपटाने का काम भी उन्होंने किया हैै। अंतिम बार जुलाई माह में वह चित्रकूट में आरएसएस के शिविर के दौरान संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत से भी मिले थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का लगाव धर्मनगरी चित्रकूट से अधिक रहा है। वह साधू संतों के होेने वाले धार्मिक कार्यक्रम मेें भाग लेने के लिए आए दिन आते रहे है। जिससे यहां के संतों सेें और जगद्गुरु रामभद्राचार्य से भी लगाव हो गया। जगद्गुरू ने अपने तुलसीपीठ स्थित आश्रम में महंत नरेंद्र गिरि को सम्मानित भी किया। उनके कार्यों की सराहना भी की थी।
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चित्रकूट मेें दो आश्रमों के बीच जमीन का विवाद भी चल रहा है। जिसको लेकर संतों की हुई मीटिंग में नरेंद्र गिरी ने कहा कि उनके रहते किसी के साथ अन्याय नहीं होेेगा। कई बार साधुओं के दो गुट बने तो चित्रकूट आकर इसका समाधान कराया था। वही राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे है। पूर्व विधायक दिनेश मिश्रा के होटल का शुभारंभ भी उन्होंने किया था। इस दौरान भाजपा सहित सपा, बसपा के नेता भी मौजूद रहे। जानकी महल के महंत सीताशरण दास व भगवताचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया दो माह पूर्व ही उनका सानिध्य मिला था जो भुलाए नहीं भूलता। वह सहृदय व परोपकारी थे। (संवाद)
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मौत की जांच होनी चाहिए
चित्रकूट। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के अंतिम संस्कार में चित्रकूट धर्मनगरी के कई मठ मंदिरों के संत महंत शामिल हुए। बुधवार की शाम को प्रयागराज से लौटे संतों ने बताया कि महंत की मृत्यु बेहद संदिग्ध है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। (संवाद)