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दोहरे हत्याकांड के पांच आरोपियों को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 21 Sep 2016 11:02 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : लोगो
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घटनाक्रम में मृतक के भाई चुन्नी लाल पुत्र द्वारिका निवासी मऊगुरूदरी ने मानिकपुर थाने में 12 अगस्त 2006 को दी तहरीर में बताया कि मानिकपुर कस्बे से उसका भाई मुन्नी लाल व उसका भतीजा भत्तू उर्फ हरिचंद्र 11अगस्त को ट्रैक्टर बनवाकर आ रहा था। जब ऊंचाडीह गांव के गढ़वा घाट के पास रात को टैक्टर पहुंचा तो कुख्यात डाकू ददुआ गैंग के दर्जन भर सदस्यों ने आकर दोनो की हत्या कर दी।
ट्रैक्टर में लदे डीजल दोनों के ऊपर डालकर जिन्दा जला दिया। इस मामले में 12 लोगोे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जिसमें दो लोगों की मृत्यु हो चुकी। पांच को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।
बुधवार को एंटी डकैती कोर्ट के जज पीके श्रीवास्तव ने बचे आरोपियों में फूलचन्द्र पुत्र ज्वाला प्रसाद दुबे निवासी चमरौहा, हीरालाल तिवारी पुत्र राजनारयण पयासी पुरवा, हरीशंकर तिवारी पुत्र सुन्दर लाल निवासी मऊ गरूदरी,सुनील पुत्र मेवालाल द्विवेदी, निवासी चमरौहा थाना मानिकपुर अनिरूद्ध पुत्र माताबदल निवासी गौरिहा थाना रैपुरा को आजीवन कारावास व पांच पांच हजार रूपये अर्थदंडकी सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने पांचों को कस्टडी में लेकर बांदा जेल भेज दिया।
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फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील
चित्रकूट। लगभग दस साल पहले कुख्यात डाकू सरगना ददुआ गैंग द्वारा किए गए इस दर्दनाक कांड क े मुख्य आरोपी सरगना समेत छह की मौत हो चुकी है। गैंग का छोटा सरगना डाकू राधे बांदा जेल में बंद है। इसी कांड में इसी अदालत ने सात मई 2016 को राधे समेत रोहिणी व भास्कर को सजा-ए-मौत और अन्य दो आरोपी मुसिबा और रामसागर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
यह घटना मानिकपुर थाना क्षेत्र में 11 अगस्त को 2006 को हुई थी। जिसमें ददुआ समेत 16 लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। घटना के बाद से अदालती कार्रवाई के दौरान अब तक ददुआ और गोपला समेत छह लोगों की मौत हो चुकी है। अब सभी दस आरोपियों को सजा सुनाई जा चुकी है। फांसी की सजा पाने वाले डाकू राधे समेत तीनों के परिजनों ने अदालत के निर्णय पर हाईकोर्ट में अपील की है। यह जानकारी राधे की पत्नी सत्यवती ने दी है।
पत्रावली का अलग से विचारण
चित्रकूट। एक ही मामले में नामजद आरोपियों के साथ अदालत ने अलग-अलग तारीखों में फैसला सुनाया है। अभियोजन अधिकारी मनमोहन वर्मा ने बताया कि इस कांड के बाद बुधवार को सजा प्राप्त सुनील, अनिरूद्ध समेत पांचों आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जमानत पर बाहर थे। उधर बाकी आरोपी फरार की दशा में पकड़े जाने पर जेल में थे। इसलिए जमानत वाले पांच आरोपियों की पत्रावली का विचारण अलग से किया गया है।
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ट्रैक्टर में लदे डीजल दोनों के ऊपर डालकर जिन्दा जला दिया। इस मामले में 12 लोगोे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जिसमें दो लोगों की मृत्यु हो चुकी। पांच को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।
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बुधवार को एंटी डकैती कोर्ट के जज पीके श्रीवास्तव ने बचे आरोपियों में फूलचन्द्र पुत्र ज्वाला प्रसाद दुबे निवासी चमरौहा, हीरालाल तिवारी पुत्र राजनारयण पयासी पुरवा, हरीशंकर तिवारी पुत्र सुन्दर लाल निवासी मऊ गरूदरी,सुनील पुत्र मेवालाल द्विवेदी, निवासी चमरौहा थाना मानिकपुर अनिरूद्ध पुत्र माताबदल निवासी गौरिहा थाना रैपुरा को आजीवन कारावास व पांच पांच हजार रूपये अर्थदंडकी सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने पांचों को कस्टडी में लेकर बांदा जेल भेज दिया।
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फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील
चित्रकूट। लगभग दस साल पहले कुख्यात डाकू सरगना ददुआ गैंग द्वारा किए गए इस दर्दनाक कांड क े मुख्य आरोपी सरगना समेत छह की मौत हो चुकी है। गैंग का छोटा सरगना डाकू राधे बांदा जेल में बंद है। इसी कांड में इसी अदालत ने सात मई 2016 को राधे समेत रोहिणी व भास्कर को सजा-ए-मौत और अन्य दो आरोपी मुसिबा और रामसागर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
यह घटना मानिकपुर थाना क्षेत्र में 11 अगस्त को 2006 को हुई थी। जिसमें ददुआ समेत 16 लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। घटना के बाद से अदालती कार्रवाई के दौरान अब तक ददुआ और गोपला समेत छह लोगों की मौत हो चुकी है। अब सभी दस आरोपियों को सजा सुनाई जा चुकी है। फांसी की सजा पाने वाले डाकू राधे समेत तीनों के परिजनों ने अदालत के निर्णय पर हाईकोर्ट में अपील की है। यह जानकारी राधे की पत्नी सत्यवती ने दी है।
पत्रावली का अलग से विचारण
चित्रकूट। एक ही मामले में नामजद आरोपियों के साथ अदालत ने अलग-अलग तारीखों में फैसला सुनाया है। अभियोजन अधिकारी मनमोहन वर्मा ने बताया कि इस कांड के बाद बुधवार को सजा प्राप्त सुनील, अनिरूद्ध समेत पांचों आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जमानत पर बाहर थे। उधर बाकी आरोपी फरार की दशा में पकड़े जाने पर जेल में थे। इसलिए जमानत वाले पांच आरोपियों की पत्रावली का विचारण अलग से किया गया है।