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दुकानदार की हत्या में दो दोस्तों को आजीवन कारावास
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चित्रकूट। दुकान बंद कर दिव्यांग भाई के साथ घर रहे दुकानदार पर दो युवकों ने पत्थर से हमला कर दिया था। पत्थरों से कूचकर एक की हत्या कर दी थी। इसी मामले में सोमवार को अपर सत्र न्यायधीश ने दोेनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों को 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी देय होगा। दोनों पहले से ही जेल में बंद हैं।
अभियोजन अधिकारी सनद कुमार मिश्रा ने बताया कि जिला मुख्यालय कर्वी में साइकिल की दुकान संचालन करने वाले मो. खुर्शीद 18 मई 2014 को अपने भाई मो. शकील के साथ दुकान बंद कर साइकिल से लोढ़वारा स्थित आवास में जा रहा था। रास्ते में साइकिल बनकट निवासी धर्मेद्र पटेल से टकरा गई। जिस पर दोनों पक्ष के बीच गालीगलौज हुआ। इसके बाद दोनों भाई शंकर बाजार की एक साइकिल की दुकान में अपनी साइकिल बनवाकर जैसे ही आगे बढ़े तो धर्मेंद्र पटेल और उसके साथ द्वारिकापुरी निवासी भूपेंद्र पटेल उर्फ सज्जन आए और दोनों भाइयों को घेरकर पीटने लगे। पत्थर से मो. शकील के सिर व चेहरे पर कई वारकर भाग गये। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शकील की मौत हो गई। मृतक के भाई ने बताया था कि उसका उटारखाना निवासी कुछ लोगों से विवाद चलता है इसी के तहत उन पर कुछ लोगों से हमला कराया गया है।
दोषियों के बचाव में अधिवक्ता अवधेश विश्वकर्मा और चंद्रशेखर सिंह ने कई गवाहों और अन्य सबूतों को पेश किया लेकिन अपर सत्र न्यायधीश ने दोनों को दोषी करार दिया।
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सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अभियुक्त धर्मेंद्र व भूपेंद्र को उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा करने पर एक एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भोगनी होगी।
इनसेट
मचा था हडकंप, रोता रहा दिव्यांग भाई
चित्रकूट। 18 मई 2014 की इस घटना को याद कर दुकानदार मो. खुर्शीद की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। उसने बताया कि दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली तो ठीक है। उटारखाना वाले उसके विरोधियों पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस दिन की घटना को याद कर बताया कि वह दिव्यंाग है और अपने भाई शकील के साथ साइकिल से घर आ रहा था। रास्ते में विवाद होने पर उसने हाथ जोड़कर दोनों आरोपियों से क्षमा मांगी लेकिन आगे चलकर उस पर हमला कर दिया गया। हमले के बाद वह अपने लहूलुहान भाई को अस्पताल पहुंचाने में वह असमर्थ था वह बार बार मदद की गुहार लगा रहा था लेकिन किसी ने उसके भाई को नहीं उठाया। पुलिस टीम ने आकर एंबुलेंस बुलाई थी जब उसे अस्पताल ले जाया गया था।
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अभियोजन अधिकारी सनद कुमार मिश्रा ने बताया कि जिला मुख्यालय कर्वी में साइकिल की दुकान संचालन करने वाले मो. खुर्शीद 18 मई 2014 को अपने भाई मो. शकील के साथ दुकान बंद कर साइकिल से लोढ़वारा स्थित आवास में जा रहा था। रास्ते में साइकिल बनकट निवासी धर्मेद्र पटेल से टकरा गई। जिस पर दोनों पक्ष के बीच गालीगलौज हुआ। इसके बाद दोनों भाई शंकर बाजार की एक साइकिल की दुकान में अपनी साइकिल बनवाकर जैसे ही आगे बढ़े तो धर्मेंद्र पटेल और उसके साथ द्वारिकापुरी निवासी भूपेंद्र पटेल उर्फ सज्जन आए और दोनों भाइयों को घेरकर पीटने लगे। पत्थर से मो. शकील के सिर व चेहरे पर कई वारकर भाग गये। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शकील की मौत हो गई। मृतक के भाई ने बताया था कि उसका उटारखाना निवासी कुछ लोगों से विवाद चलता है इसी के तहत उन पर कुछ लोगों से हमला कराया गया है।
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दोषियों के बचाव में अधिवक्ता अवधेश विश्वकर्मा और चंद्रशेखर सिंह ने कई गवाहों और अन्य सबूतों को पेश किया लेकिन अपर सत्र न्यायधीश ने दोनों को दोषी करार दिया।
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सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अभियुक्त धर्मेंद्र व भूपेंद्र को उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा करने पर एक एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भोगनी होगी।
इनसेट
मचा था हडकंप, रोता रहा दिव्यांग भाई
चित्रकूट। 18 मई 2014 की इस घटना को याद कर दुकानदार मो. खुर्शीद की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। उसने बताया कि दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली तो ठीक है। उटारखाना वाले उसके विरोधियों पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उस दिन की घटना को याद कर बताया कि वह दिव्यंाग है और अपने भाई शकील के साथ साइकिल से घर आ रहा था। रास्ते में विवाद होने पर उसने हाथ जोड़कर दोनों आरोपियों से क्षमा मांगी लेकिन आगे चलकर उस पर हमला कर दिया गया। हमले के बाद वह अपने लहूलुहान भाई को अस्पताल पहुंचाने में वह असमर्थ था वह बार बार मदद की गुहार लगा रहा था लेकिन किसी ने उसके भाई को नहीं उठाया। पुलिस टीम ने आकर एंबुलेंस बुलाई थी जब उसे अस्पताल ले जाया गया था।