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लेखपालों की मनमर्जी, कौन सुने किसानों की अर्जी
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
Updated Mon, 06 Apr 2015 11:53 PM IST
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मुआवजे के नाम पर किसानों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। लेखपाल द्वारा मनमानी करने से परेशान किसान तहसील और जिला मुख्यालय में गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने लेखपालों पर सुविधा शुल्क मांगने का भी आरोप लगाया है। सोमवार को बरिया मौजा लौरिया-डढिया के किसानों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपना दर्द बयां किया।
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किसानों गनपत प्रसाद, जगरूप पाल, सीताराम, रामगोपाल, ज्ञानचंद्र, अयोध्या प्रसाद, शारदा, राममंगल आदि ने कहा कि अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से उनकी फसलें बर्बाद हो गईं हैं। लेखपाल सुविधा शुल्क लेकर मर्जी से चेक दे रहे हैं। आरोप लगाया कि जो लोग सुविधा शुल्क नहीं दे पा रहे हैं, उनका चेक वापस ले लिया गया है। आकलन में भी अनियमितता बरती गई है। परती जमीन के लिए भी चेक बनाया गया है।
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कहीं दस बीघे में 6750 रुपये और कहीं एक बीघे के लिए 4500 रुपये का चेक दिया गया है। यह शासनादेश का उल्लंघन है। ग्रामीणों ने कहा कि लेखपाल धमकी देते हैं कि जो करना हो कर लो। उन्होंने इस संबंध में एसडीएम को पत्र देकर जांच की मांग की है। साथ ही लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों के साथ पहुंचे अंबेडकर समाज पार्टी के बुधराज कोटार्य, एसएन कुशवाहा, मुन्नालाल आदि ने कहा कि अगर किसानों की समस्याएं न सुनी गईं तो वे लोग किसानों के साथ आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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