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‘चित्रकूट की भूमि अयोध्या से ज्यादा पवित्र’
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट।
Updated Mon, 30 Mar 2015 11:49 PM IST
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श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट जानकीकुंड बड़ी गुफा में श्री रामचरित मानस कथा के समापन दिवस पर कथावाचक रमाबेन हरियानी ने कहा कि जहां-जहां भगवान ने अपने चरण रखें वह भूमि धन्य हो गई। अयोध्या से भी अधिक चित्रकूट की भूमि पवित्र है।
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उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राजकुमार बनकर सभी सुख सुविधाओं के साथ रहते थे लेकिन चित्रकूट में भगवान तपस्वी के रूप में नंगे पैर रहे। यहां के कण-कण को भगवान राम के चरणों का आशीर्वाद प्राप्त है, जहां भगवान ने अपने वनवास काल के लगभग 12 साल बिताए।
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चित्रकूट की धरती धन्य है यहां कि महिमा कोई नहीं जान सकता। चित्रकूट की पावन धरा आत्मीय आनंद का भंडार है। रमाबेन ने बताया कि भगवान की हर लीला संसार के कल्याण के लिए होती है। राक्षसों के विनाश के लिए भगवान ने मनुष्य अवतार लिया।
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14 वर्ष का वनवास भी भगवान की लीलाओं का एक हिस्सा है। मनुष्य अवतार लेकर मानव धर्म की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए अपनी लीलाएं करते रहे। भगवान राम और रावण के युद्ध का वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार से हमेशा विनाश होता है। रावण जैसा विद्वान, वरदानी और धनवान राजा अपने अहंकार और दानव प्रवृत्ति के कारण मारा गया।
चाहे कितना भी धन और विद्या मनुष्य को मिल जाए उसे अहंकार नहीं होना चाहिए। रमाबेन ने बताया कि भगवान किसी का वध नहीं करते बल्कि उनके हाथों जो मारा जाता है उसका उद्धार हो जाता है। बाद में पूर्णाहुति दी गई। पूर्णाहुति के बाद भंडारा किया गया। जिसमें सभी साधू संतों एवं गुरु भाई बहनों ने प्रसाद ग्रहण कर अपने को धन्य किया।