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Chitrakoot News: जिला अस्पताल में हृदय, त्वचा सहित अन्य रोगों के विशेषज्ञों की कमी
Fri, 17 Oct 2025 12:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 17 Oct 2025 12:37 AM IST
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12 सीकेटीपी-9- परिचय-जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ । संवाद
चित्रकूट। जिला अस्पताल में हृदय, त्वचा, रेडियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, फिजीशियन और सर्जरी सहित कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या हैलट अस्पताल जैसे हायर सेंटरों पर भेजा जा रहा है। इससे मरीजों को न केवल अधिक खर्च उठाना पड़ता है बल्कि कई गंभीर मामलों में रास्ते में ही मौत तक हो जाती है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती लंबे समय से नहीं की गई है। इसके अलावा त्वचा रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, फिजीशियन, न्यूरो सर्जन, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद भी रिक्त हैं। सबसे गंभीर समस्या रेडियोलॉजी विभाग में है, जहां पांच की अपेक्षा केवल एक रेडियोलॉजिस्ट कार्यरत हैं। इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अक्सर मरीज अस्पताल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ के अभाव में हायर सेंटर रेफर कर दिए जाते हैं। कई बार तो गंभीर मरीजों को केवल देखकर ही रेफर पर्ची तैयार कर दी जाती है, जिससे रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
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विभाग की ओर से कई बार डॉक्टरों की मांग भेजी गई, लेकिन शासन से अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। जिले में जिला अस्पताल और 200 शैय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल को छोड़कर किसी भी सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जहां हैं भी, वहां केवल एक-एक विशेषज्ञ के भरोसे काम चल रहा है।
सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी और सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सभी विशेषज्ञों की तैनाती के लिए कई बार शासन को पत्र भेजे गए हैं। फिलहाल अस्पताल में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार, अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती लंबे समय से नहीं की गई है। इसके अलावा त्वचा रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, फिजीशियन, न्यूरो सर्जन, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद भी रिक्त हैं। सबसे गंभीर समस्या रेडियोलॉजी विभाग में है, जहां पांच की अपेक्षा केवल एक रेडियोलॉजिस्ट कार्यरत हैं। इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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अक्सर मरीज अस्पताल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ के अभाव में हायर सेंटर रेफर कर दिए जाते हैं। कई बार तो गंभीर मरीजों को केवल देखकर ही रेफर पर्ची तैयार कर दी जाती है, जिससे रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है।
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विभाग की ओर से कई बार डॉक्टरों की मांग भेजी गई, लेकिन शासन से अब तक तैनाती नहीं हो सकी है। जिले में जिला अस्पताल और 200 शैय्या मातृ एवं शिशु अस्पताल को छोड़कर किसी भी सीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। जहां हैं भी, वहां केवल एक-एक विशेषज्ञ के भरोसे काम चल रहा है।
सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी और सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सभी विशेषज्ञों की तैनाती के लिए कई बार शासन को पत्र भेजे गए हैं। फिलहाल अस्पताल में आने वाले मरीजों का प्राथमिक उपचार किया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता दी जा सके।