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मानिकपुर सीएचसी में डॉक्टर, नर्स और स्टाफ का अभाव
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फोटो-8- मानिकपुर अस्पताल में खाली पड़े बेड । संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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मानिकपुर। एक दिन पहले बच्ची स्तुति की मौत के बाद चर्चा में आए सीएचसी मानिकपुर की पड़ताल में चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। डेढ़ लाख की आबादी के बीच इस अस्पताल में साधनों और संसाधनों का जबर्दस्त अभाव है। डॉक्टर, नर्स और स्टाफ की कमी के चलते गंभीर मरीजों को रेफर करके पल्ला झाड़ लिया जाता है।
30 बेड के इस अस्पताल में रोज करीब 300 मरीज आते हैं। बुधवार को आम दिनों की तरह सुबह से मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। डॉ. अजय और डॉ. मनीष मरीजों को देख रहे थे। डॉ. मनीष रुकमाखुर्द गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर हैं, जिन्हें इस समय सीएचसी से अटैच किया गया है। मरीजों में ज्यादातर मौसमी रोगी थे। इनमें से दो डायरिया के मरीजों को भर्ती किया गया। महावीर नगर निवासी मोहम्मद फारुख, मुईन खान, शिवनगर के विष्णु तिवारी, बगदरी के ललित पांडेय, सकरौंहा के शिवम मिश्रा ने बताया कि सीएचसी में कई बार चोट पर भी रेफर कर दिया जाता है। बीमारियों के इस मौसम में तीस बेड के इस अस्पताल में बेड खाली थे।
डॉक्टरों की कमी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि यहां कुल 11 डॉक्टर होने चाहिए। इसके सापेक्ष मात्र चार डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। इनमें से दो बांदा से अटैच हैं। ये तीन दिन बांदा जनपद में ड्यूटी देते हैं। इमरजेंसी में चार डॉक्टर का मानक है। यहां कोई डॉक्टर नहीं है।
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एक भी नर्स नहीं
सीएचसी में ओपीडी में एक भी नर्स की तैनाती नहीं है। वहीं, महिला अस्पताल में 11 के सापेक्ष दो नर्स हैं। सीजेरियन केस के लिए कोई नर्स नहीं है। अस्पताल आशा कार्यकर्ताओं के सहारे है। फार्मासिस्ट पांच की जगह दो अविनाश मिश्रा, मनोज मिश्रा हैं। लैब टेक्नीशियन शिव विजय सिंह हैं। यहां दो होने चाहिए। सीबीसी जांच के लिए रीजेंट केमिकल डेढ़ साल से नहीं मिला। ऐसे में खून की जांच नहीं हो पा रही है।
कोट-
अस्पताल में संसाधनों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों से लगातार मांग की जा रही है। लेकिन अफसर भी स्टाफ की कमी होने का हवाला देते हैं।
- राजेश सिंह, सीएचसी प्रभारी मानिकपुर
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30 बेड के इस अस्पताल में रोज करीब 300 मरीज आते हैं। बुधवार को आम दिनों की तरह सुबह से मरीजों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। डॉ. अजय और डॉ. मनीष मरीजों को देख रहे थे। डॉ. मनीष रुकमाखुर्द गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर हैं, जिन्हें इस समय सीएचसी से अटैच किया गया है। मरीजों में ज्यादातर मौसमी रोगी थे। इनमें से दो डायरिया के मरीजों को भर्ती किया गया। महावीर नगर निवासी मोहम्मद फारुख, मुईन खान, शिवनगर के विष्णु तिवारी, बगदरी के ललित पांडेय, सकरौंहा के शिवम मिश्रा ने बताया कि सीएचसी में कई बार चोट पर भी रेफर कर दिया जाता है। बीमारियों के इस मौसम में तीस बेड के इस अस्पताल में बेड खाली थे।
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डॉक्टरों की कमी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि यहां कुल 11 डॉक्टर होने चाहिए। इसके सापेक्ष मात्र चार डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। इनमें से दो बांदा से अटैच हैं। ये तीन दिन बांदा जनपद में ड्यूटी देते हैं। इमरजेंसी में चार डॉक्टर का मानक है। यहां कोई डॉक्टर नहीं है।
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एक भी नर्स नहीं
सीएचसी में ओपीडी में एक भी नर्स की तैनाती नहीं है। वहीं, महिला अस्पताल में 11 के सापेक्ष दो नर्स हैं। सीजेरियन केस के लिए कोई नर्स नहीं है। अस्पताल आशा कार्यकर्ताओं के सहारे है। फार्मासिस्ट पांच की जगह दो अविनाश मिश्रा, मनोज मिश्रा हैं। लैब टेक्नीशियन शिव विजय सिंह हैं। यहां दो होने चाहिए। सीबीसी जांच के लिए रीजेंट केमिकल डेढ़ साल से नहीं मिला। ऐसे में खून की जांच नहीं हो पा रही है।
कोट-
अस्पताल में संसाधनों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों से लगातार मांग की जा रही है। लेकिन अफसर भी स्टाफ की कमी होने का हवाला देते हैं।
- राजेश सिंह, सीएचसी प्रभारी मानिकपुर