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जिला अस्पताल के बेड होंगे केसरिया
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Tue, 04 Apr 2017 11:37 PM IST
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जिला अस्पताल के आपात कक्ष के गेट पर चस्पा बेड पर चद्दर की जानकारी देती सूची।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इसे प्रदेश में सत्ता बदलने का दौर कहें या फिर सरकारी योजना। अब जिला अस्पताल में मरीजों के बेड में बिछने वाले चद्दर सप्ताह में प्रतिदिन अलग-अलग रंग के होंगे। इसमें दो दिन चादर का रंग केसरिया होगा।
जिस तरह स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के लिए मेन्यू निर्धारित है। उसी तरह अब अस्पतालों के बेडों में बिछने वाले चादरों का दिन के हिसाब से रंग निश्चित किया गया है। सोमवार को सफेद, मंगलवार को केसरिया, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को सफेद, शनिवार को नीला और रविवार को फिर केसरिया रंग का चादर बिछाया जाएगा। इस मामले में सीएमएस डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि यह आदेश पहले ही आ गए थे।
स्कूलों में संचालित वाहनों से आए दिन हो रही घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। सोमवार को टाउन हाल में सभी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक में बीएसए व एआरटीओ ने वाहन संचालन के मानक बताए। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने कहा कि स्कूलों में चलने वाली बसों में सुरक्षा के सभी मानक उपलब्ध होना अनिवार्य है।
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ऐसा न करने वाले वाहनों से संबधित स्कूलोें की मान्यता भी खत्म हो सकती है। वाहनों की गति सीमा 40 किमी प्रति घंटे से अधिक न हो। चालक का लाइसेंस पांच साल पुराना होना चाहिए। एआरटीओ आरएन चौधरी ने कहा कि 15 वर्ष पुरानी बसों को अवैध माना जाएगा।
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जिस तरह स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के लिए मेन्यू निर्धारित है। उसी तरह अब अस्पतालों के बेडों में बिछने वाले चादरों का दिन के हिसाब से रंग निश्चित किया गया है। सोमवार को सफेद, मंगलवार को केसरिया, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को सफेद, शनिवार को नीला और रविवार को फिर केसरिया रंग का चादर बिछाया जाएगा। इस मामले में सीएमएस डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि यह आदेश पहले ही आ गए थे।
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स्कूलों में संचालित वाहनों से आए दिन हो रही घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। सोमवार को टाउन हाल में सभी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक में बीएसए व एआरटीओ ने वाहन संचालन के मानक बताए। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने कहा कि स्कूलों में चलने वाली बसों में सुरक्षा के सभी मानक उपलब्ध होना अनिवार्य है।
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ऐसा न करने वाले वाहनों से संबधित स्कूलोें की मान्यता भी खत्म हो सकती है। वाहनों की गति सीमा 40 किमी प्रति घंटे से अधिक न हो। चालक का लाइसेंस पांच साल पुराना होना चाहिए। एआरटीओ आरएन चौधरी ने कहा कि 15 वर्ष पुरानी बसों को अवैध माना जाएगा।