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तीस सौ साल पुरानी परंपरा टूटी, नहीं निकली जगन्नाथ यात्रा
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फोटो -11- शहर के तरौंहा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा अखाड़ा परिसर के अंदर ही रही। यहीं पर भक्तों ने
- फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट शहर के जयदेव दास अखाड़ा तरौंहा मंदिर से हर साल निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा इस बार नहीं निकल सकी। तीर्थक्षेत्र की करीब तीस सौ साल पुरानी परंपरा कोरोना संक्रमण के भय की वजह से टूट गई।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने से ऐसा हुआ। इस वजह से अखाड़ा परिसर में ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की मूर्ति को रथ में बैठाया गया। वहां पर विधि विधान से पूजा पाठ किया गया। इसके बाद भक्तों ने सोशल डिस्टिेंसिंग के नियमों के आधार पर दर्शन किया।
गौरतलब है कि करीब तीन सौ वर्षों से तीर्थक्षेत्र में जगन्नाथ यात्रा निकाली जा रही है। यह यात्रा शहर के कच्ची छावनी से होकर सदर बाजार फिर सोेनेपुर गांव पहुंचकर विश्राम करती है। पंचमी के दिन मां जानकी सोनेपुर पहुंचकर जगन्नाथ व बलभद्र व सुभद्रा को मना लेती हैं।
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इस दिन यहां पर विशाल मेला लगता है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण रथ नहीं निकल सका। हालांकि भक्त यहां नौ दिनों तक दर्शन कर सकते हैं। अखाड़ा परिसर के बाहर ही दुकानें सजाई र्गइं हैं। जहां भक्तों की बेहद कम भीड़ दिखी।
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मंदिर के पुजारी ने बताया कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने से ऐसा हुआ। इस वजह से अखाड़ा परिसर में ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा की मूर्ति को रथ में बैठाया गया। वहां पर विधि विधान से पूजा पाठ किया गया। इसके बाद भक्तों ने सोशल डिस्टिेंसिंग के नियमों के आधार पर दर्शन किया।
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गौरतलब है कि करीब तीन सौ वर्षों से तीर्थक्षेत्र में जगन्नाथ यात्रा निकाली जा रही है। यह यात्रा शहर के कच्ची छावनी से होकर सदर बाजार फिर सोेनेपुर गांव पहुंचकर विश्राम करती है। पंचमी के दिन मां जानकी सोनेपुर पहुंचकर जगन्नाथ व बलभद्र व सुभद्रा को मना लेती हैं।
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इस दिन यहां पर विशाल मेला लगता है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण रथ नहीं निकल सका। हालांकि भक्त यहां नौ दिनों तक दर्शन कर सकते हैं। अखाड़ा परिसर के बाहर ही दुकानें सजाई र्गइं हैं। जहां भक्तों की बेहद कम भीड़ दिखी।