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Chitrakoot News: सूचना का अधिकार अधिनियम व मानवाधिकार की दी जानकारी
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चित्रकूट/खोही। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम और इसका मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यों से संबंध विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ।
मुख्य अतिथि सूचना का अधिकार आयोग लखनऊ के उप सचिव तेजस्कर पांडेय ने आरटीआई अधिनियम के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक महत्व और इसके माध्यम से पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। कहाकि यह अधिनियम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसके माध्यम से नागरिक न केवल सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकते हैं बल्कि सरकारी नीतियों और योजनाओं में व्याप्त कमियों को भी उजागर कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उप सचिव ने अपनी लिखी हुई सामान्य अध्ययन पुस्तक विश्वविद्यालय को भेंट की। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम का संस्कृत अनुवाद भी विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य को भेंट किया। यह पहल छात्रों और शिक्षकों को आरटीआई अधिनियम की गहरी समझ प्रदान करने के साथ संस्कृत भाषा के माध्यम से इसे व्यापक संदर्भ में अध्ययन करने का अवसर देगी। कुलाधिपति ने कहा कि यह प्रयास छात्रों को न केवल सूचना के अधिकार के महत्व को समझने में मदद करेगा बल्कि भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत के महत्व को भी उजागर करेगा। कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि सूचना का अधिकार आयोग लखनऊ के उप सचिव तेजस्कर पांडेय ने आरटीआई अधिनियम के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक महत्व और इसके माध्यम से पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। कहाकि यह अधिनियम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसके माध्यम से नागरिक न केवल सरकारी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकते हैं बल्कि सरकारी नीतियों और योजनाओं में व्याप्त कमियों को भी उजागर कर सकते हैं।
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कार्यक्रम के दौरान उप सचिव ने अपनी लिखी हुई सामान्य अध्ययन पुस्तक विश्वविद्यालय को भेंट की। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम का संस्कृत अनुवाद भी विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य को भेंट किया। यह पहल छात्रों और शिक्षकों को आरटीआई अधिनियम की गहरी समझ प्रदान करने के साथ संस्कृत भाषा के माध्यम से इसे व्यापक संदर्भ में अध्ययन करने का अवसर देगी। कुलाधिपति ने कहा कि यह प्रयास छात्रों को न केवल सूचना के अधिकार के महत्व को समझने में मदद करेगा बल्कि भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत के महत्व को भी उजागर करेगा। कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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