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चित्रकूट में हनुमान धारा मंदिर दर्शन के लिए रोप-वे का शुभारंभ
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Inauguration of ropeway for Hanuman Dhara temple darshan in Chitrakoot
- फोटो : CHITRAKUTT
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। धर्मनगरी स्थित विश्वप्रसिद्ध हनुमान धारा मंदिर की 618 सीढ़ियों को चढ़कर भगवान के दर्शन करने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अब राहत मिली है। महज पांच मिनट में रोप-वे से पहाड़ की चोटी पर विराजमान भगवान हनुमान के दर्शन कर सकेंगे। हर घंटे 500 यात्री आवागमन वाले 302 मीटर लंबे रोप-वे को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित कर दिया गया है। मोनोकेबल गृप रोप-वे का लोकार्पण सतना मप्र सांसद गणेश सिंह ने किया।
सोमवार को कोलकाता की दामोदर रोप-वे द्वारा दो साल में तैयार किए गए आकर्षक रोपवे का शुभारंभ सतना सांसद ने वैदिक पूजन के साथ किया। सांसद समेत सतना के डीएम अजय कटसेरिया व अन्य लोगों ने रोप-वे से मंदिर जाकर पूजन भी किया। इसी दौरान सांसद ने कहा कि यह विशेष स्थान पर बना रोप-वे हर हाल में लाखों श्रद्धालुओं के लिए राहत का काम करेगा। ऊंचे पहाड़ पर सीढ़ी से चढ़ने पर बडे़ बुजुर्ग व बीमार व्यक्तियों के लिए अब आसानी होगी। डीएम ने कहा कि कई तरह की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। खासकर पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह व्यवस्थित की जाए।
दामोदर रोपवे कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट श्रवण अग्रवाल ने बताया कि कंपनी पहाड़ी के टर्मिनल का निर्माण करती है। यह रोप-वे दो साल में बनकर तैयार हुआ है। मैहर में शारदादेवी मंदिर पर बना रोप-वे इसका उदाहरण है। इस मौके पर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, डीआरआई के संगठन मंत्री अभय महाजन, अपर एसपी अभिनव चौकसे, शंकर दयाल मिश्रा, भाजपा के जिलाउपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल, सुभाष शर्मा, अवधकिशोर, ओमप्रकाश शर्मा, नवल श्रीवास्तव, सागर महाजन व नयागांव थाना प्रभारी आरबी त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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पर्यटकों की संख्या बढे़गी
खोही। पर्यटकों की सुविधा के लिए धर्मनगरी के हनुमानधारा तीर्थ स्थल पर शुरू रोप-वे से पर्यटकों क ो अच्छी सहूलियत मिलेगी। पर्यटकों की संख्या भी बढे़गी। इसको बनाने में कुल लागत 13 करोड़ रुपये आई है। यहां का प्राकृतिक नजारा इतना सुहाना है कि बड़ी संख्या में दूर-दूर से पर्यटक हर साल आते हैं। 13 करोड़ की लागत से तैयार रापे-वे से मंदिर तक आने जाने का किराया 130 रुपये है। बच्चों का किराया जीएसटी सहित 83 रुपये है। यह जानकारी राप-वे के वाइस प्रेसिडेंट श्रवण कुमार अग्रवाल ने दी। होटल व्यवसायी अरुण गुप्ता ने बताया कि हनुमानधारा तीर्थ स्थल क्षेत्र में सबसे अच्छा स्थान है। यहां पर आधुनिक सुविधाएं बढ़ने से पर्यटकों को लाभ होगा।
लंका युद्ध जीतने के बाद श्रीहनुमान ने चित्रकूट में किया विश्राम
खोही। धर्मनगरी के प्राचीन हनुमानधारा तीर्थ स्थल से श्रद्धालुओं की आस्था वर्षों पुरानी है। यहां रोजाना तीर्थ यात्री दर्शन करने के लिए आते है। संतों का मानना है कि जब भगवान श्रीराम लंका का युद्ध जीत कर अयोध्या पहुंचे तो उनसे श्रीहनुमान ने कहा ऐसा स्थान बताए जहां वह अब विश्राम कर आप की भक्ति कर सके। इस पर श्रीराम ने चित्रकूट मंदाकिनी नदी के पास बने पर्वत में रहने के लिए कहा था। उसी से समय श्रीहनुमान आकर इस पर्वत में रहने लगे थे। जिससे श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। यह बात महंत दिव्य जीवनदास, संत नवलेश दीक्षित आदि ने बताई।
ये है मान्यता
हनुमान धारा पहाड़ी के मध्य पर बहुत प्रसिद्ध स्थल है। हनुमान जी ने अपनी लंका दहन कर वापस आते वक्त अपनी पूंछ पर लगी आग इसी धारा में बुझाई थी। हनुमान धारा रामायण के पवित्र पाठ में महत्वपूर्ण उल्लेख मिलता है। यह माना जाता है कि हनुमान धारा में बसंत का पानी भगवान श्रीराम द्वारा बनाया गया था। बसंत का पानी ज्ञात और अपने उपचार गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसकी काफी मांग है और भक्त उन्हें बड़ी संख्या में वापस ले जाते हैं।
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चित्रकूट। धर्मनगरी स्थित विश्वप्रसिद्ध हनुमान धारा मंदिर की 618 सीढ़ियों को चढ़कर भगवान के दर्शन करने वाले लाखों श्रद्धालुओं को अब राहत मिली है। महज पांच मिनट में रोप-वे से पहाड़ की चोटी पर विराजमान भगवान हनुमान के दर्शन कर सकेंगे। हर घंटे 500 यात्री आवागमन वाले 302 मीटर लंबे रोप-वे को श्रद्धालुओं के लिए समर्पित कर दिया गया है। मोनोकेबल गृप रोप-वे का लोकार्पण सतना मप्र सांसद गणेश सिंह ने किया।
सोमवार को कोलकाता की दामोदर रोप-वे द्वारा दो साल में तैयार किए गए आकर्षक रोपवे का शुभारंभ सतना सांसद ने वैदिक पूजन के साथ किया। सांसद समेत सतना के डीएम अजय कटसेरिया व अन्य लोगों ने रोप-वे से मंदिर जाकर पूजन भी किया। इसी दौरान सांसद ने कहा कि यह विशेष स्थान पर बना रोप-वे हर हाल में लाखों श्रद्धालुओं के लिए राहत का काम करेगा। ऊंचे पहाड़ पर सीढ़ी से चढ़ने पर बडे़ बुजुर्ग व बीमार व्यक्तियों के लिए अब आसानी होगी। डीएम ने कहा कि कई तरह की सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। खासकर पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह व्यवस्थित की जाए।
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दामोदर रोपवे कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट श्रवण अग्रवाल ने बताया कि कंपनी पहाड़ी के टर्मिनल का निर्माण करती है। यह रोप-वे दो साल में बनकर तैयार हुआ है। मैहर में शारदादेवी मंदिर पर बना रोप-वे इसका उदाहरण है। इस मौके पर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, डीआरआई के संगठन मंत्री अभय महाजन, अपर एसपी अभिनव चौकसे, शंकर दयाल मिश्रा, भाजपा के जिलाउपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल, सुभाष शर्मा, अवधकिशोर, ओमप्रकाश शर्मा, नवल श्रीवास्तव, सागर महाजन व नयागांव थाना प्रभारी आरबी त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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पर्यटकों की संख्या बढे़गी
खोही। पर्यटकों की सुविधा के लिए धर्मनगरी के हनुमानधारा तीर्थ स्थल पर शुरू रोप-वे से पर्यटकों क ो अच्छी सहूलियत मिलेगी। पर्यटकों की संख्या भी बढे़गी। इसको बनाने में कुल लागत 13 करोड़ रुपये आई है। यहां का प्राकृतिक नजारा इतना सुहाना है कि बड़ी संख्या में दूर-दूर से पर्यटक हर साल आते हैं। 13 करोड़ की लागत से तैयार रापे-वे से मंदिर तक आने जाने का किराया 130 रुपये है। बच्चों का किराया जीएसटी सहित 83 रुपये है। यह जानकारी राप-वे के वाइस प्रेसिडेंट श्रवण कुमार अग्रवाल ने दी। होटल व्यवसायी अरुण गुप्ता ने बताया कि हनुमानधारा तीर्थ स्थल क्षेत्र में सबसे अच्छा स्थान है। यहां पर आधुनिक सुविधाएं बढ़ने से पर्यटकों को लाभ होगा।
लंका युद्ध जीतने के बाद श्रीहनुमान ने चित्रकूट में किया विश्राम
खोही। धर्मनगरी के प्राचीन हनुमानधारा तीर्थ स्थल से श्रद्धालुओं की आस्था वर्षों पुरानी है। यहां रोजाना तीर्थ यात्री दर्शन करने के लिए आते है। संतों का मानना है कि जब भगवान श्रीराम लंका का युद्ध जीत कर अयोध्या पहुंचे तो उनसे श्रीहनुमान ने कहा ऐसा स्थान बताए जहां वह अब विश्राम कर आप की भक्ति कर सके। इस पर श्रीराम ने चित्रकूट मंदाकिनी नदी के पास बने पर्वत में रहने के लिए कहा था। उसी से समय श्रीहनुमान आकर इस पर्वत में रहने लगे थे। जिससे श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। यह बात महंत दिव्य जीवनदास, संत नवलेश दीक्षित आदि ने बताई।
ये है मान्यता
हनुमान धारा पहाड़ी के मध्य पर बहुत प्रसिद्ध स्थल है। हनुमान जी ने अपनी लंका दहन कर वापस आते वक्त अपनी पूंछ पर लगी आग इसी धारा में बुझाई थी। हनुमान धारा रामायण के पवित्र पाठ में महत्वपूर्ण उल्लेख मिलता है। यह माना जाता है कि हनुमान धारा में बसंत का पानी भगवान श्रीराम द्वारा बनाया गया था। बसंत का पानी ज्ञात और अपने उपचार गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसकी काफी मांग है और भक्त उन्हें बड़ी संख्या में वापस ले जाते हैं।