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Chitrakoot News: अस्पतालों में आग से निपटने के इंतजाम नाकाफी
Thu, 04 Jun 2026 11:28 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:28 PM IST
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चित्रकूट। बिहार के मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से तीन लोगों की जान चली गई। जबकि कई मरीज घायल हो गए। वहां के अस्पताल में आपात कालीन रास्ता सुगम नहीं था। चित्रकूट जनपद के सरकारी और निजी अस्पतालों की भी यही स्थिति है। ज्यादातर निजी अस्पतालों में सिर्फ एक ही रास्ता है। इन अस्पतालों में न तो मानक अनुरूप अग्निशमन यंत्र हैं और न ही आग से निपटने के लिए प्रशिक्षित कर्मी। आग लगने जैसी स्थिति में मरीजों और तीमारदारों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई निजी अस्पतालों के पास फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं है। अधिकांश निजी अस्पतालों में प्रवेश और निकास के लिए एक ही द्वार है। आपात स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को बाहर निकालने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में भगदड़ और जनहानि का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जिला अस्पताल में भी फायर सिस्टम का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि, वार्डों में पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
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अस्पताल में लगा फायर सिलिंडर भी एक्सपायरी डेट का
रामघाट के निकट स्थित सीतापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड की व्यवस्था है, लेकिन आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। अस्पताल परिसर में लगा फायर सिलिंडर भी एक्सपायरी डेट का पाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। यदि किसी कारणवश आग लग जाती है तो समय पर बचाव संभव नहीं होगा।
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बोले जिम्मेदार-- -- -- -- --
सभी सीएचसी और पीएचसी के अधीक्षकों को बुलाया गया है। जिन भी अस्पतालों में कमी पाई जा रही है, उसे ठीक करवाया जा रहा है। साथ ही निजी अस्पतालों की भी जांच की जा रही है।
डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई निजी अस्पतालों के पास फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं है। अधिकांश निजी अस्पतालों में प्रवेश और निकास के लिए एक ही द्वार है। आपात स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को बाहर निकालने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में भगदड़ और जनहानि का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जिला अस्पताल में भी फायर सिस्टम का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि, वार्डों में पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
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अस्पताल में लगा फायर सिलिंडर भी एक्सपायरी डेट का
रामघाट के निकट स्थित सीतापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार बेड की व्यवस्था है, लेकिन आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। अस्पताल परिसर में लगा फायर सिलिंडर भी एक्सपायरी डेट का पाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। यदि किसी कारणवश आग लग जाती है तो समय पर बचाव संभव नहीं होगा।
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बोले जिम्मेदार
सभी सीएचसी और पीएचसी के अधीक्षकों को बुलाया गया है। जिन भी अस्पतालों में कमी पाई जा रही है, उसे ठीक करवाया जा रहा है। साथ ही निजी अस्पतालों की भी जांच की जा रही है।
डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी