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देश की तरक्की में संत सती सूर का महत्वपूर्ण योगदान

Thu, 07 Mar 2019 11:03 PM IST
akhilesh अखिलेश यादव देश की तरक्की में संत सती सूर का महत्वपूर्ण योगदान
देश की तरक्की में संत सती सूर का महत्वपूर्ण योगदान Published by: akhilesh अखिलेश यादव Updated Thu, 07 Mar 2019 11:03 PM IST
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Important contribution of Sant Sati Sur to the nation's progress
तिरंगा - फोटो : Amarujala
अमर उजाला ब्यूरो
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चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले में भगवान श्रीराम व सीता के चरित्र का उल्लेख कर विद्वजनों ने नारी शक्ति पर पूरी रामलीला को केंद्रित बताया। माता सीता ने अपने जीवन काल में नारी के तीनों रूप में आदर्श स्थापित किया। इसी प्रकार माता कैकेई के कारण भगवान श्रीराम चित्रकूट क्षेत्र आए और क्षेत्र के लोग धन्य हो गए। साधु संत महंत व विद्वजनों का मानना है कि किसी भी देश की तरक्की के लिए हर हाल में संत सती व सूर का ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। विद्वजनों ने देश के वर्तमान हालात पर भारत पाक के बीच छिडे़ युद्ध जैसे हालात पर कहा कि दोनों पक्ष के लिए खून खराबा अच्छा नहीं होता लेकिन कभी कभार शांति व धर्म की स्थापना के लिए मजबूरी होती है।

 धर्मनगरी के सीतापुर रामायण मेला परिसर में रामकथा के प्रख्यात विद्वानों ने रामकथा के विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा की। जिसमें झांसी जनपद के चिरगांव की मानस मंदाकिनी पांडेय ने कहा कि माता सीता ने अपने आदर्शों से समाज को शिक्षा दी है। सीताजी के जीवन में प्रेमतुरा, प्रतिष्ठातुरा, विरहतुरा के रुप को जीवंत किया है। ‘सियाराम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरु जुग पानी।’ जननी सम जानइ परि नारी के कथानक पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की उन्नति में तीन लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है उनमें संत, सती और सूर हैं। डा. तीरथदीन पटेल फ तेहगंज ने बुंदेली लोकगीत के माध्यम से स्पष्ट किया कि चित्रकूट के सभी स्थानों को पवित्र करने यहां की मिट्टी के एक-एक कण को राममय बनाने में माता कैकेयी का प्रथम हाथ है। मध्य प्रदेश ग्वालियर के पं. डा. श्री लाल पचौरी ,सनत कुमार मिश्र रामायणी व प्रयागराज के डा. सीताराम सिंह ‘विश्वबंधु’ ने भी रामायण के दोहो का विस्तार से समझाया।    
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महाराष्ट्र मुंबई के वीरेंद्र प्रसाद शास्त्री ने श्रीराम नाम की महिमा का बखान करते हुए श्रोताओं को बताया कि अग्नि, सूर्य, चंद्रमा में जो तेज विद्यमान है उससे कई गुना अधिक तेज राम के नाम में विद्यमान है। अनुसंधानकर्ता डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने रामकाव्यों की परंपरा में महाकवि चंद्र का विशेष महत्व बताया। रांची बिहार विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा. जंग बहादुर पांडेय, डा. स्वर्णलता , मुजफ्फरपुर, डा. देवेंद्र चंद्रदास गुवाहाटी आसाम, किरण त्रिपाठी, वंदना तिवारी, रघुनाथ रामायणी करेली एवं डा. उदयशंकर दुबे भदोही ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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