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Chitrakoot News: अस्पताल के कमरे बनाए न किया पौधरोपण, फिर भी किया भुगतान

Thu, 11 Apr 2024 12:42 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 12:42 AM IST
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Hospital rooms were not built, trees were planted, yet payment was made.
चित्रकूट। सपा शासन काल में 2004 में तैनात तत्कालीन डीएम, सीडीओ सहित परियोजना निदेशक के खिलाफ पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी एनजीओ से कार्य कराने और बिना काम के भुगतान की रिपोर्ट दर्ज होने की दिनभर सरकारी कार्यालयों चर्चा रही। बताया जाता है कि ब्लैक लिस्टेड एनजीओ को लोढ़वारा गांव में पौधरोपण, खाद्यान्न वितरण व शहर के पुरानी बाजार स्थित अस्पताल में दो कक्ष निर्माण का कार्य दिया गया, जो किया ही नहीं गया।
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बुधवार को तत्कालीन डीएम समेत अन्य पर रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी पर कर्मचारी कहते रहे कि जैसी करनी, वैसी भरनी। यहां के नेताओं ने कहा कि उस दौरान जिले में कराए गए अन्य विकास कार्यों की भी जांच होनी चाहिए। तत्कालीन डीएम दिल्ली के बसंतकुंज में ग्रीन एवेन्यू देशवाल फार्म सेक्टर डी निवासी ओम सिंह देशवाल, प्रतापगढ़ निवासी भूपेंद्र त्रिपाठी व प्रयागराज के अल्लाहपुर निवासी पूर्व परियोजना निदेशक प्रेमचंद्र द्विवेदी जिले में 2004 में तैनात रहे।
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इन पर फैजाबाद के एनजीओ का पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी निधि देने और आवंटित राशि से कोई काम न होने पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन पर धोखाधड़ी कर 18 लाख 97 हजार 400 रुपये का गबन करने का आरोप है। कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव रूद्र प्रसाद मिश्र का कहना कि तत्कालीन डीएम ओम सिंह देशवाल व सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी का जिले एकक्षत्र राज्य चलाते थे। बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती थी। जिले में कराए गए अन्य विकास कार्यों की जांच करानी चाहिए।
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मुलायम सिंह यादव ने देशवाल को किया था निलंबित
जिले के तत्कालीन डीएम, सीडीओ और परियोजना निदेशक अपने कार्यकाल में काफी चर्चित थे। मामला सिर्फ ब्लैक लिस्टेड एनजीओ को काम देकर फर्जी भुगतान का ही नहीं, खाद्यान्न घोटाला और पौधरोपण में गड़बड़ी भी थी। इसकी शिकायत पर मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने डीएम ओमसिंह देशवाल को झांसी में समीक्षा बैठक के बाद निलंबित कर दिया था। सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी की जिले में दो बार तैनाती हुई। इतना ही नहीं चार माह तक डीएम ही सीडीओ के चार्ज पर थे।
डीएम ओम सिंह देशवाल, भूपेंद्र त्रिपाठी और पूर्व परियोजना निदेशक प्रेमचंद्र द्विवेदी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच चल रही है। ओम सिंह देशवाल की तैनाती जिले में फरवरी 2004 में की गई थी। उन्हें 31 अक्तूबर 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने निलंबित कर दिया था। सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी जिले में दो बार तैनात थे। पहली बार 21 अगस्त से 2002 से 25 मई 2003 तक रहे। इसके बाद इनका तबादला हो गया। इसके बाद इनकी तैनाती दोबारा 3 फरवरी 2005 की गई, जो 20 जून 2005 तक जिले में रहे। बताया जा रहा है इनका इतना रसूख था कि इनके इशारे में ही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य होते रहे। वहीं परियोजना निदेशक प्रेमचंद्र द्विवेदी 2 जुलाई 2001 तैनाती की गई। जो एक साल से अधिक समय तक यहां पर तैनात रहे।
इनसेट
कई मामले मेेें भ्रष्टाचार की हुई थी शिकायत
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव ने बताया कि जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे तो उनके पिता राजबहादुर सिंह यादव सपा जिलाध्यक्ष थे। उन्होंने डीएम ओम सिंह देशवाल के भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से की थी। इसमें जिले केे लोढ़वारा गांव में पौधरोपण के मामले सहित खाद्यान्न घोटला व शहर के पुरानी बाजार स्थित अस्पताल के निर्माण के भवन में की गई धांधली को लेकर शिकायत की थी। आरोप था कि यह कार्य हुए ही नहींं हैं। संवाद
-इनसेट
देशवाल के कार्यकाल में बालू माफिया की रही चांदी
उनके पिता की हत्या करने की रची जा रही साजिश
संवाद न्यूज एजेंसी
आरोप है कि डीएम ओम देशवाल के कार्यकाल में बालू माफिया की चांदी रही। वे मन मुताबिक कार्य करा लेते थे। यदि कोई शिकायत करता था तो उसको दबाने के लिए स्थानीय कुछ नेता उनकी मदद करते थे।
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव ने बताया कि उनके पिता राजबहादुर यादव उस दौरान जिलाध्यक्ष थे। उन्होंने बालू माफियाओं की शिकायत की थी। जिसमेे डीएम ओम सिंह देशवाल बालू माफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे बालू माफियाओं के हौसले बढ़ गए थे। इससे बालू माफिया कई करोड़ रूपये की संपत्ति अर्जित कर लिए। जब कभी उनके पिता राजबहादुर शिकायत करते तो उनको जान से भी मारने की धमकी दी जाती थी। यदि उस दौरान तत्कालीन डीएम को निलंंबित नहीं किया जाता तो उनके पिता की हत्या भी हो सकती थी।

यह है एनजीओ
फैजाबाद के एनजीओ पर्यावरण एवं ग्राम्य विकास अभियंत्रण सेवा संस्थान का फैजाबाद मंडल के डिप्टी रजिस्ट्रार सोसाइटीज एवं चिट्स ने 16 अक्तूबर 2001 को पंजीकरण निरस्त कर दिया था।


ये हैं आरोपी
तत्कालीन डीएम व दिल्ली के बसंत कुंज ग्रीन एवेन्यू देशवाल फार्म निवासी ओम सिंह देशवाल, तत्कालीन सीडीओ और प्रतापगढ़ के सदोदरपुर निवासी भूपेंद्र त्रिपाठी, डीआरडीए के तत्कालीन परियोजना निदेशक व प्रयागराज के जार्ज टाउन निवासी प्रेमचंद्र द्विवेदी, झांसी के कुंडपाठा नंदनपुरा निवासी सोनपाल समेत संस्था के अध्यक्ष बाराबंकी के टिकैतनगर निवासी देवनारायण तिवारी, डीआरडीए के तत्कालीन पटल सहायक और चित्रकूट के सीएमओ कार्यालय के पास पुरानी कर्वी निवासी प्रदीप कुमार माथुर, चित्रकूट के गांधीगंज निवासी रामस्वरूप श्रीवास्तव, गांधीगंज निवासी मुन्नालाल तिवारी, आरईएस के अवर अभियंता सिद्धार्थनगर के सरौता निवासी बुद्धिराम चौधरी हैं। इनमें से ज्यादातर रिटायर्ड हो चुके हैं।
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