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चित्रकूटः समय, समाज और साहित्य पर गहन मंथन जरूरी , हिन्दी विभाग की संगोष्ठी में कुलपति ने किए विचार विमर्श
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खोही(चित्रकूट) में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय के कला संकाय, हिंदी विभाग द्वारा शुक्रवार को वेबिनार संगोष्ठी आयोजित की। कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में उपजी सामाजिक समस्याओं एवं साहित्य की भूमिका पर विमर्श आवश्यक है।
विवि परिसर से वेबिनार संगोष्ठी में डॉ. कुसुम सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी की विभीषिका ने संघर्षों समस्याओं एवं चुनौतियों पर कई सवाल किए। अध्यक्ष हिंदी विभाग अवधेश प्रताप सिंह विश्व विद्यालय रीवा के प्रो. दिनेश कुशवाहा ने कहा कि प्रत्येक कालखंड के साहित्य में युगबोध और सत्य होता है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के प्रो. संजय सिंह ने कहा कि साहित्यकार की दृष्टि पैनी होती है। वह समाज को अपने साहित्य में जिस रूप में दिखता है, समाज व वैज्ञानिक उसी रूप में देखता है। आभार प्रदर्शन डॉ ललित कुमार सिंह ने व्यक्त किया।
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इस दौरान काशी हिंदू विश्व विद्यालय वाराणसी के हिंदी विभाग के प्रो आशीष त्रिपाठी, इलाहाबाद केंद्रीय विश्व विद्यालय के प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रो डीपी राय अधिष्ठाता कृषि संकाय, डॉ नीलम चौरे विभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान विशिष्ट अतिथि रहे।
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विवि परिसर से वेबिनार संगोष्ठी में डॉ. कुसुम सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी की विभीषिका ने संघर्षों समस्याओं एवं चुनौतियों पर कई सवाल किए। अध्यक्ष हिंदी विभाग अवधेश प्रताप सिंह विश्व विद्यालय रीवा के प्रो. दिनेश कुशवाहा ने कहा कि प्रत्येक कालखंड के साहित्य में युगबोध और सत्य होता है।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के प्रो. संजय सिंह ने कहा कि साहित्यकार की दृष्टि पैनी होती है। वह समाज को अपने साहित्य में जिस रूप में दिखता है, समाज व वैज्ञानिक उसी रूप में देखता है। आभार प्रदर्शन डॉ ललित कुमार सिंह ने व्यक्त किया।
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इस दौरान काशी हिंदू विश्व विद्यालय वाराणसी के हिंदी विभाग के प्रो आशीष त्रिपाठी, इलाहाबाद केंद्रीय विश्व विद्यालय के प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह, प्रो डीपी राय अधिष्ठाता कृषि संकाय, डॉ नीलम चौरे विभागाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान विशिष्ट अतिथि रहे।