{"_id":"5ae3662f4f1c1b350b8b6e39","slug":"gst-website-not-open-in-ten-distric","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिलें में दस दिन से नहीं खुल रही जीएसटी की बेवसाइट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिलें में दस दिन से नहीं खुल रही जीएसटी की बेवसाइट
chitrakoot
Updated Fri, 27 Apr 2018 11:34 PM IST
सार
विडंबना ही कहा जाए कि एक माह का लगभग एक करोड़ रुपया जीएसटी व्यापारी जमा करने को लाइन लगाए खड़े
विज्ञापन
विडंबना ही कहा जाए कि एक माह का लगभग एक करोड़ रुपया जीएसटी व्यापारी जमा करने को लाइन लगाए खड़े
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विडंबना ही कहा जाए कि एक माह का लगभग एक करोड़ रुपया जीएसटी व्यापारी जमा करने को लाइन लगाए खड़े है लेकिन विभागीय लापरवाही से सरकार के राजस्व को चूना लग रहा है। इत्तेफाक तो यह है कि इससे अधिकारियों का कोई नुकसान नहीं है बल्कि टैक्स अदा करने वाले व्यापारी को ही लेट फीस पेनाल्टी भी देनी होगी जिसमें उनकी कोई गलती नहीं है। लगभग दस दिनों से जीएसटी की बेवसाइड़ नहीं खुल रही और जिले में सर्वर भी धड़ाम है। इसे लेकर व्यापारियों में आक्रोश है।
लगभग एक करोड़ रुपये का प्रतिमाह टैक्स देने वाले व्यापारी सर्वर फेल होने से परेशान हैं। एक तरफ सरकार जीएसटी जमा कराने का दबाव बना रही है लेकिन सर्वर में सुधार कराने का कोई उपाए नहीं किया जा रहा। टैक्स भरने को व्यापारी आए दिन विभागीय कार्यालय के चक्कर काट रहे है। व्यापारियों ने यहां तक कहा कि आखिर कैसे करें व्यापार हम तो टैक्स समय से जमा करने को खडे़ है लेकिन व्यवस्था की नाकामी का समाधान नहीं है। गलती सरकारी व्यवस्था की है और जीएसटी की पेनाल्टी व्यापारियों को भरनी होगी। टेलीकाम व्यवसाय से जुड़े व युवा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राहुल गुप्ता ने बताया कि जीएसटी को लेकर व्यापारी हलाकान हैं। सरकार जितना इसे आसान बताती है उतना ही यहां कठिन है।
इसी अप्रैल माह में ही जीएसटी जमा करने की अंतिम तिथि 20 है लेकिन सर्वर फेल है। इमानदारी से टैक्स जमा करने वाले व्यापारी परेशान हैं और विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
विज्ञापन
लोहे के व्यापारी व व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष प्रदीप कुमार उर्फ गोलू गुप्ता ने कहा कि जीएसटी काउंसिल से लेकर अधिकारियों को फोन से शिकायत कर थक गए हैं। टैक्स न दे तो उसे चोर कहा जाता है। सरकारी कर्मी के बावजूद व्यापारी को ही पेनाल्टी भरनी पड़ेगी और समय बर्बाद करना होगा तो इसके जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले में कर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल शुक्ला व महासचिव पियुष गोयल ने बताया कि सर्वर खराब होने व जीएसटी बेवसाइड बंद होने से दस दिनों से कोई काम नहीं हो रहा है। व्यापारियों को रोज टरकाना पड़ता है। उधर वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिशभनर नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वर व बेवसाइड की समस्या स्थानीय नहीं है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। पेनाल्टी के सवाल पर कहा कि यह बड़े अधिकारी ही निर्णय कर सकते हैं।
विज्ञापन
लगभग एक करोड़ रुपये का प्रतिमाह टैक्स देने वाले व्यापारी सर्वर फेल होने से परेशान हैं। एक तरफ सरकार जीएसटी जमा कराने का दबाव बना रही है लेकिन सर्वर में सुधार कराने का कोई उपाए नहीं किया जा रहा। टैक्स भरने को व्यापारी आए दिन विभागीय कार्यालय के चक्कर काट रहे है। व्यापारियों ने यहां तक कहा कि आखिर कैसे करें व्यापार हम तो टैक्स समय से जमा करने को खडे़ है लेकिन व्यवस्था की नाकामी का समाधान नहीं है। गलती सरकारी व्यवस्था की है और जीएसटी की पेनाल्टी व्यापारियों को भरनी होगी। टेलीकाम व्यवसाय से जुड़े व युवा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राहुल गुप्ता ने बताया कि जीएसटी को लेकर व्यापारी हलाकान हैं। सरकार जितना इसे आसान बताती है उतना ही यहां कठिन है।
विज्ञापन
इसी अप्रैल माह में ही जीएसटी जमा करने की अंतिम तिथि 20 है लेकिन सर्वर फेल है। इमानदारी से टैक्स जमा करने वाले व्यापारी परेशान हैं और विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
विज्ञापन
लोहे के व्यापारी व व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष प्रदीप कुमार उर्फ गोलू गुप्ता ने कहा कि जीएसटी काउंसिल से लेकर अधिकारियों को फोन से शिकायत कर थक गए हैं। टैक्स न दे तो उसे चोर कहा जाता है। सरकारी कर्मी के बावजूद व्यापारी को ही पेनाल्टी भरनी पड़ेगी और समय बर्बाद करना होगा तो इसके जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले में कर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल शुक्ला व महासचिव पियुष गोयल ने बताया कि सर्वर खराब होने व जीएसटी बेवसाइड बंद होने से दस दिनों से कोई काम नहीं हो रहा है। व्यापारियों को रोज टरकाना पड़ता है। उधर वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिशभनर नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वर व बेवसाइड की समस्या स्थानीय नहीं है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। पेनाल्टी के सवाल पर कहा कि यह बड़े अधिकारी ही निर्णय कर सकते हैं।